UPTET 2026 Sanskrit Question Paper – Set 4 में संस्कृत भाषा और भाषा-शिक्षण से जुड़े 30 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं। इस सेट में कारक, संधि, लिंग, वचन, संख्या, उपसर्ग, अव्यय, विभक्ति, लकार, प्रत्यय, समास, वर्ण-विचार और गद्यांश आधारित प्रश्नों के साथ भाषा-अधिगम, समावेशी शिक्षा, आकलन, त्रुटि-विश्लेषण, अधिगम की कठिनाइयों तथा बहुभाषिकता जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्प, सही उत्तर और आसान व्याख्या दी गई है, ताकि अभ्यर्थी प्रश्न हल करने के साथ-साथ संबंधित व्याकरणिक एवं शिक्षाशास्त्रीय अवधारणाओं को भी समझ सकें। यह सेट UPTET Sanskrit की तैयारी में अभ्यास और पुनरावृत्ति के लिए उपयोगी है।
1. “मेरुः बालिकायै उपकरणम् यच्छति।” वाक्य में “बालिकायै” किस कारक में है?
(A) अधिकरण कारक
(B) अपादान कारक
(C) करण कारक
(D) सम्प्रदान कारक
व्याख्या
2. ‘सत् + भावः’ का सही संधि-रूप क्या होगा?
(A) सदभावः
(B) सभवः
(C) सद्भावः
(D) सत्भावः
व्याख्या
व्याख्या : ‘सत् + भावः’ के मेल से ‘सद्भावः’ शब्द बनता है।
सत् + भावः = सद्भावः
यहाँ ‘सत्’ के अंतिम त् का परिवर्तन होकर द् हो जाता है और उसके बाद ‘भ’ आने के कारण द्भ का रूप बनता है।
‘सद्भावः’ का अर्थ अच्छी भावना या शुभ भावना होता है। इसलिए सही संधि-रूप सद्भावः है।
3. निम्नलिखित में से पुल्लिंग शब्द कौन-सा है?
(A) लता
(B) फलम्
(C) बालकः
(D) पुस्तकम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘बालकः’ एक पुल्लिंग शब्द है। इसका अर्थ लड़का होता है।
लता स्त्रीलिंग शब्द है, जबकि फलम् और पुस्तकम् नपुंसकलिंग शब्द हैं।
इसलिए दिए गए विकल्पों में केवल ‘बालकः’ पुल्लिंग शब्द है।
4. संख्या 3 का संस्कृत रूप कौन-सा है?
(A) एकः
(B) द्वौ
(C) त्रयः
(D) चत्वारः
व्याख्या
व्याख्या : संस्कृत में संख्या 3 के लिए पुल्लिंग में ‘त्रयः’ का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण के लिए — त्रयः बालकाः अर्थात् तीन बालक।
ध्यान रखें कि संस्कृत में संख्या 3 के रूप लिंग के अनुसार बदलते हैं। पुल्लिंग में त्रयः, स्त्रीलिंग में तिस्रः तथा नपुंसकलिंग में त्रीणि होता है।
5. ‘वापी’ शब्द का प्रथमा बहुवचन रूप कौन-सा है?
(A) नद्यौ
(B) वापी
(C) वापीम्
(D) वाप्यः
व्याख्या
व्याख्या : ‘वापी’ एक ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द है। ‘वापी’ का अर्थ तालाब या जलाशय होता है।
इसका प्रथमा विभक्ति में रूप इस प्रकार होता है—
वापी — एकवचन
वाप्यौ — द्विवचन
वाप्यः — बहुवचन
इसलिए ‘वापी’ का प्रथमा बहुवचन रूप ‘वाप्यः’ है।
6. “बालिका लेख लिखती है।” का सही संस्कृत अनुवाद कौन-सा है?
(A) बालिका लेख लिखति।
(B) बालिकाः लेख लिखति।
(C) बालकः लेख लिखति।
(D) बालिका लेखे लिखतः।
व्याख्या
व्याख्या : ‘बालिका’ स्त्रीलिंग और एकवचन शब्द है। ‘लिखती है’ के लिए संस्कृत में ‘लिखति’ का प्रयोग होता है।
इसलिए —
बालिका + लिखति = बालिका लेख लिखति।
‘बालिकाः’ बहुवचन है, जबकि ‘बालकः’ पुल्लिंग एकवचन है। ‘लिखतः’ द्विवचन क्रिया का रूप है। इसलिए सही वाक्य ‘बालिका लेख लिखति।’ है।
7. संख्या 5 का संस्कृत रूप कौन-सा है?
(A) पञ्च
(B) चत्वारः
(C) त्रयः
(D) द्वौ
व्याख्या
व्याख्या : संस्कृत में संख्या 5 को ‘पञ्च’ कहते हैं।
संख्या के कुछ प्रमुख संस्कृत रूप इस प्रकार हैं—
1 = एक
2 = द्वि
3 = त्रि
4 = चतुर्
5 = पञ्च
इसलिए सही उत्तर ‘पञ्च’ है।
8. ‘उपविशति’ शब्द में कौन-सा उपसर्ग प्रयुक्त है?
(A) परि
(B) वि
(C) उप
(D) अति
व्याख्या
व्याख्या : ‘उपविशति’ शब्द में ‘उप’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है।
उप + विश् + ति = उपविशति
‘उप’ उपसर्ग का अर्थ समीप या पास आदि का भाव प्रकट करना हो सकता है। ‘उपविशति’ का अर्थ है बैठता है।
इसलिए ‘उपविशति’ में प्रयुक्त उपसर्ग ‘उप’ है।
9. “कदा” अव्यय का अर्थ क्या है?
(A) कस्मिन् स्थाने
(B) कस्मिन् काले
(C) कस्मात् कारणात्
(D) केन प्रकारेण
व्याख्या
व्याख्या : ‘कदा’ एक अव्यय शब्द है। इसका अर्थ ‘कब’ या ‘किस समय’ होता है।
‘कस्मिन् काले’ का अर्थ भी ‘किस समय’ होता है। इसलिए ‘कदा’ का अर्थ कस्मिन् काले है।
कदा = कब = किस समय = कस्मिन् काले
10. “गुरवे नमः।” में “गुरवे” कौन-सी विभक्ति है?
(A) चतुर्थी
(B) सप्तमी
(C) पञ्चमी
(D) षष्ठी
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य है — ‘गुरवे नमः।’ इसका अर्थ है ‘गुरु को नमस्कार।’
‘नमः’ के योग में सामान्यतः चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। ‘गुरु’ शब्द का चतुर्थी एकवचन रूप ‘गुरवे’ है।
गुरुः → प्रथमा एकवचन
गुरवे → चतुर्थी एकवचन
इसलिए ‘गुरवे’ चतुर्थी विभक्ति का रूप है।
11. “धाव्” धातु का प्रथम पुरुष एकवचन लृट् लकार का रूप कौन-सा है?
(A) अधावत्
(B) अधाव
(C) धावतु
(D) धाविष्यति
व्याख्या
व्याख्या : लृट्-लकार का प्रयोग भविष्यत् काल अर्थात् भविष्य में होने वाले कार्य को बताने के लिए किया जाता है।
‘धाव्’ धातु का प्रथम पुरुष एकवचन लृट्-लकार रूप ‘धाविष्यति’ है।
धाविष्यति = वह दौड़ेगा
अन्य विकल्पों में ‘अधावत्’ भूतकाल से संबंधित है और ‘धावतु’ आज्ञार्थक रूप है। इसलिए सही उत्तर धाविष्यति है।
12. ‘तरुः’ शब्द का प्रथमा विभक्ति में बहुवचन रूप क्या होगा?
(A) तरवः
(B) तरुम्
(C) तरौ
(D) तरुणा
व्याख्या
व्याख्या : ‘तरुः’ एक उकारान्त पुल्लिंग शब्द है। इसका अर्थ वृक्ष होता है।
‘तरु’ शब्द के प्रथमा विभक्ति के रूप—
तरुः — एकवचन
तरू — द्विवचन
तरवः — बहुवचन
इसलिए ‘तरुः’ का प्रथमा बहुवचन रूप ‘तरवः’ है।
13. ‘:’ किसका चिह्न है?
(A) अनुस्वारः
(B) विसर्गः
(C) अव्ययम्
(D) स्वरः
व्याख्या
व्याख्या : संस्कृत में ‘ः’ चिह्न को विसर्ग कहते हैं।
विसर्ग का चिह्न दो बिंदुओं के रूप में लिखा जाता है — ः।
उदाहरण — रामः, बालकः, गुरुः आदि शब्दों में विसर्ग दिखाई देता है।
इसलिए दिए गए विकल्पों में सही उत्तर विसर्गः है।
14. ‘प्र + दृश्’ में ‘ल्यप्’ प्रत्यय लगने पर कौन-सा रूप बनेगा?
(A) प्रदृश्य
(B) प्रलिखितः
(C) प्रद्रष्टुम्
(D) प्रपश्यति
व्याख्या
व्याख्या : ‘प्र’ उपसर्ग के साथ ‘दृश्’ धातु का प्रयोग किया गया है। जब यहाँ ल्यप् प्रत्यय लगाया जाता है, तब ‘प्रदृश्य’ रूप बनता है।
प्र + दृश् + ल्यप् = प्रदृश्य
‘प्रदृश्य’ का अर्थ संदर्भ के अनुसार देखकर के भाव में लिया जाता है। उपसर्ग के कारण ‘ल्यप्’ प्रत्ययान्त रूप में ‘प्रदृश्य’ प्राप्त होता है।
15. ‘नीलकण्ठः’ शब्द का समास-विग्रह किस रूप में उचित है?
(A) नीलस्य कण्ठः
(B) नीलः कण्ठः यस्य सः
(C) नीलं च कण्ठं च
(D) नीलः च कण्ठः च
व्याख्या
व्याख्या : ‘नीलकण्ठः’ का अर्थ है ‘जिसका कण्ठ नीला है’।
इसका विग्रह है—
नीलः कण्ठः यस्य सः = नीलकण्ठः
यहाँ ‘नील’ और ‘कण्ठ’ दोनों शब्द मिलकर जिस व्यक्ति का बोध करा रहे हैं, वह स्वयं इन दोनों शब्दों का प्रत्यक्ष अर्थ नहीं है। इसलिए यह बहुव्रीहि समास का उदाहरण है।
याद रखें : जिसमें समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराए, वहाँ सामान्यतः बहुव्रीहि समास होता है।
16. ‘गायकौ’ शब्द किस वचन का रूप है?
(A) नपुंसकलिङ्गम्
(B) बहुवचनम्
(C) एकवचनम्
(D) द्विवचनम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘गायकौ’ शब्द से दो गायकों का बोध होता है। संस्कृत में दो व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए द्विवचन का प्रयोग किया जाता है।
इसलिए ‘गायकौ’ द्विवचन का रूप है।
एकवचन = एक
द्विवचन = दो
बहुवचन = दो से अधिक
अतः सही उत्तर द्विवचनम् है।
[प्र. सं. 77 से 79 गद्यांश प्रश्न]
गद्यांश:
व्यायामः शरीरस्य बलाय स्वास्थ्याय च आवश्यकः अस्ति। ये छात्राः प्रतिदिनं व्यायामं कुर्वन्ति, ते स्वस्थाः उत्साहपूर्णाः च भवन्ति। प्रातःकाले शुद्धवायौ भ्रमणम् अपि हितकरम् अस्ति। स्वस्थे शरीरे मनः अपि प्रसन्नं भवति।
17. प्रतिदिनं व्यायामं कुर्वन्तः छात्राः कथं भवन्ति?
(A) स्वस्थाः उत्साहपूर्णाः च
(B) खिन्नाः
(C) आलसाः
(D) भीताः
व्याख्या
व्याख्या : गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है—
‘ये छात्राः प्रतिदिनं व्यायामं कुर्वन्ति, ते स्वस्थाः उत्साहपूर्णाः च भवन्ति।’
इसका अर्थ है कि जो छात्र प्रतिदिन व्यायाम करते हैं, वे स्वस्थ और उत्साहपूर्ण होते हैं।
इसलिए सही उत्तर ‘स्वस्थाः उत्साहपूर्णाः च’ है।
18. प्रातःकाले किम् हितकरम् अस्ति?
(A) अधिकभोजनम्
(B) शुद्धवायौ भ्रमणम्
(C) विवादः
(D) निद्रा
व्याख्या
व्याख्या : गद्यांश में कहा गया है—
‘प्रातःकाले शुद्धवायौ भ्रमणम् अपि हितकरम् अस्ति।’
इसका अर्थ है कि प्रातःकाल शुद्ध वायु में घूमना भी लाभदायक होता है।
इसलिए सही उत्तर ‘शुद्धवायौ भ्रमणम्’ है।
19. व्यायामः कस्य बलाय आवश्यकः अस्ति?
(A) पुस्तकस्य
(B) कक्षायाः
(C) जलस्य
(D) शरीरस्य
व्याख्या
व्याख्या : गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा है—
‘व्यायामः शरीरस्य बलाय स्वास्थ्याय च आवश्यकः अस्ति।’
इसका अर्थ है कि व्यायाम शरीर के बल और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
प्रश्न में पूछा गया है कि व्यायाम किसके बल के लिए आवश्यक है। इसका उत्तर है ‘शरीरस्य’ अर्थात् शरीर के लिए।
20. निम्नलिखित में से तालव्य वर्णों का समूह कौन-सा है?
(A) च छ ज झ ञ
(B) क ख ग घ ङ
(C) ट ठ ड ढ ण
(D) प फ ब भ म
व्याख्या
व्याख्या : संस्कृत वर्णमाला में वर्णों का वर्गीकरण उनके उच्चारण-स्थान के आधार पर किया जाता है। च, छ, ज, झ, ञ का उच्चारण तालु से होता है।
इसलिए इन्हें तालव्य वर्ण कहा जाता है।
तालव्य वर्ण = च, छ, ज, झ, ञ
वहीं क-वर्ग कण्ठ्य, ट-वर्ग मूर्धन्य और प-वर्ग ओष्ठ्य वर्णों से संबंधित है।
21. ‘विद्यालयः’ में कौन-सा समास माना जा सकता है?
(A) षष्ठी-तत्पुरुषः
(B) बहुव्रीहिः
(C) अव्ययीभावः
(D) द्वन्द्वः
व्याख्या
व्याख्या : ‘विद्यालयः’ शब्द का विग्रह है—
विद्यालयः = विद्यायाः आलयः
अर्थात् ‘विद्या का आलय’।
यहाँ ‘विद्यायाः’ में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ है। जब षष्ठी विभक्ति के संबंध वाले दो पद मिलकर समस्त पद बनाते हैं, तो उसे षष्ठी-तत्पुरुष समास कहते हैं।
इसलिए ‘विद्यालयः’ षष्ठी-तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
22. यदा एकः आरम्भकपाठकः विशिष्टपाठ्यविषयवस्तुनः अभिप्रायं ज्ञातुं पाठ्यविषयस्य सांस्कृतिकपक्षाणां च विषये स्वसामान्य-ज्ञानस्य प्रयोगं करोति, एतत् कथ्यते –
(1) ‘टॉप-अप’ उपागमः
(2) ‘बॉटम-अप’ उपागमः
(3) ‘बॉटम-डाउन’ उपागमः
(4) उद्देश्य-अधिगामी उपागमः (Approach)
व्याख्या
व्याख्या : Top-down Approach में पाठक अपने पहले से उपलब्ध सामान्य ज्ञान, पूर्व अनुभव, सांस्कृतिक ज्ञान और संदर्भ का प्रयोग करके पाठ के अर्थ को समझता है।
इसमें पाठक केवल शब्दों को अलग-अलग समझने के बजाय अपने पूर्वज्ञान और पूरे संदर्भ की सहायता से अर्थ ग्रहण करता है।
इसके विपरीत Bottom-up Approach में अक्षर, शब्द और वाक्य जैसे छोटे भाषाई घटकों से धीरे-धीरे अर्थ की ओर बढ़ा जाता है।
याद रखें :
Top-down = पूर्वज्ञान → अर्थ की समझ
Bottom-up = अक्षर/शब्द → वाक्य → अर्थ
23. अधोलिखितेषु किं अधिगमस्य प्रमुखक्षेत्रेषु न गण्यते ?
(1) सामाजिक–सांस्कृतिकम्
(2) प्रभावशाली
(3) मनोगत्यात्मकम् (Psychomotor)
(4) संज्ञानात्मकम् (Cognitive)
व्याख्या
व्याख्या : अधिगम के प्रमुख क्षेत्रों में सामान्यतः संज्ञानात्मक (Cognitive), भावात्मक (Affective) और मनोगत्यात्मक (Psychomotor) क्षेत्र माने जाते हैं।
संज्ञानात्मक क्षेत्र ज्ञान, स्मृति, चिंतन और समस्या-समाधान से संबंधित है। भावात्मक क्षेत्र भावनाओं, मूल्यों और अभिवृत्तियों से संबंधित है। मनोगत्यात्मक क्षेत्र शारीरिक क्रियाओं और कौशल से संबंधित है।
‘सामाजिक-सांस्कृतिक’ अधिगम को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण संदर्भ हो सकता है, लेकिन दिए गए प्रमुख क्षेत्रों में यह शामिल नहीं है।
याद रखें :
Cognitive + Affective + Psychomotor = अधिगम के प्रमुख क्षेत्र
24. अधोलिखितेषु किं समावेशीक्षायाः रचनायां सहायकं न भवति ?
(1) दलकार्याणि प्रदानम् (Team Task)
(2) बहुभाषिकपद्धतेः प्रयोगः/अङ्गीकरणम्
(3) कक्षायां कतिपयछात्राणां अनुवीक्षणरूपेण उपस्थितिः
(4) मित्रसमूहतनन्त्रिया प्रतिपूर्तिः-व्यवस्था च
व्याख्या
व्याख्या : समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का उद्देश्य सभी बच्चों को उनकी क्षमताओं, भाषाओं, सामाजिक पृष्ठभूमि और सीखने की आवश्यकताओं के अनुसार समान रूप से सीखने के अवसर प्रदान करना है।
दल-कार्य, बहुभाषिक पद्धति और सहपाठी सहयोग जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाती हैं और समावेशी कक्षा के निर्माण में सहायता करती हैं।
इसके विपरीत केवल कुछ छात्रों की निरीक्षण के उद्देश्य से उपस्थिति समावेशी शिक्षा की रचना में प्रत्यक्ष रूप से सहायक नहीं है।
याद रखें : समावेशी कक्षा में समान अवसर, सहयोग, सहभागिता और विविधता का सम्मान महत्वपूर्ण है।
25. अधोलिखितेषु किं रचनात्मकमूल्यस्य उदाहरणं न अस्ति ?
(1) समाने एका सत्रपरीक्षा (Term Test)
(2) व्यापक लिखितपरीक्षायाः काले काले कतिपय-अङ्ककारणाणां च संयोजनम् (Combination)
(3) सम्पूर्णत्रे आयोजान्त लघुपरीक्षायाः आरभ्य मिश्रपरीक्षणपर्यन्तम् आकलनपद्धतयः
(4) सम्पूर्णत्रे मौखिक-लिखित-परीक्षाणां क्रमेण आयोजनम्, भूमिकानिर्धारणं इत्यादि
व्याख्या
व्याख्या : रचनात्मक आकलन (Formative Assessment) अधिगम की प्रक्रिया के दौरान निरंतर किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थी की सीखने की स्थिति को समझना और आवश्यकता के अनुसार सुधार करना होता है।
छोटी परीक्षाएँ, मौखिक प्रश्न, गतिविधियाँ, प्रोजेक्ट, भूमिका-अभिनय और लिखित कार्य आदि रचनात्मक आकलन के माध्यम हो सकते हैं।
केवल एक निश्चित अवधि के अंत में होने वाली सत्र परीक्षा (Term Test) सामान्यतः विद्यार्थी की उपलब्धि को मापने वाली परीक्षा होती है। इसलिए इसे रचनात्मक आकलन का उपयुक्त उदाहरण नहीं माना जाता।
याद रखें :
Formative Assessment = सीखने के दौरान सुधार के लिए
Summative Assessment = अवधि/इकाई के अंत में उपलब्धि मापने के लिए
26. अधिगमे अन्तरालं ज्ञातुं त्रुटिनिरीक्षणं महत्वपूर्णं भवति, यतो हि –
(1) त्रुटयः छात्राणां मस्तिष्कान्तरे प्रवेशं तेषां शिक्षणस्थितेः च ज्ञातुं भवन्ति।
(2) त्रुटयः छात्राणां अवबोधनक्रमे न्यूनता दर्शयति।
(3) त्रुटयः वैचारिकविकासे प्रेरणां च दर्शयति।
(4) अधिकतमाः त्रुटयः छात्राणां दोषपूर्ण–प्रवृत्तेः कारणाः भवन्ति।
व्याख्या
व्याख्या : अधिगम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा की गई त्रुटियाँ केवल उनकी गलती नहीं होतीं, बल्कि वे उनके सोचने और समझने की प्रक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं।
त्रुटियों का विश्लेषण करके शिक्षक यह पता लगा सकता है कि विद्यार्थी को किस अवधारणा या प्रक्रिया को समझने में कठिनाई हो रही है। इसके आधार पर शिक्षक अपनी शिक्षण-पद्धति में आवश्यक सुधार कर सकता है।
इसीलिए त्रुटि-विश्लेषण (Error Analysis) अधिगम और भाषा-शिक्षण में महत्वपूर्ण माना जाता है।
याद रखें : विद्यार्थी की त्रुटि उसके अवबोधन अर्थात् समझने की प्रक्रिया के बारे में संकेत दे सकती है।
27. p इति वर्णस्य b इति, अथवा 6 इति संख्यायाः 9 इति लेखनं पठन् वा एका सामान्यदृष्टिः अस्ति या कं समस्यास्तरलवे प्राप्यते ?
(1) अफेजिया (Aphasia)
(2) एनोमिया (Anomia)
(3) डिस्लेक्सिया (Dyslexia)
(4) स्टटरिंग (Stuttering)
व्याख्या
व्याख्या : डिस्लेक्सिया एक विशिष्ट अधिगम कठिनाई है, जिसमें व्यक्ति को पढ़ने, शब्दों को पहचानने तथा लिखित भाषा को समझने और संसाधित करने में कठिनाई हो सकती है।
कुछ स्थितियों में विद्यार्थी b और d, p और q जैसे अक्षरों अथवा 6 और 9 जैसे प्रतीकों में भ्रम कर सकता है।
हालाँकि केवल अक्षरों या संख्याओं को उलट देना अपने आप में डिस्लेक्सिया का पूर्ण निदान नहीं है। फिर भी दिए गए विकल्पों में पठन-सम्बन्धी ऐसी कठिनाई के लिए उपयुक्त उत्तर डिस्लेक्सिया है।
याद रखें : Dyslexia मुख्यतः पठन एवं भाषा-प्रसंस्करण से संबंधित विशिष्ट अधिगम कठिनाई है।
28. आशयभूत–अन्तर्व्यक्तिक–सम्प्रेषणकौशलं कथ्यते :
(1) अमूर्त्य भाषा (Language of abstraction)
(2) दैनिकसम्प्रेषणाय प्रयुक्तभाषा
(3) अन्तर्भाषा
(4) उच्चतरकोटिभाषाकौशलम्
व्याख्या
व्याख्या : दैनिक जीवन में व्यक्ति दूसरों के साथ बातचीत करने, विचारों को व्यक्त करने, सूचना का आदान-प्रदान करने और सामाजिक संबंध स्थापित करने के लिए भाषा का प्रयोग करता है।
ऐसी भाषा का संबंध अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण से होता है। इसका उद्देश्य व्यावहारिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से संवाद करना है।
इसलिए दिए गए विकल्पों में ‘दैनिकसम्प्रेषणाय प्रयुक्तभाषा’ सही उत्तर है।
याद रखें : अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण का संबंध दैनिक जीवन में लोगों के बीच भाषा के व्यावहारिक प्रयोग से है।
29. भाषा-अधिगम में ‘त्रुटियाँ’ किस रूप में देखी जानी चाहिए?
(1) केवल छात्र की असफलता के रूप में
(2) अधिगम की प्रक्रिया को समझने के उपयोगी संकेत के रूप में
(3) छात्र को दंड देने के आधार के रूप में
(4) शिक्षक की असफलता के निश्चित प्रमाण के रूप में
व्याख्या
व्याख्या : भाषा सीखते समय बच्चों द्वारा की गई त्रुटियाँ केवल उनकी असफलता का प्रमाण नहीं होतीं। वे बच्चे की अधिगम प्रक्रिया और वर्तमान समझ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं।
शिक्षक यदि विद्यार्थी की त्रुटियों का विश्लेषण करता है, तो वह यह समझ सकता है कि बच्चा किस नियम या अवधारणा को किस प्रकार समझ रहा है और कहाँ उसे कठिनाई हो रही है।
इसलिए भाषा-शिक्षण में त्रुटियों को अधिगम की प्रक्रिया को समझने के उपयोगी संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए।
याद रखें : भाषा-शिक्षण में त्रुटि = सीखने की प्रक्रिया का संकेत, केवल असफलता नहीं।
30. भाषा-कक्षा में बच्चों की मातृभाषा के प्रयोग के संबंध में कौन-सा कथन सबसे उपयुक्त है?
(1) मातृभाषा का प्रयोग हमेशा प्रतिबंधित होना चाहिए।
(2) केवल शिक्षक को मातृभाषा का प्रयोग करना चाहिए।
(3) मातृभाषा को बच्चे के पूर्वज्ञान और नई भाषा के बीच सेतु के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
(4) मातृभाषा का भाषा-अधिगम से कोई संबंध नहीं है।
व्याख्या
व्याख्या : बहुभाषिक कक्षा में बच्चे की मातृभाषा या पहली भाषा उसके पूर्वज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। शिक्षक उचित परिस्थितियों में मातृभाषा का प्रयोग करके बच्चे को नई भाषा समझने में सहायता कर सकता है।
जब बच्चा नई भाषा के शब्दों और अवधारणाओं को अपनी पहले से ज्ञात भाषा और अनुभवों से जोड़ता है, तो उसे नई भाषा समझने में सहायता मिलती है।
इसलिए मातृभाषा को भाषा-अधिगम में बाधा मानने के बजाय उचित परिस्थितियों में पूर्वज्ञान और नई भाषा के बीच सेतु के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
याद रखें : बहुभाषिक कक्षा में बच्चे की पहली भाषा को संसाधन (Resource) के रूप में देखा जा सकता है।
Main Topics Covered
इस सेट में मुख्य रूप से ये टॉपिक शामिल हैं:
- सम्प्रदान कारक एवं चतुर्थी विभक्ति
- व्यंजन संधि — सत् + भावः
- लिंग — पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग
- संस्कृत संख्या — 3 और 5
- ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द — वापी
- सरल संस्कृत वाक्य-अनुवाद
- उपसर्ग — उप
- अव्यय — कदा
- चतुर्थी विभक्ति — गुरवे
- लृट् लकार
- उकारान्त पुल्लिंग शब्द — तरुः
- विसर्ग एवं विसर्ग का चिह्न
- ल्यप् प्रत्यय
- बहुव्रीहि समास — नीलकण्ठः
- द्विवचन — गायकौ
- गद्यांश आधारित प्रश्न
- तालव्य वर्ण
- षष्ठी-तत्पुरुष समास — विद्यालयः
- Top-down एवं Bottom-up Approach
- अधिगम के प्रमुख क्षेत्र
- समावेशी शिक्षा
- रचनात्मक एवं योगात्मक आकलन
- त्रुटि-विश्लेषण
- डिस्लेक्सिया
- अन्तर्वैयक्तिक सम्प्रेषण
- भाषा-अधिगम में त्रुटियों की भूमिका
- भाषा-कक्षा में मातृभाषा का प्रयोग
- बहुभाषिकता एवं भाषा-अधिगम
Practice Guidance
इस सेट को केवल MCQ टेस्ट की तरह हल करने के बजाय उत्तर की व्याख्या को भी पढ़ें। विशेष रूप से कारक-विभक्ति, संधि, समास, प्रत्यय, लकार और उपसर्ग से जुड़े प्रश्नों में नियम को समझकर अभ्यास करना उपयोगी रहेगा।
भाषा-शिक्षण वाले प्रश्नों में Top-down Approach, Inclusive Education, Formative Assessment, Error Analysis, Dyslexia और मातृभाषा के प्रयोग जैसी अवधारणाओं को आपस में अलग-अलग समझें। इससे समान विकल्पों वाले प्रश्नों को हल करने में आसानी होगी।
FAQ
Q1. UPTET Sanskrit Set 4 में कितने प्रश्न हैं?
इस सेट में 30 प्रश्न हैं।
Q2. इस Sanskrit Practice Set में कौन-कौन से व्याकरण विषय हैं?
इसमें कारक, विभक्ति, संधि, समास, लिंग, वचन, संख्या, उपसर्ग, अव्यय, लकार, प्रत्यय और वर्ण-विचार जैसे विषय शामिल हैं।
Q3. क्या Set 4 में Sanskrit Language Teaching के प्रश्न भी हैं?
हाँ। सेट के अंतिम भाग में भाषा-अधिगम, समावेशी शिक्षा, आकलन, त्रुटि-विश्लेषण, डिस्लेक्सिया, सम्प्रेषण और मातृभाषा से संबंधित प्रश्न भी हैं।
Q4. क्या प्रश्नों के साथ उत्तर और Explanation दिए गए हैं?
हाँ। प्रत्येक प्रश्न के साथ सही उत्तर और परीक्षा उपयोगी व्याख्या दी गई है।
Q5. क्या यह सेट UPTET Sanskrit की Practice के लिए उपयोगी है?
हाँ, यह सेट दिए गए व्याकरण एवं भाषा-शिक्षण विषयों की प्रश्न-आधारित पुनरावृत्ति और अभ्यास के लिए तैयार किया गया है।
