UPTET 2026 Sanskrit Question Paper – Set 1 संस्कृत विषय की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए 30 प्रश्नों का अभ्यास सेट है। इसमें संस्कृत व्याकरण और भाषा से जुड़े अलग-अलग प्रकार के प्रश्न शामिल किए गए हैं।
इस सेट में क्त एवं ल्यप् प्रत्यय, विसर्ग-सन्धि, व्यञ्जन-सन्धि, समास, लकार, अव्यय, विशेषण, वचन, वाच्य, अलङ्कार, शब्दरूप, पर्यायवाची, विलोम, उपसर्ग और कारक जैसे विषयों पर प्रश्न दिए गए हैं।
इसके साथ अंतिम तीन प्रश्न एक संस्कृत गद्यांश पर आधारित हैं, जिसमें पठन, ज्ञानवृद्धि और विचारविस्तार से संबंधित प्रश्न पूछे गए हैं।
यह सेट अभ्यर्थियों को संस्कृत के व्याकरणिक नियमों के साथ-साथ गद्यांश आधारित प्रश्नों का अभ्यास करने में भी मदद करेगा।
1. ‘भू’ धातु में ‘क्त’ प्रत्यय लगने पर कौन-सा रूप उचित है?
(A) भूतम्
(B) भवितुम्
(C) भवति
(D) भूत्वा
व्याख्या
अर्थात्—
भू + क्त = भूत
इसलिए दिए गए विकल्पों में ‘भूतम्’ सही उत्तर है।
अन्य विकल्पों को भी समझें :
(A) भूतम् — ‘भू’ + ‘क्त’ से बना है, इसलिए सही है।
(B) भवितुम् — यह ‘तुमुन्’ प्रत्यय से बना रूप है और इसका अर्थ होता है होने के लिए।
(C) भवति — यह ‘भू’ धातु का लट्-लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन रूप है, जिसका अर्थ है होता है।
(D) भूत्वा — यह ‘भू’ धातु में क्त्वा/ल्यबन्त प्रयोग से बना है, जिसका अर्थ है होकर।
2. ‘यशः + गानम्’ में विसर्ग-सन्धि के अनुसार कौन-सा रूप उचित है?
(A) यशोगानः
(B) यशःगानम्
(C) यशोगानम्
(D) यशगानम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘यशः’ शब्द के अंत में विसर्ग (ः) है। इसके बाद ‘गानम्’ शब्द आता है। दोनों शब्दों के मिलने पर विसर्ग में परिवर्तन होकर ‘यशोगानम्’ रूप बनता है।
यशः + गानम् = यशोगानम्
इसमें विसर्ग के कारण परिवर्तन हुआ है, इसलिए इसे विसर्ग-सन्धि कहते हैं।
3. ‘सहसा मेघः गर्जति गगने।’ वाक्य में अव्यय पद कौन-सा है?
(A) मेघः
(B) गगने
(C) गर्जति
(D) सहसा
व्याख्या
व्याख्या : ‘सहसा’ का अर्थ अचानक या एकाएक होता है। यह एक अव्यय शब्द है, क्योंकि इसके रूप में लिंग, वचन या विभक्ति के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता।
सहसा = अचानक
‘मेघः’ संज्ञा है, ‘गर्जति’ क्रिया है तथा ‘गगने’ संज्ञा का विभक्ति-रूप है। इसलिए इनमें से अव्यय केवल ‘सहसा’ है।
4. ‘लघु कार्यम्’ के लिए कौन-सा समस्त पद उचित है?
(A) कार्यलघु
(B) लघुकार्यः
(C) लघुकार्यं
(D) लघुना कार्यम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘लघु’ का अर्थ छोटा और ‘कार्यम्’ का अर्थ कार्य होता है। जब ‘लघु’ और ‘कार्यम्’ को मिलाकर एक समस्त पद बनाया जाता है, तो ‘लघुकार्यम्’ रूप प्राप्त होता है।
लघु + कार्यम् = लघुकार्यम्
इसमें ‘लघु’ शब्द ‘कार्यम्’ की विशेषता बता रहा है। इसका अर्थ है छोटा कार्य। इसलिए सही समस्त पद ‘लघुकार्यं’ है।
5. ‘गुणेन सम्पन्नः’ के लिए कौन-सा समस्त पद उचित है?
(A) सम्पन्नगुणः
(B) गुणसम्पन्नः
(C) गुणेन सम्पन्नम्
(D) गुणसम्पन्नम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘गुणेन सम्पन्नः’ का अर्थ है गुण से सम्पन्न। यहाँ ‘गुणेन’ और ‘सम्पन्नः’ को मिलाकर एक समस्त पद बनाया जाता है।
गुणेन सम्पन्नः = गुणसम्पन्नः
इसका विग्रह ‘गुणैः सम्पन्नः’ अथवा ‘गुणेन सम्पन्नः’ के अर्थ में किया जाता है। इसलिए इसका सही समस्त पद ‘गुणसम्पन्नः’ है।
6. ‘करिष्यति’ रूप किस लकार से सम्बद्ध है?
(A) लृट्
(B) लट्
(C) लोट्
(D) लङ्
व्याख्या
व्याख्या : ‘करिष्यति’ शब्द ‘कृ’ धातु से बना है। इसका अर्थ है ‘वह करेगा’। यहाँ कार्य भविष्य में होने वाला है।
कृ + लृट् = करिष्यति
भविष्य में होने वाले कार्य को व्यक्त करने के लिए लृट्-लकार का प्रयोग किया जाता है। इसलिए ‘करिष्यति’ लृट्-लकार का रूप है।
7. ‘उपरि’ शब्द का विलोम शब्द चुनिए।
(A) सरलम्
(B) विस्तृतम्
(C) अधः
(D) मध्यम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘उपरि’ का अर्थ ऊपर होता है। इसका विपरीत अर्थ बताने वाला शब्द ‘अधः’ है, जिसका अर्थ नीचे होता है।
उपरि ↔ अधः
इसलिए ‘उपरि’ का विलोम शब्द ‘अधः’ होगा।
8. ‘तत् + क्षणम्’ में व्यञ्जन-सन्धि के अनुसार कौन-सा रूप उचित है?
(A) तत्क्षणम्
(B) तत्क्षणः
(C) तक्षणम्
(D) तक्षणम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘तत्’ के अंत में त् वर्ण है और ‘क्षणम्’ के आरम्भ में क्ष वर्ण है। दोनों के मिलने पर व्यञ्जन में परिवर्तन होकर ‘तत्क्षणम्’ रूप बनता है।
तत् + क्षणम् = तत्क्षणम्
9. ‘दीर्घा रज्जुः’ पद में विशेषण पद कौन-सा है?
(A) दीर्घा
(B) दीर्घम्
(C) रज्जुः
(D) रज्जुम्
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य ‘दीर्घा रज्जुः’ में ‘दीर्घा’ शब्द ‘रज्जुः’ की विशेषता बता रहा है। ‘दीर्घा’ का अर्थ लम्बी होता है और ‘रज्जुः’ का अर्थ रस्सी है।
अर्थात् दीर्घा रज्जुः = लम्बी रस्सी।
जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, उसे विशेषण कहते हैं। इसलिए यहाँ ‘दीर्घा’ विशेषण है।
10. ‘प्र + लिख्’ धातु में ‘ल्यप्’ प्रत्यय लगने पर कौन-सा रूप उचित है?
(A) प्रलिखति
(B) प्रलिख्य
(C) प्रलिखितम्
(D) प्रलेखितुम्
व्याख्या
व्याख्या : यहाँ ‘प्र’ उपसर्ग के साथ ‘लिख्’ धातु का प्रयोग हुआ है। ‘ल्यप्’ प्रत्यय लगने पर पूर्वकालिक क्रिया का रूप बनता है।
प्र + लिख् + ल्यप् = प्रलिख्य
‘प्रलिख्य’ का अर्थ है ‘लिखकर’। जब एक कार्य दूसरे कार्य से पहले पूरा हो जाता है, तब ऐसे अर्थ को व्यक्त करने के लिए ल्यप् प्रत्यय से बने रूप का प्रयोग किया जाता है।
11. ‘नेत्राणि’ शब्द किस वचन का रूप है?
(A) बहुवचनम्
(B) अव्ययम्
(C) एकवचनम्
(D) द्विवचनम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘नेत्राणि’ शब्द का अर्थ आँखें होता है। ‘नेत्र’ शब्द नपुंसकलिङ्ग में आता है। इसका एकवचन रूप ‘नेत्रम्’ और बहुवचन रूप ‘नेत्राणि’ होता है।
नेत्रम् = एकवचनम्
नेत्रे = द्विवचनम्
नेत्राणि = बहुवचनम्
इसलिए ‘नेत्राणि’ बहुवचन का रूप है।
12. ‘कर्मकारेण यन्त्रं चाल्यते।’ वाक्य में कौन-सा वाच्य प्रयुक्त है?
(A) भाववाच्यम्
(B) लोट्-वाच्यम्
(C) कर्तृवाच्यम्
(D) कर्मवाच्यम्
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य है — ‘कर्मकारेण यन्त्रं चाल्यते।’ इसका अर्थ है ‘कारीगर द्वारा मशीन चलाई जाती है।’
इस वाक्य में कार्य का प्रभाव ‘यन्त्रम्’ पर पड़ रहा है और क्रिया ‘चाल्यते’ कर्म के अनुसार प्रयुक्त हुई है। साथ ही ‘कर्मकारेण’ में तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
जिस वाक्य में कर्म को प्रधानता दी जाती है, उसे कर्मवाच्य कहते हैं। इसलिए यह वाक्य कर्मवाच्यम् है।
13. ‘वदनं कमलम् इव शोभते।’ वाक्य में कौन-सा अलङ्कारः है?
(A) रूपकम्
(B) अनुप्रासः
(C) उपमा
(D) यमकम्
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य है — ‘वदनं कमलम् इव शोभते।’ इसका अर्थ है ‘मुख कमल के समान सुन्दर दिखाई देता है।’
यहाँ ‘वदनम्’ की तुलना ‘कमलम्’ से की गई है। तुलना बताने के लिए ‘इव’ शब्द का प्रयोग हुआ है।
वदनम् = उपमेय
कमलम् = उपमान
इव = उपमावाचक शब्द
इसलिए यहाँ उपमा अलङ्कार है।
उत्तर : (C) उपमा
14. ‘कर्तृ’ शब्द का प्रथमा बहुवचन रूप क्या है?
(A) कर्तृषु
(B) कर्तारः
(C) कर्तृन्
(D) कर्तृभिः
व्याख्या
व्याख्या : ‘कर्तृ’ शब्द का अर्थ कार्य करने वाला होता है। ‘कर्तृ’ शब्द के प्रथमा विभक्ति, बहुवचन में रूप ‘कर्तारः’ होता है।
कर्ता — एकवचन
कर्तारौ — द्विवचन
कर्तारः — बहुवचन
प्रथमा विभक्ति का प्रयोग सामान्यतः कर्ता के लिए होता है। इसलिए ‘कर्तृ’ का प्रथमा बहुवचन रूप ‘कर्तारः’ है।
15. ‘आकाशम्’ शब्द का पर्यायवाची शब्द चुनिए।
(A) नभः
(B) अग्निः
(C) शिला
(D) पर्णम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘आकाशम्’ का अर्थ आकाश या गगन होता है। संस्कृत में आकाश के लिए अनेक पर्यायवाची शब्द मिलते हैं, जैसे नभः, गगनम्, व्योम आदि।
इसलिए दिए गए विकल्पों में ‘नभः’, ‘आकाशम्’ का पर्यायवाची शब्द है।
आकाशम् = नभः = गगनम् = व्योम
16. ‘जलम्’ शब्द का पर्यायवाची शब्द चुनिए।
(A) अग्निः
(B) पर्णम्
(C) तोयम्
(D) शिला
व्याख्या
व्याख्या : ‘जलम्’ का अर्थ पानी होता है। संस्कृत में जल के अनेक पर्यायवाची शब्द हैं, जैसे तोयम्, वारि, नीरम्, अम्बु आदि।
इसलिए ‘जलम्’ का सही पर्यायवाची शब्द ‘तोयम्’ है।
जलम् = तोयम् = वारि = नीरम्
17. ‘पथिकः’ शब्द का षष्ठी एकवचन रूप क्या है?
(A) पथिकेन
(B) पथिके
(C) पथिकस्य
(D) पथिकात्
व्याख्या
व्याख्या : ‘पथिकः’ का अर्थ यात्री या रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति होता है। ‘पथिक’ शब्द पुल्लिङ्ग है।
षष्ठी विभक्ति का सामान्य अर्थ ‘का, के, की’ होता है। ‘पथिक’ शब्द का षष्ठी विभक्ति, एकवचन रूप ‘पथिकस्य’ होता है।
पथिकः — प्रथमा एकवचन
पथिकस्य — षष्ठी एकवचन
इसलिए सही उत्तर ‘पथिकस्य’ है।
18. ‘प्रवेशः’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग कौन-सा है?
(A) नि
(B) वि
(C) प्र
(D) उप
व्याख्या
व्याख्या : ‘प्रवेशः’ शब्द में ‘प्र’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। ‘प्र’ का प्रयोग किसी कार्य के आगे या विशेष रूप से होने का भाव व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
प्र + विश् = प्रवेशः
यहाँ ‘प्र’ धातु से पहले लगकर उसके अर्थ में विशेषता उत्पन्न कर रहा है। इसलिए ‘प्र’ उपसर्ग है।
19. ‘उच्चैः’ शब्द का विलोम शब्द चुनिए।
(A) मध्यम्
(B) नीचैः
(C) सरलम्
(D) विस्तृतम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘उच्चैः’ का अर्थ ऊँचे स्वर में या ऊपर होता है। इसका विपरीत अर्थ बताने वाला शब्द ‘नीचैः’ है, जिसका अर्थ नीचे या धीमे स्वर में हो सकता है।
उच्चैः ↔ नीचैः
इसलिए ‘उच्चैः’ का विलोम शब्द ‘नीचैः’ है।
20. ‘परिवर्तते’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग कौन-सा है?
(A) नि
(B) उप
(C) परि
(D) प्र
व्याख्या
व्याख्या : ‘परिवर्तते’ शब्द में ‘परि’ उपसर्ग का प्रयोग हुआ है।
परि + वृत् = परिवर्तते
‘परि’ उपसर्ग का अर्थ चारों ओर, पूर्ण रूप से या आसपास के भाव को व्यक्त करना हो सकता है। इसलिए ‘परिवर्तते’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग ‘परि’ है।
21. ‘क्रीडकः मित्राय कन्दुकं यच्छति।’ वाक्य में ‘मित्राय’ किस कारक का उदाहरण है?
(A) कर्तृ
(B) करणम्
(C) सम्प्रदानम्
(D) कर्म
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य है — ‘क्रीडकः मित्राय कन्दुकं यच्छति।’ इसका अर्थ है ‘खिलाड़ी मित्र को गेंद देता है।’
यहाँ ‘मित्राय’ शब्द उस व्यक्ति को बता रहा है जिसे गेंद दी जा रही है। ‘मित्राय’ में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
जिसके लिए या जिसे कोई वस्तु दी जाए, उसे सम्प्रदान कारक कहते हैं। इसका सामान्य चिन्ह ‘को’ या ‘के लिए’ होता है।
इसलिए ‘मित्राय’ में सम्प्रदान कारक है।
22. ‘नयति’ रूप किस लकार से सम्बद्ध है?
(A) लोट्
(B) लङ्
(C) लृट्
(D) लट्
व्याख्या
व्याख्या : ‘नयति’ शब्द ‘नी’ धातु से बना है। इसका अर्थ है ‘ले जाता है’। यहाँ कार्य वर्तमान समय में होने का बोध कराता है।
वर्तमान समय में होने वाले कार्य को व्यक्त करने के लिए लट्-लकार का प्रयोग किया जाता है।
नी + लट् = नयति
इसलिए ‘नयति’ लट्-लकार का रूप है।
23. ‘राजकुमारः हस्तेन द्वारम् उद्घाटयति।’ वाक्य में ‘हस्तेन’ किस कारक का उदाहरण है?
(A) सम्प्रदानम्
(B) कर्तृ
(C) कर्म
(D) करणम्
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य है — ‘राजकुमारः हस्तेन द्वारम् उद्घाटयति।’ इसका अर्थ है ‘राजकुमार हाथ से दरवाजा खोलता है।’
यहाँ ‘हस्तेन’ शब्द उस साधन को बता रहा है जिसके द्वारा दरवाजा खोला जा रहा है। ‘हस्तेन’ में तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
जिस साधन या माध्यम से कोई कार्य किया जाता है, उसे करण कारक कहते हैं।
हस्तेन = हाथ से
इसलिए यहाँ करण कारक है।
24. ‘एषः’ रूप का लिङ्ग और वचन बताइए।
(A) पुल्लिङ्गम् बहुवचनम्
(B) स्त्रीलिङ्गम् एकवचनम्
(C) नपुंसकलिङ्गम् एकवचनम्
(D) पुल्लिङ्गम् एकवचनम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘एषः’ एक सर्वनाम है। इसका प्रयोग किसी पुरुष या पुल्लिङ्ग संज्ञा के लिए किया जाता है। ‘एषः’ का अर्थ है ‘यह’।
‘एषः’ में पुल्लिङ्ग और एकवचन का बोध होता है।
एषः = यह (पुल्लिङ्ग, एकवचन)
इसलिए सही उत्तर पुल्लिङ्गम् एकवचनम् है।
25. ‘रसेन पूर्णम्’ के लिए कौन-सा समस्त पद उचित है?
(A) रसपूर्णः
(B) रसेन पूर्णः
(C) पूर्णरसम्
(D) रसपूर्णम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘रसेन पूर्णम्’ का अर्थ है ‘रस से पूर्ण’। इन दोनों पदों को मिलाकर एक समस्त पद बनाया जाता है।
रसेन पूर्णम् = रसपूर्णम्
‘रसपूर्णम्’ का अर्थ है रस से भरा हुआ या रस से पूर्ण। इसलिए ‘रसेन पूर्णम्’ का सही समस्त पद ‘रसपूर्णम्’ है।
26. ‘व्याधः पुनः पश्यति।’ वाक्य में अव्यय पद कौन-सा है?
(A) पुनः
(B) व्याधः
(C) गच्छति
(D) पुस्तकम्
व्याख्या
व्याख्या : ‘पुनः’ का अर्थ फिर या दोबारा होता है। यह ऐसा शब्द है जिसके रूप में लिंग, वचन या विभक्ति के कारण परिवर्तन नहीं होता।
इसलिए ‘पुनः’ एक अव्यय शब्द है।
पुनः = फिर / दोबारा
वाक्य में ‘पुनः’ क्रिया ‘पश्यति’ के बारे में अतिरिक्त जानकारी देता है कि व्याध फिर से देखता है।
27. ‘जनैः सभायां हस्यते।’ वाक्य में कौन-सा वाच्य प्रयुक्त है?
(A) कर्मवाच्यम्
(B) भाववाच्यम्
(C) कर्तृवाच्यम्
(D) लोट्-वाच्यम्
व्याख्या
व्याख्या : वाक्य है — ‘जनैः सभायां हस्यते।’ इसका अर्थ है ‘सभा में लोगों द्वारा हँसा जाता है।’
इस वाक्य में किसी विशेष कर्ता को प्रधानता नहीं दी गई है और क्रिया ‘हस्यते’ के माध्यम से केवल कार्य या भाव का बोध हो रहा है।
जिस वाक्य में केवल क्रिया के भाव को प्रधानता दी जाती है और कर्ता या कर्म को प्रधानता नहीं दी जाती, उसे भाववाच्य कहते हैं।
इसलिए यह वाक्य भाववाच्यम् है।
गद्यांश आधारित प्रश्न (28–30)
पठनं मनुष्यस्य ज्ञानवृद्धये श्रेष्ठं साधनम् अस्ति। केवलं
पाठ्यपुस्तकानि एव न, अपि तु कथाः, निबन्धाः,
विज्ञानविषयकानि पुस्तकानि च पठनीयानि। विविधपठनात्
विचारविस्तारः भवति, भाषाज्ञानं च समृद्धं भवति।
28. पठनं कस्य वृद्धये साधनम् अस्ति?
(A) आलस्यस्य
(B) क्लेशस्य
(C) निद्रायाः
(D) ज्ञानस्य
व्याख्या
व्याख्या : गद्यांश में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ‘पठनं मनुष्यस्य ज्ञानवृद्धये श्रेष्ठं साधनम् अस्ति।’
इसका अर्थ है कि पठन मनुष्य के ज्ञान की वृद्धि के लिए श्रेष्ठ साधन है।
प्रश्न में पूछा गया है कि पठनं कस्य वृद्धये साधनम्? अर्थात् ‘पठन किसकी वृद्धि के लिए साधन है?’
गद्यांश के अनुसार उत्तर है ‘ज्ञानस्य’, अर्थात् ज्ञान की वृद्धि के लिए।
29. कानि पुस्तकानि पठनीयानि?
(A) चित्रपुस्तकानि
(B) गीतपुस्तकानि
(C) पाठ्यपुस्तकानि
(D) कथाः, निबन्धाः, विज्ञानविषयकानि पुस्तकानि च
व्याख्या
व्याख्या : दिए गए गद्यांश में विविध प्रकार की पुस्तकों को पढ़ने के महत्व पर बताया गया है। इसमें कथाओं, निबन्धों तथा विज्ञान से सम्बन्धित पुस्तकों के अध्ययन की बात कही गई है।
विभिन्न विषयों की पुस्तकों को पढ़ने से विद्यार्थी को अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी प्राप्त होती है और उसका ज्ञान बढ़ता है।
इसलिए गद्यांश के अनुसार पठनीय पुस्तकों में कथाः, निबन्धाः तथा विज्ञानविषयकानि पुस्तकानि शामिल हैं।
30. विविधपठनात् किम् भवति?
(A) मौनम्
(B) निद्रा
(C) विचारविस्तारः
(D) विस्मरणम्
व्याख्या
व्याख्या : गद्यांश में विविध प्रकार की पुस्तकों को पढ़ने के लाभ बताए गए हैं। जब व्यक्ति अलग-अलग विषयों और विचारों से सम्बन्धित सामग्री पढ़ता है, तो उसके ज्ञान का क्षेत्र विस्तृत होता है और वह विभिन्न दृष्टिकोणों को समझ पाता है।
इससे उसके विचारों का विस्तार होता है। इसी को संस्कृत में ‘विचारविस्तारः’ कहा गया है।
इसलिए विविध पठन से ‘विचारविस्तारः’ होता है।
Main Topics Covered
इस UPTET Sanskrit Set 1 में मुख्य रूप से निम्न विषयों से प्रश्न शामिल हैं:
- क्त प्रत्यय
- ल्यप् प्रत्यय
- विसर्ग-सन्धि
- व्यञ्जन-सन्धि
- समास
- लकार — लट् एवं लृट्
- अव्यय
- विशेषण
- वचन
- वाच्य — कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य एवं भाववाच्य
- अलङ्कार — उपमा
- शब्दरूप
- प्रथमा बहुवचन
- षष्ठी एकवचन
- पर्यायवाची शब्द
- विलोम शब्द
- उपसर्ग
- कारक — सम्प्रदान एवं करण
- लिङ्ग एवं वचन
- गद्यांश आधारित प्रश्न
Practice Guidance
इस सेट को हल करते समय पहले सभी 30 प्रश्नों को बिना उत्तर देखे हल करने का प्रयास करें। विशेष रूप से सन्धि, समास, प्रत्यय, लकार, उपसर्ग और कारक वाले प्रश्नों में नियम को पहचानकर उत्तर दें।
गद्यांश आधारित प्रश्नों में पहले पूरे गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और फिर प्रश्नों के उत्तर दें। अभ्यास के बाद अपने उत्तरों का दिए गए सही उत्तर से मिलान करें और जिन प्रश्नों में गलती हुई है, उनके संबंधित व्याकरणिक नियम को दोबारा पढ़ें।
FAQ
Q1. UPTET 2026 Sanskrit Set 1 में कितने प्रश्न हैं?
इस अभ्यास सेट में कुल 30 प्रश्न हैं।
Q2. इस संस्कृत सेट में किन विषयों से प्रश्न पूछे गए हैं?
इस सेट में सन्धि, समास, प्रत्यय, लकार, अव्यय, वाच्य, कारक, उपसर्ग, शब्दरूप, पर्यायवाची, विलोम, अलङ्कार और गद्यांश से संबंधित प्रश्न हैं।
Q3. क्या इस सेट में संस्कृत गद्यांश भी दिया गया है?
हाँ। प्रश्न 28 से 30 एक संस्कृत गद्यांश पर आधारित हैं।
Q4. क्या यह सेट संस्कृत व्याकरण के अभ्यास के लिए उपयोगी है?
हाँ, इसमें संस्कृत व्याकरण के कई महत्वपूर्ण भागों से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं, इसलिए इसका उपयोग अभ्यास के लिए किया जा सकता है।
Q5. इस सेट में वाच्य से संबंधित प्रश्न हैं?
हाँ। इसमें कर्मवाच्य और भाववाच्य से संबंधित प्रश्न शामिल हैं।
