UPTET 2026 Sanskrit Question Paper – Set 2 संस्कृत विषय की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए 30 प्रश्नों का अभ्यास सेट है। इसमें संस्कृत व्याकरण, शब्दज्ञान, अलंकार और गद्यांश से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न शामिल किए गए हैं।
इस सेट में लट् लकार, सवर्णदीर्घ सन्धि, विसर्ग-सन्धि, समास, ल्यप् एवं क्त प्रत्यय, अव्यय, उपसर्ग, कारक, वाच्य, अलंकार, लिंग-वचन, विभक्ति-वचन, शब्दरूप, पर्यायवाची और विलोम शब्द से संबंधित प्रश्न दिए गए हैं।
सेट के अंतिम तीन प्रश्न संगणक के उपयोग और शिक्षा क्षेत्र से संबंधित संस्कृत गद्यांश पर आधारित हैं। इससे अभ्यर्थी संस्कृत में गद्यांश पढ़कर तथ्य आधारित प्रश्नों को हल करने का भी अभ्यास कर सकते हैं।
1. ‘करोति’ रूप किस लकार से सम्बद्ध है?
(A) लृट्
(B) लङ्
(C) लट्
(D) लोट्
व्याख्या
अन्य विकल्पों को समझें:
– लृट् लकार — भविष्यत्काल के लिए, जैसे करिष्यति।
– लङ् लकार — भूतकाल के लिए, जैसे अकरोत्।
– लट् लकार — वर्तमानकाल के लिए, जैसे करोति।
– लोट् लकार — आज्ञा, प्रार्थना, उपदेश आदि के लिए, जैसे करोतु।
अतः ‘करोति’ का सही लकार लट् है।
2. ‘चलति चञ्चलचकोरः’ वाक्य में कौन-सा अलंकार है?
(A) अनुप्रासः
(B) यमकम्
(C) रूपकम्
(D) उपमा
व्याख्या
‘चलति चञ्चलचकोरः’ में ‘च’ वर्ण की बार-बार पुनरावृत्ति हुई है। किसी काव्य-पंक्ति में एक ही वर्ण या वर्ण-समूह की पुनरावृत्ति के कारण जब भाषिक सौंदर्य उत्पन्न होता है, तब अनुप्रास अलंकार माना जाता है।
यहाँ ‘चलति’, ‘चञ्चल’ और ‘चकोरः’ में ‘च’ वर्ण की पुनरावृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है।
अन्य विकल्प:
यमक — एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो और प्रत्येक स्थान पर उसका अर्थ अलग हो।
रूपक — उपमेय में उपमान का सीधा आरोप किया जाता है।
उपमा — उपमेय और उपमान की तुलना की जाती है।
अतः यहाँ वर्ण की पुनरावृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।
3. ‘सभा + आगमनम्’ में सवर्णदीर्घ-सन्धि के अनुसार कौन-सा रूप उचित है?
(A) सभाआगमनम्
(B) सभागमनः
(C) सभोऽगमनम्
(D) सभागमनम्
व्याख्या
यहाँ ‘सभा + आगमनम्’ में सवर्णदीर्घ सन्धि का प्रयोग होता है।
सवर्णदीर्घ सन्धि में जब समान जाति के दो स्वर पास-पास आते हैं, तो उनके स्थान पर दीर्घ स्वर हो जाता है। यहाँ ‘सभा’ के अंत में ‘आ’ तथा ‘आगमनम्’ के आरम्भ में भी ‘आ’ है।
आ + आ = आ
अतः:
सभा + आगमनम् → सभागमनम्
याद रखने योग्य नियम:
अ + अ = आ
आ + आ = आ
इ + इ = ई
उ + उ = ऊ
इसलिए सही रूप सभागमनम् है।
4. ‘मृदु वचनम्’ के लिए कौन-सा समस्त पद उचित है?
(A) मृदुवचनम्
(B) वचनमृदु
(C) मृदुवचने
(D) मृदुना वचनम्
व्याख्या
‘मृदु वचनम्’ में ‘मृदु’ वचन की विशेषता बता रहा है। ‘मृदु’ का अर्थ है — कोमल, मधुर या सौम्य और ‘वचनम्’ का अर्थ है — बात या कथन।
दोनों पदों को मिलाने पर मृदुवचनम् समस्त पद बनता है। इसका अर्थ है — कोमल या मधुर वचन।
‘मृदु’ विशेषण है और ‘वचनम्’ विशेष्य है। इसलिए दोनों का उचित समासिक रूप मृदुवचनम् है।
अतः सही उत्तर (A) है।
5. ‘अव + लोक्’ धातु में ‘ल्यप्’ प्रत्यय लगने पर कौन-सा रूप उचित है?
(A) अवलोकितम्
(B) अवलोक्य
(C) अवलोकितुम्
(D) अवलोकते
व्याख्या
‘अव + लोक्’ में ल्यप् प्रत्यय लगाने पर ‘अवलोक्य’ रूप बनता है।
ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग सामान्यतः उपसर्गयुक्त धातु से बने पूर्वकालिक क्रियार्थक रूप में किया जाता है। इसका अर्थ होता है — कोई कार्य करके उसके बाद दूसरी क्रिया करना।
अव + लोक् + ल्यप् → अवलोक्य
‘अवलोक्य’ का अर्थ है — देखकर, निरीक्षण करके या ध्यानपूर्वक देखकर।
अन्य रूपों में:
अवलोकितम् — क्त प्रत्यय से बना रूप।
अवलोकितुम् — तुमुन् प्रत्यय का रूप।
अवलोकते — तिङन्त क्रियारूप।
अतः ल्यप् प्रत्यय से सही रूप अवलोक्य है।
6. ‘दधि’ शब्द का लिंग क्या है?
(A) पुल्लिङ्गम्
(B) नपुंसकलिङ्गम्
(C) स्त्रीलिङ्गम्
(D) अव्ययम्
व्याख्या
‘दधि’ संस्कृत का नपुंसकलिङ्ग शब्द है। इसका अर्थ है — दही।
‘दधि’ इकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द है। इसके रूप वचन और विभक्ति के अनुसार बदलते हैं।
एकवचन — दधि
द्विवचन — दधिनी
बहुवचन — दधीनि
ध्यान रखें कि ‘अव्ययम्’ कोई लिंग नहीं है। अव्यय शब्दों में सामान्यतः लिंग, वचन और विभक्ति के कारण रूप-परिवर्तन नहीं होता।
अतः ‘दधि’ नपुंसकलिङ्ग शब्द है।
7. ‘पुत्रेण जलं पीयते’ वाक्य में कौन-सा वाच्य प्रयुक्त है?
(A) लोट्-वाच्यम्
(B) कर्तृवाच्यम्
(C) कर्मवाच्यम्
(D) भाववाच्यम्
व्याख्या
‘पुत्रेण जलं पीयते’ में ‘पीयते’ क्रिया ‘पा’ धातु के कर्मवाच्य प्रयोग को व्यक्त करती है।
कर्मवाच्य में कर्म को प्रमुखता दी जाती है। यहाँ ‘जलम्’ कर्म है, जबकि ‘पुत्रेण’ तृतीया विभक्ति में प्रयुक्त होकर कर्ता का बोध कराता है।
अर्थ — पुत्र द्वारा जल पिया जाता है।
वाच्य पहचानने का सरल तरीका:
कर्तृवाच्य — कर्ता प्रधान होता है।
कर्मवाच्य — कर्म प्रधान होता है।
भाववाच्य — क्रिया का भाव प्रधान होता है।
यहाँ ‘जलम्’ कर्म होने के कारण यह कर्मवाच्य है।
8. ‘पूर्वम्’ शब्द का विलोम शब्द चुनिए।
(A) विस्तृतम्
(B) पश्चात्
(C) मध्यम्
(D) सरलम्
व्याख्या
‘पूर्वम्’ का अर्थ है — पहले या पहले का समय। इसका विपरीत अर्थ बताने वाला शब्द ‘पश्चात्’ है, जिसका अर्थ है — बाद में।
पूर्वम् ↔ पश्चात्
अन्य शब्द जैसे ‘विस्तृतम्’, ‘मध्यम्’ और ‘सरलम्’ इसके विलोम नहीं हैं।
अतः सही विलोम शब्द पश्चात् है।
9. ‘द्वे नेत्रे यस्य’ के लिए कौन-सा समस्त पद उचित है?
(A) नेत्रद्वयम्
(B) द्वेनेत्रे
(C) द्विनेत्रम्
(D) द्विनेत्रः
व्याख्या
‘द्वे नेत्रे यस्य’ का अर्थ है — जिसके दो नेत्र हैं।
जब समस्त पद का अर्थ उसके दोनों पदों के सामान्य अर्थ से अलग किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करता है, वहाँ बहुव्रीहि समास माना जाता है।
द्वे नेत्रे यस्य → द्विनेत्रः
यहाँ ‘द्वि’ का अर्थ दो और ‘नेत्र’ का अर्थ आँख है। ‘द्विनेत्रः’ का अर्थ है — जिसके दो नेत्र हैं।
बहुव्रीहि समास की पहचान के लिए ‘जिसका, जिसके, जिसकी’ आदि का भाव ध्यान में रखें।
अतः सही उत्तर द्विनेत्रः है।
10. ‘पत्’ धातु में ‘क्त’ प्रत्यय लगने पर कौन-सा रूप उचित है?
(A) पतितम्
(B) पतितुम्
(C) पतति
(D) पतित्वा
व्याख्या
‘पत्’ धातु में क्त प्रत्यय लगाने पर ‘पतित’ रूप बनता है।
पत् + क्त → पतित
जब यह नपुंसकलिङ्ग एकवचन में प्रयुक्त होता है, तो इसका रूप पतितम् होगा।
‘क्त’ प्रत्यय से सामान्यतः भूतकाल में पूर्ण हुई क्रिया का बोध कराने वाला कृदन्त बनता है।
अन्य विकल्प:
पतितुम् — तुमुन् प्रत्यय का रूप।
पतति — लट् लकार का वर्तमानकालिक रूप।
पतित्वा — क्त्वा प्रत्यय से बना पूर्वकालिक रूप।
अतः सही उत्तर पतितम् है।
11. ‘कन्या सूच्याः साहाय्येन सीवनं करोति’ वाक्य में ‘साहाय्येन’ किस कारक का उदाहरण है?
(A) सम्प्रदानम्
(B) करणम्
(C) कर्तृ
(D) कर्म
व्याख्या
‘साहाय्येन’ का अर्थ है — सहायता के द्वारा।
जिस साधन, माध्यम या उपकरण के द्वारा कोई कार्य किया जाता है, वहाँ करण कारक होता है और सामान्यतः तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
उदाहरण:
लेखन्या लिखति — लेखनी से लिखता है।
हस्तेन करोति — हाथ से करता है।
साहाय्येन करोति — सहायता से करता है।
यहाँ ‘साहाय्येन’ तृतीया विभक्ति में है और साधन का बोध करा रहा है।
अतः ‘साहाय्येन’ करण कारक का उदाहरण है।
12. ‘सरः + तीरम्’ में विसर्ग-सन्धि के अनुसार कौन-सा रूप उचित है?
(A) सरतीरम्
(B) सरोतीरम्
(C) सरस्तीरम्
(D) सरःतीरम्
व्याख्या
‘सरः’ के अंत में विसर्ग ‘ः’ है और उसके बाद ‘त’ वर्ण आता है।
विसर्ग के बाद ‘त’ आदि वर्गीय व्यंजन आने पर विसर्ग का ‘स्’ रूप हो जाता है।
सरः + तीरम् → सरस्तीरम्
इसलिए सही सन्धि-रूप सरस्तीरम् है।
विसर्ग-सन्धि में अगले वर्ण के अनुसार विसर्ग का रूप बदल सकता है। इसलिए सन्धि करते समय विसर्ग के बाद आने वाले वर्ण को ध्यान से देखना चाहिए।
13. ‘शुभ्राणि वस्त्राणि’ पद में विशेषण पद कौन-सा है?
(A) शुभ्राणि
(B) पदे
(C) किम्
(D) वस्त्राणि
व्याख्या
‘शुभ्राणि’ का अर्थ है — सफेद, उज्ज्वल या स्वच्छ। यह ‘वस्त्राणि’ की विशेषता बता रहा है।
जिस शब्द से किसी संज्ञा की विशेषता, गुण, संख्या या अवस्था का बोध हो, वह विशेषण कहलाता है।
यहाँ:
शुभ्राणि — विशेषण
वस्त्राणि — विशेष्य
‘शुभ्राणि’ और ‘वस्त्राणि’ दोनों नपुंसकलिङ्ग बहुवचन में हैं तथा इनमें विशेषण-विशेष्य का संबंध है।
अतः सही उत्तर शुभ्राणि है।
14. ‘शिल्पी मणिभिः हारं करोति’ वाक्य में ‘मणिभिः’ किस कारक का उदाहरण है?
(A) करणम्
(B) कर्तृ
(C) सम्प्रदानम्
(D) कर्म
व्याख्या
‘मणिभिः’ का अर्थ है — मणियों के द्वारा।
जब किसी कार्य को करने के लिए किसी साधन या माध्यम का प्रयोग किया जाता है, तो वहाँ करण कारक होता है। करण कारक में तृतीया विभक्ति आती है।
मणिभिः → मणियों के द्वारा
याद रखने का सरल सूत्र:
जिसके द्वारा कार्य हो → करण कारक → तृतीया विभक्ति
अतः ‘मणिभिः’ करण कारक का उदाहरण है।
15. ‘तत्र गुरुः उपदिशति धर्मम्’ वाक्य में अव्यय पद कौन-सा है?
(A) उपदिशति
(B) धर्मम्
(C) गुरुः
(D) तत्र
व्याख्या
‘तत्र’ एक अव्यय शब्द है। इसका अर्थ है — वहाँ।
अव्यय ऐसे शब्द होते हैं जिनके रूप लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार सामान्यतः परिवर्तित नहीं होते।
उदाहरण:
अत्र — यहाँ
तत्र — वहाँ
कुत्र — कहाँ
अधुना — अब
कदा — कब
इस वाक्य में ‘गुरुः’ संज्ञा है, ‘उपदिशति’ क्रिया है और ‘धर्मम्’ कर्म है। ‘तत्र’ स्थान का बोध कराने वाला अव्यय है।
अतः सही उत्तर तत्र है।
16. ‘अवलोकते’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग कौन-सा है?
(A) नि
(B) प्र
(C) उप
(D) अव
व्याख्या
‘अवलोकते’ शब्द में ‘अव’ उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है।
अव + लोक् → अवलोक…
उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो धातु के पहले जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता या परिवर्तन उत्पन्न करते हैं।
यहाँ:
अव — उपसर्ग
लोक् — धातु
‘अवलोकन’ का अर्थ है — ध्यानपूर्वक देखना या निरीक्षण करना।
‘नि’, ‘प्र’ और ‘उप’ भी संस्कृत के उपसर्ग हैं, लेकिन ‘अवलोकते’ में प्रयुक्त उपसर्ग अव है।
17. ‘मन्दं मन्दं मरुत् वहति’ वाक्य में कौन-सा अलंकार है?
(A) यमकम्
(B) रूपकम्
(C) अनुप्रासः
(D) उपमा
व्याख्या
‘मन्दं मन्दं’ में ‘मन्द’ शब्द की पुनरावृत्ति हुई है।
दिए गए प्रश्न के अनुसार एक ही शब्द की पुनरावृत्ति के कारण यहाँ यमक अलंकार माना गया है। ‘मन्दं’ का प्रयोग दो बार हुआ है और इससे क्रिया की मंदता या धीरे-धीरे होने का भाव अधिक स्पष्ट होता है।
अलंकार पहचानते समय ध्यान रखें:
अनुप्रास — वर्ण की पुनरावृत्ति प्रमुख होती है।
यमक — शब्द की पुनरावृत्ति प्रमुख होती है।
उपमा — तुलना की जाती है।
रूपक — उपमेय पर उपमान का आरोप होता है।
अतः दिए गए प्रश्न के अनुसार सही उत्तर यमकम् है।
18. ‘नूनं कार्यं पूर्णम् अस्ति’ वाक्य में अव्यय पद कौन-सा है?
(A) कार्य
(B) अस्ति
(C) नूनम्
(D) पूर्णम्
व्याख्या
‘नूनम्’ एक अव्यय शब्द है। इसका अर्थ है — निश्चित रूप से, निश्चय ही या अवश्य।
वाक्य में ‘नूनम्’ पूरे कथन में निश्चितता का भाव उत्पन्न करता है।
उदाहरण:
नूनं सः आगमिष्यति — निश्चय ही वह आएगा।
अव्यय होने के कारण ‘नूनम्’ का रूप लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार नहीं बदलता।
अतः सही उत्तर नूनम् है।
19. ‘उपकारः’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग कौन-सा है?
(A) नि
(B) प्र
(C) उप
(D) वि
व्याख्या
‘उपकारः’ शब्द में ‘उप’ उपसर्ग है।
उप + कृ → उपकारः
‘उप’ उपसर्ग धातु के अर्थ में विशेषता उत्पन्न करता है। ‘उपकार’ का अर्थ है — सहायता, भलाई या किसी के हित में किया गया कार्य।
यहाँ ‘उप’ उपसर्ग और ‘कृ’ धातु से ‘उपकार’ शब्द बनता है।
अन्य ‘नि’, ‘प्र’ और ‘वि’ भी संस्कृत के उपसर्ग हैं, लेकिन ‘उपकारः’ में प्रयुक्त उपसर्ग उप है।
20. ‘सूर्यः’ शब्द का पर्यायवाची शब्द चुनिए।
(A) सरिता
(B) पर्वतः
(C) भानुः
(D) जलदः
व्याख्या
‘भानुः’ सूर्य का पर्यायवाची शब्द है।
संस्कृत में सूर्य के अनेक पर्यायवाची शब्द मिलते हैं, जैसे — रविः, आदित्यः, दिनकरः, दिवाकरः, भास्करः, भानुः आदि।
दिए गए अन्य शब्दों के अर्थ:
सरिता — नदी
पर्वतः — पहाड़
जलदः — बादल
इसलिए दिए गए विकल्पों में सूर्य का उचित पर्यायवाची भानुः है।
21. ‘सरोवरम्’ शब्द का सप्तमी एकवचन रूप क्या है?
(A) सरोवरात्
(B) सरोवरे
(C) सरोवरम्
(D) सरोवरेण
व्याख्या
‘सरोवरम्’ अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द है।
अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों में सप्तमी एकवचन में सामान्यतः ‘-े’ रूप आता है।
सरोवरम् → सरोवरे
‘सरोवरे’ का अर्थ है — सरोवर में।
उदाहरण:
गृहे — घर में
वने — वन में
सरोवरे — सरोवर में
अतः सही सप्तमी एकवचन रूप सरोवरे है।
22. ‘रेखा’ शब्द का द्वितीया बहुवचन रूप क्या है?
(A) रेखया
(B) रेखासु
(C) रेखाः
(D) रेखाम्
व्याख्या
‘रेखा’ आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द है। इसकी द्वितीया बहुवचन विभक्ति का रूप ‘रेखाः’ होता है।
इसलिए:
रेखा → रेखाः
उदाहरण:
बालिका → बालिकाः
लता → लताः
रेखा → रेखाः
अन्य रूपों को भी समझें:
रेखया — तृतीया एकवचन
रेखासु — सप्तमी बहुवचन
रेखाम् — द्वितीया एकवचन
अतः सही उत्तर रेखाः है।
23. ‘वदति’ रूप किस लकार से सम्बद्ध है?
(A) लङ्
(B) लट्
(C) लृट्
(D) लोट्
व्याख्या
‘वदति’ शब्द वद् धातु से बना है। इसका अर्थ है — बोलना या कहना।
‘वदति’ लट् लकार, प्रथम पुरुष तथा एकवचन का रूप है। लट् लकार का प्रयोग वर्तमानकाल के लिए किया जाता है।
उदाहरण:
पठति — पढ़ता है।
लिखति — लिखता है।
गच्छति — जाता है।
वदति — बोलता है।
जबकि लङ् भूतकाल, लृट् भविष्यत्काल तथा लोट् आज्ञा या प्रार्थना आदि के लिए प्रयुक्त होता है।
अतः सही उत्तर लट् है।
24. ‘आरम्भः’ शब्द का विलोम शब्द चुनिए।
(A) समाप्तिः
(B) सरलम्
(C) मध्यम्
(D) विस्तृतम्
व्याख्या
‘आरम्भः’ का अर्थ है — शुरुआत या प्रारम्भ। इसका विपरीत अर्थ ‘समाप्तिः’ है, जिसका अर्थ है — अंत या समाप्ति।
आरम्भः ↔ समाप्तिः
‘सरलम्’, ‘मध्यम्’ और ‘विस्तृतम्’ आरम्भः के विलोम शब्द नहीं हैं।
अतः सही विलोम शब्द समाप्तिः है।
25. ‘युष्मासु’ रूप का विभक्ति-वचन परिचय क्या है?
(A) तृतीया बहुवचनम्
(B) सप्तमी बहुवचनम्
(C) चतुर्थी बहुवचनम्
(D) षष्ठी बहुवचनम्
व्याख्या
‘युष्मासु’ ‘युष्मद्’ सर्वनाम का रूप है। ‘युष्मद्’ का अर्थ है — तुम या आप।
‘युष्मासु’ सप्तमी विभक्ति, बहुवचन का रूप है। इसमें ‘में’ या ‘के बीच’ आदि का भाव आ सकता है।
तुलना के लिए:
तृतीया बहुवचन — युष्माभिः
चतुर्थी बहुवचन — युष्मभ्यम्
षष्ठी बहुवचन — युष्माकम्
सप्तमी बहुवचन — युष्मासु
इसलिए ‘युष्मासु’ की सही पहचान सप्तमी बहुवचन है।
26. ‘पक्षी’ शब्द का पर्यायवाची शब्द चुनिए।
(A) पर्णम्
(B) खगः
(C) शिला
(D) अग्निः
व्याख्या
‘खगः’ का अर्थ है — पक्षी। ‘खग’ शब्द का अर्थ आकाश में गमन करने वाला भी समझा जाता है।
पक्षी के अन्य पर्यायवाची शब्द हैं — विहगः, शकुनिः, पतत्री, द्विजः आदि।
दिए गए अन्य शब्दों के अर्थ:
पर्णम् — पत्ता
शिला — पत्थर
अग्निः — आग
इसलिए दिए गए विकल्पों में ‘पक्षी’ का उचित पर्यायवाची खगः है।
27. ‘विद्यार्थिभिः परीक्षायै सज्जीभूयते’ वाक्य में कौन-सा वाच्य प्रयुक्त है?
(A) लोट्-वाच्यम्
(B) कर्तृवाच्यम्
(C) कर्मवाच्यम्
(D) भाववाच्यम्
व्याख्या
‘विद्यार्थिभिः परीक्षायै सज्जीभूयते’ में ‘विद्यार्थिभिः’ तृतीया विभक्ति में है और क्रिया ‘सज्जीभूयते’ भावप्रधान रूप में प्रयुक्त हुई है।
भाववाच्य में किसी निश्चित कर्म को प्रधानता नहीं दी जाती, बल्कि क्रिया के भाव को प्रधानता दी जाती है।
वाच्य की तुलना:
कर्तृवाच्य — कर्ता प्रधान।
कर्मवाच्य — कर्म प्रधान।
भाववाच्य — क्रिया का भाव प्रधान।
यहाँ कोई स्पष्ट कर्म नहीं है और ‘विद्यार्थिभिः’ तृतीया में है, इसलिए यह भाववाच्य का उदाहरण है।
[प्र. सं. 28 से 30 गद्यांश प्रश्न]
गद्यांश
सङ्गणकस्य उपयोगः अद्य शिक्षाक्षेत्रे बहुधा दृश्यते। छात्राः तस्य साहाय्येन लेखनं, पठनं, चित्रनिर्माणं च कुर्वन्ति। परन्तु सङ्गणकस्य अतिप्रयोगः नेत्रयोः क्लान्तिं जनयितुं शक्नोति। अतः छात्रैः नियतसमयेन तस्य उपयोगः करणीयः।
28. छात्राः सङ्गणकस्य साहाय्येन किं कुर्वन्ति?
(A) गणनां कुर्वन्ति
(B) पाठान् अधीयन्ते
(C) सञ्चारं कुर्वन्ति
(D) लेखनं पठनं चित्रनिर्माणं च
व्याख्या
गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि छात्र कम्प्यूटर की सहायता से लेखन, पठन और चित्रनिर्माण करते हैं।
गद्यांश की पंक्ति है — “छात्राः तस्य साहाय्येन लेखनं, पठनं, चित्रनिर्माणं च कुर्वन्ति।”
यहाँ:
लेखनम् — लिखने का कार्य
पठनम् — पढ़ने का कार्य
चित्रनिर्माणम् — चित्र बनाने का कार्य
अन्य विकल्पों में गणना और संचार आदि का उल्लेख गद्यांश में नहीं किया गया है।
अतः सही उत्तर लेखनं पठनं चित्रनिर्माणं च है।
29. सङ्गणकस्य अतिप्रयोगः कयोः क्लान्तिं जनयितुं शक्नोति?
(A) कर्णयोः
(B) हस्तयोः
(C) नेत्रयोः
(D) पादयोः
व्याख्या
गद्यांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कम्प्यूटर के अत्यधिक प्रयोग से नेत्रयोः क्लान्तिम् उत्पन्न हो सकती है।
‘नेत्रयोः’ द्विवचन का रूप है और इसका अर्थ है — दोनों आँखों का/दोनों आँखों में, संदर्भ के अनुसार।
‘क्लान्तिं जनयितुं’ का अर्थ है — थकान उत्पन्न करना। इसलिए कम्प्यूटर के अत्यधिक प्रयोग से आँखों में थकान हो सकती है।
अन्य विकल्प — कर्णयोः, हस्तयोः और पादयोः — गद्यांश में नहीं दिए गए हैं।
अतः सही उत्तर नेत्रयोः है।
30. सङ्गणकस्य उपयोगः कुत्र दृश्यते?
(A) कार्यालयेषु
(B) गृहेषु
(C) चिकित्सालयेषु
(D) शिक्षाक्षेत्रे
व्याख्या
गद्यांश की पहली पंक्ति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कम्प्यूटर का उपयोग आज ‘शिक्षाक्षेत्रे’ बहुत अधिक दिखाई देता है।
‘शिक्षाक्षेत्रे’ का अर्थ है — शिक्षा के क्षेत्र में। पूरे गद्यांश में छात्रों द्वारा कम्प्यूटर के प्रयोग, लेखन, पठन तथा चित्रनिर्माण की चर्चा की गई है।
अन्य विकल्प — कार्यालय, घर और चिकित्सालय — इस गद्यांश में कम्प्यूटर के उपयोग के संदर्भ के रूप में नहीं दिए गए हैं।
अतः सही उत्तर शिक्षाक्षेत्रे है।
Main Topics Covered
इस UPTET Sanskrit Set 2 में मुख्य रूप से निम्न विषय शामिल हैं:
- लट् लकार
- सवर्णदीर्घ सन्धि
- विसर्ग-सन्धि
- समास
- बहुव्रीहि समास
- ल्यप् प्रत्यय
- क्त प्रत्यय
- अव्यय
- विशेषण एवं विशेष्य
- उपसर्ग
- कारक — करण
- वाच्य — कर्मवाच्य एवं भाववाच्य
- अलंकार — अनुप्रास एवं यमक
- लिंग
- वचन
- विभक्ति-वचन परिचय
- सप्तमी एकवचन
- शब्दरूप
- पर्यायवाची शब्द
- विलोम शब्द
- गद्यांश आधारित प्रश्न
Practice Guidance
इस सेट को पहले बिना उत्तर देखे हल करें। विशेष रूप से लकार, सन्धि, समास, प्रत्यय, कारक और वाच्य वाले प्रश्नों में केवल विकल्प पहचानने के बजाय संबंधित व्याकरणिक नियम को समझकर उत्तर देने का प्रयास करें।
अलंकार के प्रश्नों में शब्द या वर्ण की पुनरावृत्ति तथा उसके प्रयोग पर ध्यान दें। शब्दरूप और विभक्ति-वचन वाले प्रश्नों में संबंधित शब्द का रूप पहचानने का अभ्यास करें।
अंत में गद्यांश को ध्यान से पढ़कर प्रश्न हल करें और उसके बाद उत्तर एवं व्याख्या से अपनी गलतियों की जाँच करें।
FAQ
Q1. UPTET 2026 Sanskrit Set 2 में कितने प्रश्न हैं?
इस सेट में कुल 30 प्रश्न हैं।
Q2. इस संस्कृत सेट में किन व्याकरणिक विषयों से प्रश्न हैं?
इसमें लकार, सन्धि, समास, प्रत्यय, कारक, वाच्य, उपसर्ग, अव्यय, लिंग-वचन और विभक्ति-वचन से प्रश्न शामिल हैं।
Q3. Set 2 में कौन-कौन से अलंकार पूछे गए हैं?
इस सेट में अनुप्रास और यमक अलंकार से संबंधित प्रश्न हैं।
Q4. क्या इस सेट में शब्दज्ञान से संबंधित प्रश्न भी हैं?
हाँ। इसमें पर्यायवाची और विलोम शब्द से संबंधित प्रश्न दिए गए हैं।
Q5. क्या Set 2 में गद्यांश आधारित प्रश्न हैं?
हाँ। प्रश्न 28 से 30 एक संस्कृत गद्यांश पर आधारित हैं। गद्यांश में संगणक के उपयोग और शिक्षा क्षेत्र का विषय है।
