UPTET 2026 संस्कृत Question Paper – Set 3

UPTET 2026 Sanskrit Question Paper – Set 3 में संस्कृत विषय से जुड़े 30 अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं। यह सेट केवल संस्कृत व्याकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संस्कृत भाषा-शिक्षण और भाषा-अधिगम से जुड़े प्रश्न भी शामिल हैं।

व्याकरण वाले प्रश्नों में लृट् लकार, विभक्ति-वचन, उपसर्ग, पर्यायवाची, क्रिया-पद, ऊष्म-वर्ण, कारक, लिंग, वचन, समास, वाच्य, क्त प्रत्यय और सन्धि जैसे विषय शामिल हैं।

सेट के अन्य प्रश्नों में आकलन, बहुभाषिकता, बहुसंस्कृतिवाद, शब्दावली-विकास, बाल-साहित्य, Krashen की Monitor Hypothesis, Formative और Summative Assessment, Communicative Approach तथा Direct Method से संबंधित प्रश्न दिए गए हैं।

इस प्रकार यह सेट संस्कृत व्याकरण + भाषा-शिक्षण दोनों हिस्सों का मिश्रित अभ्यास प्रदान करता है।

1. “कृ” धातु का लृट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन रूप कौन-सा है?

(A) करोति
(B) करिष्यति
(C) अकरोत्
(D) कुरु

व्याख्या
सही उत्तर: (B) करिष्यति : व्याख्या : ‘कृ’ धातु का अर्थ करना होता है। इस धातु का लृट् लकार में प्रयोग भविष्यत् काल को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। ‘करिष्यति’ का अर्थ है — वह करेगा।
यह प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है।
– कृ → करना
– लृट् लकार → भविष्यत् काल
– प्रथम पुरुष → वह
– एकवचन → एक व्यक्ति
– कृ + लृट् → करिष्यति
अतः सही रूप करिष्यति है।
अन्य विकल्प क्यों नहीं:
– करोति → लट् लकार, वर्तमानकाल
– अकरोत् → लङ् लकार, भूतकाल
– कुरु → लोट् लकार, आज्ञा/अनुरोध

2. ‘राजमार्गः’ शब्द का पञ्चमी विभक्ति, एकवचन रूप क्या होगा?

(A) राजमार्गम्
(B) राजमार्गे
(C) राजमार्गात्
(D) राजमार्गेण

व्याख्या
सही उत्तर: (C) राजमार्गात्

व्याख्या :
‘राजमार्ग’ एक अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्द है। जब किसी शब्द में ‘से’ या अलग होने का भाव प्रकट होता है, तब सामान्यतः पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

‘राजमार्ग’ का पञ्चमी एकवचन रूप राजमार्गात् होगा।

उदाहरण — राजमार्गात् ग्रामः दूरः अस्ति।
अर्थ — राजमार्ग से गाँव दूर है।

अन्य विकल्प क्यों नहीं:
राजमार्गम् → द्वितीया एकवचन
राजमार्गे → सप्तमी एकवचन
राजमार्गेण → तृतीया एकवचन

Exam Fact: ‘से/से अलग होने’ के अर्थ में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

3. “प्रगच्छति” में उपसर्ग कौन-सा है?

(A) प्र
(B) ति
(C) च्छ
(D) गम्

व्याख्या
सही उत्तर: (A) प्र

व्याख्या :
‘प्रगच्छति’ शब्द में ‘प्र’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो धातु के पहले लगकर उसके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन उत्पन्न करते हैं।

यहाँ मूल धातु गम् है, जिसका अर्थ है — जाना।

प्र + गम् → प्रगच्छति

अन्य विकल्प क्यों नहीं:
ति → क्रिया-रूप का एक भाग है, उपसर्ग नहीं।
च्छ → धातु का स्वतंत्र उपसर्ग नहीं है।
गम् → मूल धातु है।

Exam Fact: उपसर्ग धातु के पहले लगाया जाता है। जैसे — प्र + गम्, उप + विश्, अव + लोक्।

4. ‘गायकः’ शब्द का प्रथमा विभक्ति, एकवचन रूप चुनिए।

(A) गायकाय
(B) गायकः
(C) गायकेण
(D) गायकम्

व्याख्या
सही उत्तर: (B) गायकः

व्याख्या :
‘गायक’ एक अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्द है। जब किसी व्यक्ति या वस्तु को वाक्य में कर्ता के रूप में बताया जाता है, तब प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है।

‘गायक’ का प्रथमा एकवचन रूप गायकः है।

उदाहरण — गायकः गीतं गायति।
अर्थ — गायक गीत गाता है।

अन्य विकल्प:
गायकाय → चतुर्थी
गायकेण → तृतीया
गायकम् → द्वितीया

5. ‘नगरम्’ शब्द का पर्यायवाची शब्द कौन-सा है?

(A) पुरम्
(B) उद्यानम्
(C) पुस्तकम्
(D) नीडम्

व्याख्या
सही उत्तर: (A) पुरम्

व्याख्या :
‘नगरम्’ का अर्थ शहर या नगर होता है। संस्कृत में इसके लिए पुरम् शब्द का भी प्रयोग किया जाता है।

अतः — नगरम् = पुरम्

अन्य विकल्प क्यों नहीं:
उद्यानम् → बगीचा
पुस्तकम् → किताब
नीडम् → घोंसला

इसलिए पुरम् सही पर्यायवाची है।

सही उत्तर: (A) पुरम्

व्याख्या: नगरम् का पर्यायवाची पुरम् है। दोनों का अर्थ शहर/नगर होता है।

6. ‘दुग्धं पिबन्ति’ वाक्य में क्रिया-पद कौन-सा है?

(A) दुग्धम्
(B) पिबति
(C) पिबामः
(D) पिबन्ति

व्याख्या
सही उत्तर: (D) पिबन्ति

व्याख्या :
वाक्य में जिस शब्द से कार्य के होने का बोध होता है, उसे क्रिया-पद कहते हैं।

वाक्य है — दुग्धं पिबन्ति।
यहाँ ‘दुग्धम्’ का अर्थ दूध है, जबकि पिबन्ति का अर्थ ‘पीते हैं’ है। इसलिए कार्य का बोध कराने वाला शब्द पिबन्ति है।

पिबन्ति = पीते हैं।

यह ‘पा’ धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन रूप है।

7. निम्नलिखित में से ऊष्म-वर्ण कौन-सा है?

(A) ब
(B) ल
(C) ष
(D) न

व्याख्या
सही उत्तर: (C) ष

व्याख्या :
संस्कृत वर्णमाला में श्, ष्, स् और ह् को ऊष्म वर्ण कहा जाता है। इन वर्णों के उच्चारण में वायु के घर्षण की विशेष भूमिका होती है।

दिए गए विकल्पों में:
ब → स्पर्श वर्ण
ल → अन्तःस्थ वर्ण
ष → ऊष्म वर्ण
न → स्पर्श वर्ण

अतः ष सही उत्तर है।

8. ‘शिक्षिका छात्राभ्यः निर्देशं यच्छति’ वाक्य में ‘छात्राभ्यः’ किस कारक का उदाहरण है?

(A) करणम्
(B) कर्म
(C) कर्तृ
(D) सम्प्रदानम्

व्याख्या
सही उत्तर: (D) सम्प्रदानम्

व्याख्या :
वाक्य है — शिक्षिका छात्राभ्यः निर्देशं यच्छति।

इसका अर्थ है — शिक्षिका छात्रों को निर्देश देती है।

जिस व्यक्ति को कोई वस्तु दी जाती है अथवा जिसके लिए कोई कार्य किया जाता है, वहाँ सामान्यतः सम्प्रदान कारक होता है।

यहाँ छात्राभ्यः = छात्रों को है। इसलिए यह सम्प्रदान कारक है। ‘छात्राभ्यः’ चतुर्थी विभक्ति, बहुवचन का रूप है।

अन्य विकल्प क्यों नहीं:
करण → साधन/माध्यम
कर्म → जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़े
कर्तृ → कार्य करने वाला

9. ‘युष्मद्’ शब्द का चतुर्थी एकवचन वैकल्पिक रूप कौन-सा है?

(A) तुभ्यम् / ते
(B) त्वया / त्वाम्
(C) मह्यम् / मे
(D) युवाम् / युवयोः

व्याख्या
सही उत्तर: (A) तुभ्यम् / ते

व्याख्या :
‘युष्मद्’ सर्वनाम का अर्थ तुम होता है। इसका चतुर्थी एकवचन रूप तुभ्यम् होता है। इसके साथ इसका संक्षिप्त/वैकल्पिक रूप ते भी प्रयुक्त होता है।

अतः — युष्मद् → तुभ्यम् / ते

उदाहरण — तुभ्यं पुस्तकं ददामि।
अर्थ — मैं तुम्हें पुस्तक देता हूँ।

Exam Fact: युष्मद् सर्वनाम के महत्वपूर्ण रूपों में त्वम्, त्वाम्, तुभ्यम्, त्वया, त्वयि आदि आते हैं।

10. ‘फलकम्’ शब्द का लिंग क्या है?

(A) पुल्लिङ्गम्
(B) स्त्रीलिङ्गम्
(C) नपुंसकलिङ्गम्
(D) प्रथमा

व्याख्या
सही उत्तर: (C) नपुंसकलिङ्गम्

व्याख्या :
‘फलकम्’ शब्द का लिंग नपुंसकलिङ्ग है। यह अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द के रूप में प्रयुक्त होता है।

नपुंसकलिङ्ग के अकारान्त शब्दों में प्रथमा और द्वितीया एकवचन का रूप सामान्यतः -म् पर समाप्त होता है।

उदाहरण — फलम्, वनम्, पुस्तकम्, फलकम्।

इसलिए फलकम् = नपुंसकलिङ्गम्।

11. ‘अहम्’ शब्द का बहुवचन प्रथमा रूप कौन-सा है?

(A) वयम्
(B) यूयम्
(C) एते
(D) ते

व्याख्या
सही उत्तर: (A) वयम्

व्याख्या :
‘अहम्’ का अर्थ मैं होता है। जब यही सर्वनाम बहुवचन में बदलता है, अर्थात् ‘हम’ के अर्थ में आता है, तो इसका रूप वयम् होता है।

अतः — अहम् → वयम्

उदाहरण —
अहं विद्यालयं गच्छामि। → मैं विद्यालय जाता हूँ।
वयं विद्यालयं गच्छामः। → हम विद्यालय जाते हैं।

यहाँ वयम् प्रथमा विभक्ति, बहुवचन का रूप है।

12. ‘प्रलिखति’ शब्द में कौन-सा उपसर्ग प्रयुक्त है?

(A) प्र
(B) सम्
(C) आ
(D) नि

व्याख्या
सही उत्तर: (A) प्र

व्याख्या :
‘प्रलिखति’ शब्द में प्र उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है। इसकी मूल धातु लिख् है।

प्र + लिख् → प्रलिखति

‘प्र’ धातु के पहले लगकर क्रिया के अर्थ में विशेषता उत्पन्न करता है। इसलिए दिए गए विकल्पों में प्र उपसर्ग है।

Exam Fact: उपसर्ग की पहचान के लिए देखें कि कौन-सा शब्दांश धातु के पहले जुड़ा है।

13. ‘वनम्’ शब्द का पञ्चमी विभक्ति, एकवचन रूप क्या होगा?

(A) वनात्
(B) वनम्
(C) वनानि
(D) वने

व्याख्या
सही उत्तर: (A) वनात्

व्याख्या :
‘वनम्’ एक अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द है। जब ‘से’ या अलग होने का अर्थ व्यक्त करना हो, तब पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

‘वनम्’ का पञ्चमी एकवचन रूप वनात् है।

उदाहरण — बालकः वनात् आगच्छति।
अर्थ — बालक वन से आता है।

अन्य विकल्प:
वनम् → प्रथमा/द्वितीया एकवचन
वनानि → प्रथमा/द्वितीया बहुवचन
वने → सप्तमी एकवचन

14. “कृषकः अन्नम् खादति।” वाक्य में “अन्नम्” किस कारक का उदाहरण है?

(A) कर्मकारकम्
(B) सम्प्रदानकारकम्
(C) कर्तृकारकम्
(D) करणकारकम्

व्याख्या
सही उत्तर: (A) कर्मकारकम्

व्याख्या :
वाक्य है — कृषकः अन्नम् खादति।

प्रश्न करें — कृषकः क्या खाता है?
उत्तर मिलता है — अन्नम्।

जिस वस्तु पर क्रिया का प्रभाव पड़ता है अथवा जो क्रिया का मुख्य लक्ष्य होती है, उसे कर्म कारक कहते हैं। यहाँ खाने की क्रिया का संबंध अन्नम् से है। इसलिए अन्नम् कर्मकारक है।

Exam Fact: जिस पर क्रिया का फल या प्रभाव पड़ता है, वह सामान्यतः कर्म कारक होता है।

15. ‘देवी’ शब्द का लिंग क्या है?

(A) द्विलिंगम्
(B) पुल्लिङ्गः
(C) स्त्रीलिङ्गम्
(D) नपुंसकलिङ्गम्

व्याख्या
सही उत्तर: (C) स्त्रीलिङ्गम्

व्याख्या :
‘देवी’ शब्द स्त्री जाति का बोध कराता है। इसलिए इसका लिंग स्त्रीलिङ्ग है।

‘देव’ का स्त्रीलिङ्ग रूप देवी होता है।

उदाहरण — देवी मन्दिरं गच्छति।

Exam Fact: देव → देवी, बालक → बालिका, नर → नारी।

16. ‘सैनिकः’ शब्द का बहुवचन रूप कौन-सा है?

(A) सैनिकेन
(B) सैनिकौ
(C) सैनिकाः
(D) सैनिकम्

व्याख्या
सही उत्तर: (C) सैनिकाः

व्याख्या :
‘सैनिक’ एक अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्द है। इसका प्रथमा एकवचन रूप सैनिकः तथा प्रथमा बहुवचन रूप सैनिकाः होता है।

अतः — सैनिकः → सैनिकाः

उदाहरण —
सैनिकः देशं रक्षति।
सैनिकाः देशं रक्षन्ति।

पहले वाक्य में एक सैनिक है, जबकि दूसरे में अनेक सैनिक हैं।

17. निम्नलिखित में से अव्ययीभाव समास का उदाहरण कौन-सा है?

(A) नीलकमलम्
(B) यथाशक्ति
(C) राजपुत्रः
(D) मातापितरौ

व्याख्या
सही उत्तर: (B) यथाशक्ति

व्याख्या :
यथाशक्ति का अर्थ है — शक्ति के अनुसार। इसमें पूर्वपद ‘यथा’ प्रधान होता है और पूरा समस्त पद अव्यय के रूप में प्रयुक्त होता है। इसलिए यथाशक्ति अव्ययीभाव समास का उदाहरण है।

अन्य विकल्प:
नीलकमलम् → कर्मधारय समास
राजपुत्रः → षष्ठी तत्पुरुष
मातापितरौ → द्वन्द्व समास

Exam Fact: जिस समास में पूर्वपद प्रधान हो और पूरा समस्त पद अव्यय की तरह प्रयुक्त हो, वह अव्ययीभाव समास कहलाता है।

18. ‘अध्यापकः कक्षात् आगच्छति’ वाक्य में ‘कक्षात्’ शब्द किस विभक्ति का रूप है?

(A) तृतीया विभक्ति
(B) चतुर्थी विभक्ति
(C) द्वितीया विभक्ति
(D) पञ्चमी विभक्ति

व्याख्या
सही उत्तर: (D) पञ्चमी विभक्ति

व्याख्या :
‘कक्षात्’ का अर्थ है कक्षा से। संस्कृत में जब किसी स्थान या वस्तु से अलग होने, निकलने या ‘से’ का अर्थ होता है, तब पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

वाक्य — अध्यापकः कक्षात् आगच्छति।
अर्थ — अध्यापक कक्षा से आता है।

19. ‘दीर्घः पन्थाः’ का समस्त पद क्या होगा?

(A) दीर्घः पन्थाः
(B) पन्थादीर्घः
(C) दीर्घपन्थानम्
(D) दीर्घपन्थाः

व्याख्या
सही उत्तर: (D) दीर्घपन्थाः

व्याख्या :
‘दीर्घः’ का अर्थ है लम्बा और ‘पन्थाः’ का अर्थ है मार्ग। दोनों पदों को मिलाने पर दीर्घपन्थाः समस्त पद बनता है।

दीर्घः पन्थाः → दीर्घपन्थाः

यहाँ ‘दीर्घ’ शब्द ‘पन्थाः’ की विशेषता बता रहा है। इसलिए यह विशेषण-विशेष्य संबंध वाला समस्त पद है।

20. ‘यन्त्रकाराभ्यां यन्त्रे रच्येते’ वाक्य में कौन-सा वाच्य प्रयुक्त है?

(A) कर्मवाच्यम्
(B) लोट्-वाच्यम्
(C) कर्तृवाच्यम्
(D) भाववाच्यम्

व्याख्या
सही उत्तर: (A) कर्मवाच्यम्

व्याख्या :
वाक्य है — यन्त्रकाराभ्यां यन्त्रे रच्येते।

यहाँ यन्त्रे उस वस्तु को व्यक्त करता है जिसका निर्माण किया जा रहा है। क्रिया रच्येते कर्मवाच्य रूप में है।

‘यन्त्रकाराभ्याम्’ तृतीया विभक्ति में प्रयुक्त होकर कार्य करने वाले का बोध कराता है, जबकि ‘यन्त्रे’ कर्म के रूप में प्रधान है। इसलिए यह कर्मवाच्य है।

21. ‘कृ’ धातु से क्त-प्रत्ययान्त रूप कौन-सा है?

(A) कृतः
(B) करोति
(C) कृत्वा
(D) कर्तुम्

व्याख्या
सही उत्तर: (A) कृतः

व्याख्या :
‘कृ’ धातु का अर्थ करना है। जब इसमें क्त प्रत्यय लगाया जाता है, तो भूतकालिक कृदन्त रूप बनता है।

कृ + क्त → कृत

पुल्लिङ्ग में इसका रूप कृतः होगा।

अन्य विकल्प:
करोति → लट् लकार
कृत्वा → क्त्वा प्रत्ययान्त रूप
कर्तुम् → तुमुन् प्रत्ययान्त रूप

22. “महेशः” का उचित सन्धि-विच्छेद कौन-सा है?

(A) महा + इशः
(B) महा + ईशः
(C) महि + ईशः
(D) महे + शः

व्याख्या
सही उत्तर: (B) महा + ईशः

व्याख्या :
‘महेशः’ शब्द का सही सन्धि-विच्छेद है — महा + ईशः।

महा + ईशः → महेशः

यहाँ आ + ई = ए का परिवर्तन होता है। इसे गुण सन्धि के अंतर्गत समझा जाता है।

अतः सही सन्धि-विच्छेद महा + ईशः है।

23. अधोलिखितेषु किं आकलनविषये सत्यं न अस्ति ?

(1) एतत् छात्रस्य प्रदर्शनस्य (Performance) प्रत्ययमाणं प्रस्तौति।
(2) एतत् छात्रस्य प्रगतेः गतीं आकलयितुं सहायता करोति।
(3) एतत् केवलं अध्यापकेन क्रियते।
(4) अनेन छात्रस्य प्रगतेः सकलतया अवलोकनं क्रियते।

व्याख्या
सही उत्तर: (3) एतत् केवलं अध्यापकेन क्रियते।

व्याख्या :
आकलन केवल अध्यापक द्वारा ही नहीं किया जाता, बल्कि इसमें छात्र, सहपाठी तथा अन्य संबंधित व्यक्ति भी भाग ले सकते हैं। आकलन का उद्देश्य छात्र के प्रदर्शन, प्रगति, सीखने की कठिनाइयों और अधिगम की स्थिति को समझना होता है।

आत्म-आकलन और सहपाठी-आकलन भी आकलन के महत्वपूर्ण रूप हैं। इसलिए यह कहना कि आकलन केवल अध्यापक द्वारा किया जाता है, सही नहीं है।

अन्य विकल्पों पर ध्यान दें:
छात्र के प्रदर्शन को समझना, उसकी प्रगति की गति को देखना तथा उसकी समग्र प्रगति का अवलोकन करना — ये सभी आकलन के महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।

24. कथानां का श्रेणी बहुभाषिकतावर्धनस्य बहुसंस्कृतिवादस्य च संवर्धनाय सर्वाधिक-उपयुक्ता भवति ?

(1) आत्मकथाः
(2) वैज्ञानिककल्पनाः
(3) दीर्घकथाः
(4) लोककथाः

व्याख्या
सही उत्तर: (4) लोककथाः

व्याख्या :
लोककथाएँ विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, समुदायों और संस्कृतियों की परंपराओं को सामने लाती हैं। इनके माध्यम से बच्चे अलग-अलग भाषाओं, लोक-परंपराओं, रीति-रिवाजों, मान्यताओं और सांस्कृतिक विविधताओं से परिचित होते हैं।

इस प्रकार लोककथाएँ बच्चों में बहुभाषिकता और बहुसंस्कृतिवाद की समझ विकसित करने में उपयोगी होती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की लोककथाओं को कक्षा में शामिल करने से बच्चे विभिन्न समुदायों की जीवन-शैली और सांस्कृतिक विशेषताओं को समझ सकते हैं।

25. स्टोनिकरण महोदयेन अन्वीक्षण-परिकल्पना (Monitor Hypothesis) इति विषये अधोलिखितेषु किं सत्यं न अस्ति ?

(1) इयं अधिग्रहण-अधिगम-साहचर्यपरि आधारितं वर्तते।
(2) यत् अधिग्रहीतं तत् अधिगमस्य अन्वीक्षणे सहायकं भवति।
(3) छात्रः अन्वीक्षणं कर्तुं समर्थः भवति यदि तस्य समीपे पर्याप्तसमयः अस्ति, नियमज्ञानं पर्याप्तं च अस्ति।
(4) इयं द्वितीयभाषाधिग्रहणप्रसंगे प्रयुज्यते।

व्याख्या
सही उत्तर: (2) यत् अधिग्रहीतं तत् अधिगमस्य अन्वीक्षणे सहायकं भवति।

व्याख्या :
यह प्रश्न Stephen Krashen की Monitor Hypothesis से संबंधित है। Krashen के अनुसार भाषा-अधिग्रहण (Acquisition) और भाषा-अधिगम (Learning) अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।

Monitor Hypothesis के अनुसार औपचारिक रूप से सीखा गया भाषा-ज्ञान व्यक्ति के भाषा-प्रयोग की निगरानी और सुधार करने में सहायता करता है। अर्थात् सीखे हुए व्याकरणिक नियमों का उपयोग व्यक्ति अपने भाषा-उत्पादन को जाँचने के लिए कर सकता है।

इसलिए प्रश्न में दिए गए कथनों में यह समझना आवश्यक है कि Monitor की भूमिका मुख्यतः Learned System से जुड़ी है।

26. अधोलिखितेषु किं मूलपाठावबोधनाय शब्दावलीविकासाय च सहायकं न भवति ?

(1) वर्णमाला-चार्ट (Alphabet-charts)
(2) विषय-मानचित्रणि
(3) चित्र शब्दकोशः
(4) शब्द-मानचित्रणि (Word-maps)

व्याख्या
सही उत्तर: (1) वर्णमाला-चार्ट (Alphabet-charts)

व्याख्या :
वर्णमाला-चार्ट मुख्यतः अक्षरों की पहचान, क्रम और परिचय में सहायता करता है। लेकिन मूलपाठ के अर्थ को समझने और शब्दावली के व्यवस्थित विकास के लिए यह सीधे तौर पर उतना प्रभावी साधन नहीं है।

इसके विपरीत विषय-मानचित्र, चित्र शब्दकोश और Word-maps विद्यार्थियों को शब्दों के अर्थ, उनके आपसी संबंध और संदर्भ को समझने में अधिक सहायता करते हैं।

इसलिए मूलपाठावबोधन और शब्दावली-विकास के संदर्भ में वर्णमाला-चार्ट सबसे उपयुक्त साधन नहीं है।

27. अधोलिखितेषु किं बालकानां साहित्यस्य एका वाङ्मयीयविशेषता न अस्ति ?

(1) स्पष्टनैतिकमूल्यानि
(2) अक्षराणां दीर्घाकारः परिछिन्नरूपश्च
(3) आकर्षकचित्राणि
(4) पशु/जीवपात्राणि

व्याख्या
सही उत्तर: (2) अक्षराणां दीर्घाकारः परिछिन्नरूपश्च

व्याख्या :
बाल साहित्य बच्चों की आयु, रुचि, कल्पना और समझ को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इसमें सामान्यतः सरल भाषा, स्पष्ट नैतिक मूल्य, आकर्षक चित्र तथा पशु-पक्षियों या जीव-जंतुओं के पात्रों का प्रयोग किया जाता है।

बाल साहित्य का उद्देश्य बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ने, समझने और सीखने के लिए प्रेरित करना होता है। इसलिए अक्षरों का दीर्घाकार या विशेष रूप से सीमित आकार होना बाल साहित्य की कोई अनिवार्य वाङ्मयीय विशेषता नहीं है।

28. अधोलिखितेषु कथनं आकलनस्य द्वे-प्रमुखप्रकारविषये किं सत्यं अस्ति ?

(1) योगात्मकाकलनं (Summative assessment) समग्रशैक्षिककार्ये आकलनस्य प्रत्येकस्वरूपस्य समन्वयः वर्तते।
(2) रचनात्मकाकलनं अधिगमस्य सम्पूर्णावस्थायां निरन्तरं क्रियते।
(3) योगात्मकाकलनं अधिगमावस्थायाः पूर्वं पश्चात् च क्रियते।
(4) रचनात्मकाकलनं अधिगमात् अधिकतरं स्वतन्त्रे केन्द्रितम् अस्ति।

व्याख्या
सही उत्तर: (2) रचनात्मकाकलनं अधिगमस्य सम्पूर्णावस्थायां निरन्तरं क्रियते।

व्याख्या :
रचनात्मक आकलन (Formative Assessment) अधिगम की प्रक्रिया के दौरान निरंतर किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जानना होता है कि छात्र क्या सीख रहा है, कहाँ कठिनाई हो रही है और शिक्षण में किस प्रकार सुधार किया जा सकता है।

इसके विपरीत योगात्मक आकलन (Summative Assessment) सामान्यतः किसी पाठ्यक्रम, इकाई या निर्धारित अवधि के अंत में विद्यार्थी की उपलब्धि का आकलन करता है।

इसलिए रचनात्मक आकलन की प्रमुख विशेषता है कि यह अधिगम के दौरान लगातार किया जाता है और प्राप्त जानकारी के आधार पर शिक्षण-अधिगम में सुधार किया जाता है।

29. अधोलिखितेषु किं सम्प्रेषणात्मक-उपागमस्य (Communicative Approach) एका विशेषता न वर्तते ?

(1) भाषायाः प्रकरणात्मकप्रयोगः
(2) अध्ययनस्य मध्यावस्थायां व्याकरणनियमानां परिशीलनम्
(3) सम्प्रेषणात्मकक्षमतायाः विकासः
(4) कार्यं अधिकतरं स्वल्पे केन्द्रिकरणम्

व्याख्या
सही उत्तर: (2) अध्ययनस्य मध्यावस्थायां व्याकरणनियमानां परिशीलनम्

व्याख्या :
सम्प्रेषणात्मक उपागम (Communicative Approach) का मुख्य उद्देश्य भाषा का वास्तविक जीवन में प्रभावी संप्रेषण के लिए प्रयोग करना है। इसमें भाषा को संदर्भ और अर्थपूर्ण परिस्थितियों में प्रयोग कराया जाता है।

इस उपागम में विद्यार्थियों को केवल व्याकरण के नियम याद कराने के बजाय भाषा का वास्तविक प्रयोग करने के अवसर दिए जाते हैं। बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना जैसे भाषा-कौशलों को अर्थपूर्ण संप्रेषण से जोड़ा जाता है।

इसलिए अध्ययन की मध्यावस्था में केवल व्याकरणिक नियमों के औपचारिक परिशीलन को सम्प्रेषणात्मक उपागम की प्रमुख विशेषता नहीं माना जाता।

30. एका अध्यापिका हिन्दी भाषाविज्ञानं द्वितीय-भाषारूपेण आङ्ग्लभाषां पाठयति। सा स्पष्टनियमं कथं विना, तेषु आङ्ग्लभाषायां लघुवाक्यालापं प्रसज्यन अवतारं ददाति। सा तेषां समक्ष उदाहरणानि उपस्थापयति, येषां प्रयोगे छात्राः स्वयमेव नियमं कुर्वन्ति। शनैः शनैः ते अध्यापिकया सहाय्येन स्वयमेव नियमं रचयन्ति। अध्यापिकया कः आदर्शः-उपागमः प्रयुज्यते ?

(1) श्रवण-भाषिक-विधिः (Audio Lingual)
(2) सम्प्रेषणात्मक-उपागमः
(3) प्रत्यक्ष-विधिः
(4) व्याकरणानुवाद-विधिः (Method)

व्याख्या
सही उत्तर: (3) प्रत्यक्ष-विधिः (Direct Method)

व्याख्या :
प्रत्यक्ष विधि में लक्ष्य भाषा को सीधे लक्ष्य भाषा के माध्यम से सिखाने पर बल दिया जाता है। शिक्षक पहले भाषा के उदाहरण और प्रयोग प्रस्तुत करता है तथा विद्यार्थी उन उदाहरणों को देखकर भाषा के नियमों को स्वयं समझने और निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं।

इसे व्याकरण के आगमनात्मक (Inductive) शिक्षण से भी जोड़ा जाता है। अर्थात् पहले उदाहरण दिए जाते हैं और बाद में विद्यार्थी उन उदाहरणों के आधार पर नियम समझते हैं।

प्रश्न में अध्यापिका स्पष्ट रूप से नियम बताने के बजाय अंग्रेजी के छोटे-छोटे वाक्य और उदाहरण प्रस्तुत करती है तथा विद्यार्थी उन उदाहरणों से स्वयं नियम का निर्माण करते हैं। इसलिए यहाँ प्रत्यक्ष विधि उपयुक्त है।

अन्य विकल्पों से अंतर:
Audio-Lingual Method → अभ्यास, अनुकरण और pattern drills पर अधिक बल।
Communicative Approach → वास्तविक संप्रेषण और communicative competence पर बल।
Grammar-Translation Method → व्याकरण के नियम और अनुवाद पर अधिक बल।

Main Topics Covered

इस UPTET Sanskrit Set 3 में मुख्य रूप से ये विषय शामिल हैं:

संस्कृत व्याकरण एवं भाषा

  • लृट् लकार
  • विभक्ति-वचन
  • उपसर्ग
  • पर्यायवाची शब्द
  • क्रिया-पद
  • ऊष्म-वर्ण
  • कारक
  • लिंग
  • वचन
  • समास
  • अव्ययीभाव समास
  • कर्मवाच्य
  • क्त प्रत्यय
  • सन्धि
  • गुण सन्धि

संस्कृत भाषा-शिक्षण एवं अधिगम

  • आकलन
  • छात्र की प्रगति का आकलन
  • बहुभाषिकता
  • बहुसंस्कृतिवाद
  • लोककथाएँ
  • Krashen की Monitor Hypothesis
  • भाषा-अधिग्रहण एवं अधिगम
  • शब्दावली-विकास
  • मूलपाठ अवबोधन
  • बाल-साहित्य
  • Formative Assessment
  • Summative Assessment
  • Communicative Approach
  • Direct Method
  • आगमनात्मक रूप से नियम सीखना

Practice Guidance

इस सेट को हल करते समय इसे दो हिस्सों में अभ्यास करना उपयोगी रहेगा।

पहले संस्कृत व्याकरण वाले प्रश्नों को हल करें और लकार, विभक्ति, उपसर्ग, कारक, समास, वाच्य तथा सन्धि के नियमों को पहचानने का प्रयास करें।

इसके बाद भाषा-शिक्षण और आकलन से जुड़े प्रश्नों को हल करें। इन प्रश्नों में केवल शब्द का अर्थ याद रखने के बजाय यह समझना महत्वपूर्ण है कि संबंधित शिक्षण-विधि या आकलन का उद्देश्य क्या है।

विशेष रूप से Formative–Summative Assessment, Communicative Approach, Direct Method और Monitor Hypothesis जैसे concepts को आपस में अलग-अलग समझकर अभ्यास करें।

अंत में सभी 30 प्रश्नों के उत्तर मिलाएँ और जिन प्रश्नों में गलती हुई है, उनकी व्याख्या दोबारा पढ़ें।


FAQ

Q1. UPTET 2026 Sanskrit Set 3 में कितने प्रश्न हैं?

इस सेट में कुल 30 प्रश्न हैं।

Q2. क्या Set 3 में केवल संस्कृत व्याकरण के प्रश्न हैं?

नहीं। इसमें संस्कृत व्याकरण के साथ भाषा-शिक्षण, भाषा-अधिगम और आकलन से संबंधित प्रश्न भी शामिल हैं।

Q3. Set 3 में संस्कृत व्याकरण के कौन-कौन से विषय हैं?

इसमें लकार, विभक्ति-वचन, उपसर्ग, कारक, समास, वाच्य, प्रत्यय, सन्धि, लिंग, वचन, पर्यायवाची और ऊष्म-वर्ण आदि से प्रश्न हैं।

Q4. क्या इसमें संस्कृत शिक्षण से संबंधित प्रश्न भी हैं?

हाँ। इसमें बहुभाषिकता, बहुसंस्कृतिवाद, बाल-साहित्य, शब्दावली-विकास, आकलन और भाषा-शिक्षण विधियों से प्रश्न शामिल हैं।

Q5. Set 3 में कौन-कौन सी भाषा-शिक्षण विधियाँ पूछी गई हैं?

इस सेट में Communicative Approach और Direct Method से संबंधित प्रश्न हैं।

Q6. क्या आकलन से संबंधित प्रश्न भी हैं?

हाँ। इसमें Formative Assessment और Summative Assessment तथा आकलन की भूमिका से संबंधित प्रश्न हैं।