मौर्ये काल MCQs Quiz

मौर्य काल – प्रश्नोत्तर (Quiz) के माध्यम से जानिए भारत का स्वर्णिम इतिहास

मौर्य काल भारतीय इतिहास का वह गौरवशाली युग है जिसने एकीकृत भारत की नींव रखी। यदि आप इतिहास के प्रश्नोत्तर (History Quiz) की तलाश में हैं, तो मौर्य वंश से संबंधित प्रश्न आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं, विशेषकर अगर आप UPSC, State PCS, Teaching, SSC, Railway, Bank या राज्य स्तरीय किसी भी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

हम आपके लिए लेकर आए हैं मौर्य काल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, जो न केवल आपकी ज्ञानवृद्धि करेंगे बल्कि परीक्षा में सफलता पाने में भी मददगार साबित होंगे।

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मौर्य काल – प्रश्नोत्तर (Quiz)

1. मौर्यकाल में टैक्स को छुपाने (चोरी) के लिए इनमें से क्या दण्ड दिया जाता था?

(a) मृत्युदण्ड

(b) सामानों की कुर्की (जब्ती)

(c) कारावास

(d) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्‍तर : (a) : मृत्युदण्ड    व्याख्या :
🔹 मौर्यकाल में कर चोरी (टैक्स छुपाने) के लिए कठोर दंड दिया जाता था, जिसमें मृत्युदंड (फांसी) भी शामिल था।
🔹 अर्थशास्त्र (चाणक्य द्वारा रचित ग्रंथ) में कर चोरी को गंभीर अपराध माना गया है और इसमें कठोर दंडों का उल्लेख मिलता है।
🔹 मौर्य प्रशासन राजस्व वसूली के लिए सख्त नियमों का पालन करता था, और जो व्यक्ति कर चोरी करता था, उसे कड़ी सजा दी जाती थी।
🔹 इसके अतिरिक्त, कर न चुकाने पर संपत्ति की कुर्की (जब्ती) और कारावास की भी सजा दी जाती थी, लेकिन मुख्य दंड मृत्युदंड था।

2. किस अभिलेख में अशोक के नाम का उल्लेख है?

(a) कन्दहार, बैराट, ऐरागुडी एवं मास्की

(b) नेतुर, उद्‌गोलम, मास्की एवं गुर्जरा

(c) केवल मास्की एवं गुर्जरा से

(d) बौली एवं मासनी

उत्‍तर : (a) :कन्दहार, बैराट, ऐरागुडी एवं मास्की   
व्याख्या :

🔹 अशोक के नाम (देवानांप्रिय अशोक) का स्पष्ट उल्लेख केवल कुछ ही अभिलेखों में मिलता है।
🔹 कंधार, बैराट, ऐरागुड़ी और मास्की अभिलेखों में अशोक का नाम स्पष्ट रूप से लिखा गया है।
🔹 मास्की अभिलेख (कर्नाटक) पहला ऐसा शिलालेख है, जिसमें “अशोक” नाम का सीधा उल्लेख मिलता है।
🔹 अन्य अभिलेखों में अशोक को “देवानांप्रिय” और “प्रियदर्शी” के रूप में संदर्भित किया गया है।

3. अशोक का कौन-सा अभिलेख धार्मिक सहिष्णुता के सिद्धांत को समर्पित है?

(a) प्रथन वृहद शिलालेख

(b) चतुर्थ शिलालेख

(c) 12वां शिलालेख

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्‍तर : (c) :12वां शिलालेख    व्याख्या :
🔹 अशोक का द्वादश (12वां) शिलालेख धार्मिक सहिष्णुता के सिद्धांत को समर्पित है।
🔹 इस अभिलेख में सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और सहिष्णुता बरतने की बात कही गई है।
🔹 अशोक ने इसमें यह बताया कि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानवता की सेवा और नैतिक आचरण को बढ़ावा देना है।
🔹 उन्होंने यह भी कहा कि अपने धर्म की प्रशंसा और दूसरों के धर्म की निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे समाज में शांति और सद्भाव बना रहेगा।
✅ अतः सही उत्तर (c) 12वां शिलालेख है।

4. पाटलिपुत्र का संस्थापक कौन था?

(a) बिम्बिसार

(b) उदयिन

(c) बिन्दुसार

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्‍तर : (b) : उदयिन    व्याख्या :
पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) की स्थापना मगध के राजा उदयिन ने की थी, जो हर्यक वंश के शासक थे।
•उदयिन बिम्बिसार का पुत्र और अजातशत्रु का उत्तराधिकारी था।
•उसने अपने शासनकाल (लगभग 460-440 ईसा पूर्व) के दौरान पाटलिपुत्र को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सैन्य केंद्र बनाया।
•यह स्थान गंगा और सोन नदियों के संगम पर स्थित था, जिससे इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।
•उदयिन ने अपनी राजधानी राजगृह से पाटलिपुत्र स्थानांतरित की, जिससे बाद में यह मौर्य साम्राज्य की राजधानी भी बना।
अन्य विकल्पों पर चर्चा: •बिम्बिसार (हर्यक वंश) ने राजगृह को अपनी राजधानी बनाया था, पाटलिपुत्र की स्थापना नहीं की।
•बिन्दुसार (मौर्य वंश) अशोक के पिता थे, जिनका पाटलिपुत्र से संबंध था, लेकिन उन्होंने इसकी स्थापना नहीं की।

5 अष्टाध्यायी की रचना 8 अध्यायों में से किसने की थी?

(a) मलूकदास

(b) पाणिनि

(c) कौटिल्य

(d) कालीदास

उत्‍तर : (b) : (b) पाणिनि    व्याख्या :
अष्टाध्यायी संस्कृत भाषा का एक महत्वपूर्ण व्याकरण ग्रंथ है, जिसकी रचना महर्षि पाणिनि ने की थी। यह ग्रंथ आठ अध्यायों (अष्ट + अध्यायी) में विभाजित है और इसमें संस्कृत व्याकरण के सूत्रबद्ध नियमों का संग्रह है।
•पाणिनि एक महान वैयाकरण (व्याकरणविद) थे, जिनका काल लगभग 500 ईसा पूर्व माना जाता है।
•उन्होंने संस्कृत भाषा के व्याकरण को व्यवस्थित करने के लिए 3,959 सूत्रों में इसका संकलन किया।
•अष्टाध्यायी न केवल व्याकरण का ग्रंथ है, बल्कि यह भाषा विज्ञान, ध्वनि विज्ञान और शब्द संरचना का भी अद्भुत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
•यह ग्रंथ संस्कृत व्याकरण का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक स्रोत माना जाता है, जो आगे चलकर पाणिनीय व्याकरण परंपरा की नींव बना।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•मलूकदास: वे एक संत और कवि थे, न कि व्याकरणविद।
•कौटिल्य (चाणक्य): उन्होंने अर्थशास्त्र की रचना की थी, व्याकरण ग्रंथ की नहीं।
•कालिदास: वे संस्कृत के महान कवि और नाटककार थे, जिन्होंने अभिज्ञानशाकुंतलम, मेघदूत आदि ग्रंथ लिखे, न कि अष्टाध्यायी।

6. किसके शासनकाल में मेगस्थनीज भारत आया?

(a) अशोक

(b) हर्षवर्धन

(c) चंद्रगुप्त मौर्य

(d) कुमारगुप्त

उत्‍तर : (c) : चंद्रगुप्त मौर्य    व्याख्या :
मेगस्थनीज एक ग्रीक राजदूत और यात्री था, जिसे सेल्यूकस निकेटर (यूनानी राजा) ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत बनाकर भेजा था।
•मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल (321-297 ईसा पूर्व) के दौरान भारत आया।
•उसने “इंडिका” नामक ग्रंथ लिखा, जिसमें उसने तत्कालीन भारतीय समाज, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, और शासन व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया।
•मेगस्थनीज ने भारत के चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) और सात वर्गों का उल्लेख किया।
•उसने पाटलिपुत्र नगर, मौर्य प्रशासन, कृषि व्यवस्था और सेना के संगठन की भी जानकारी दी।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•अशोक (273-232 ईसा पूर्व): अशोक चंद्रगुप्त मौर्य का पौत्र था, लेकिन मेगस्थनीज उसके शासनकाल में नहीं आया।
•हर्षवर्धन (606-647 ईस्वी): यह बहुत बाद का शासक था, जब चीन से ह्वेनसांग भारत आया था, न कि मेगस्थनीज।
•कुमारगुप्त (415-455 ईस्वी): वह गुप्त वंश का शासक था, लेकिन मेगस्थनीज गुप्त काल में नहीं आया था।

7. वह मौर्य शासक जिसने यूनान से अपनी राज्यसभा के लिए एक दार्शनिक की मांग की थी-

(a) अशोक

(b) चन्द्रगुप्त

(c) अजातशत्रु

(d) बिम्दुसार

उत्‍तर : (d) : बिम्दुसार    व्याख्या :
मौर्य वंश के शासक बिंदुसार (297-273 ईसा पूर्व) ने यूनान के राजा एंटीऑकस प्रथम (Antiochus I) से अपने दरबार के लिए एक यूनानी दार्शनिक भेजने की मांग की थी।
•बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र और अशोक का पिता था।
•उसने अपने शासनकाल में यूनान और अन्य पश्चिमी देशों से कूटनीतिक संबंध स्थापित किए।
•यूनानी इतिहासकारों के अनुसार, बिंदुसार ने एंटीऑकस से एक यूनानी दार्शनिक भेजने के लिए कहा, ताकि वह भारतीय दरबार में रहकर ज्ञान प्रदान कर सके।
•हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कोई यूनानी दार्शनिक वास्तव में भारत आया या नहीं।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•अशोक: उसने बौद्ध धर्म का प्रसार किया लेकिन यूनानी दार्शनिक नहीं बुलाए।
•चंद्रगुप्त मौर्य: उसने यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर से संधि की थी, लेकिन दार्शनिक नहीं बुलाए।
•अजातशत्रु: वह मौर्य नहीं, बल्कि हर्यक वंश का शासक था और इसका यूनान से कोई संबंध नहीं था।

9. मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को कितनी श्रेणियों में विभाजिता किया ?

(a) चार

(b) पांच

(c) छः

(d) सात

उत्‍तर : (d) : सात    व्याख्या :
यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपने ग्रंथ “इंडिका” में भारतीय समाज को सात वर्गों (श्रेणियों) में विभाजित किया था।
मेगस्थनीज द्वारा वर्णित सात वर्ग:
1.दार्शनिक (Philosophers) – ब्राह्मण और तपस्वी
2.किसान (Farmers) – कृषि कार्य करने वाले लोग
3.गड़ेरिये और पशुपालक (Herdsmen) – पशुपालन करने वाले
4.शिल्पकार और कारीगर (Artisans) – विभिन्न शिल्पों और निर्माण कार्य में संलग्न लोग
5.योद्धा (Soldiers) – सेना में कार्यरत लोग
6.न्यायाधीश और प्रशासक (Overseers and Judges) – शासन व्यवस्था को नियंत्रित करने वाले
7.राजा और परामर्शदाता (King and Councilors) – शासक और उनके सलाहकार
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•चार (a): यह भारतीय वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) पर आधारित है, जो मेगस्थनीज की श्रेणीकरण से अलग है।
•पाँच (b) और छः (c): मेगस्थनीज ने भारतीय समाज को सात भागों में विभाजित किया था, न कि पाँच या छह में।

10. वह स्रोत जिसमें पाटलिपुत्र के प्रशासन का वर्णन उपलब्ध है, है-

(a) दिव्यावदान

(b) अर्थशास्त्र

(c) इंडिका

(d) अशोक शिलालेख

उत्‍तर : (c) : इंडिका    व्याख्या :
मेगस्थनीज द्वारा रचित “इंडिका” में पाटलिपुत्र के प्रशासन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
•उसने मौर्यकालीन राजधानी पाटलिपुत्र के शासन तंत्र, नगर व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली का उल्लेख किया है।
•नगर प्रशासन के लिए छह समितियाँ थीं, जो विभिन्न कार्यों को संभालती थीं, जैसे – उद्योग, व्यापार, कर संग्रह, जनसंख्या गणना, सुरक्षा आदि।
•पाटलिपुत्र को एक सुव्यवस्थित और किलेबंद नगर बताया गया, जहाँ लकड़ी की दीवारों और ऊँचे बुर्जों से सुरक्षा व्यवस्था थी।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•दिव्यावदान (a): यह एक बौद्ध ग्रंथ है, जिसमें अशोक के जीवन और बौद्ध धर्म के प्रचार का वर्णन है।
•अर्थशास्त्र (b): चाणक्य द्वारा रचित यह ग्रंथ प्रशासनिक और आर्थिक नीतियों पर आधारित है, लेकिन इसमें पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन का सीधा वर्णन नहीं है।
•अशोक शिलालेख (d): इनमें अशोक के धर्म प्रचार और नीति संबंधी आदेश हैं, नगर प्रशासन का विशेष विवरण नहीं है।

11. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1 सूची-11
(A) उत्तरापच 1. तोसली
(B) अवन्तिराष्ट्र 2. पाटलिपुत्र
(C) प्राची  3. तक्षशिला
(D) कलिंग 4. उज्जयिनी

कूट :

ABCD

(a)1234

(b)4321

(c)1423

(d)3421

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
सूची-1 और सूची-2 का सही सुमेलित रूप निम्नलिखित है:
सूची-1 (प्राचीन क्षेत्र) – सूची-2 (प्रशासनिक केंद्र)
(A) उत्तरापथ – तक्षशिला (3)
(B) अवन्तिराष्ट्र – उज्जयिनी (4)
(C) प्राची – पाटलिपुत्र (2)
(D) कलिंग – तोसली (1)

12. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में वर्णित ‘प्रणय कर’ से तात्पर्य था-

(c) भूमिकर

(b) एक प्रकार का विवाह कर

(c) आपातकालीन कर

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित ‘प्रणय कर’ एक आपातकालीन कर था, जिसे राज्य विशेष परिस्थितियों में वसूलता था।
•यह कर युद्ध, प्राकृतिक आपदा, आर्थिक संकट या अन्य आपातकालीन स्थितियों में लगाया जाता था।
•इसे अस्थायी कर के रूप में लागू किया जाता था और संकट समाप्त होने के बाद हटा लिया जाता था।
•इसका उद्देश्य राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना और प्रशासन को सुचारू रूप से चलाना था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•भूमिकर (c): यह कृषि भूमि पर लगाया जाने वाला कर था, लेकिन ‘प्रणय कर’ इससे अलग था।
•विवाह कर (a): प्रणय का अर्थ प्रेम होता है, लेकिन यहाँ इसका संबंध विवाह कर से नहीं है।
•इनमें से कोई नहीं (d): क्योंकि ‘प्रणय कर’ एक वास्तविक कर था, यह विकल्प गलत है।

13. निम्नलिखित में से किसने यूनानी लेखकों के ‘सैण्ड्रोकोट्टस’ का समीकरण चन्द्रगुप्त मौर्य से किया?

(a) जेम्स विलियम

(b) अलेक्जेन्डर कनिंघम

(c) विलियम जोन्स

(d) मैक्समूलर

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
ब्रिटिश विद्वान विलियम जोन्स ने सबसे पहले यूनानी लेखकों द्वारा उल्लिखित ‘सैंड्रोकोट्टस’ को चंद्रगुप्त मौर्य से जोड़ा।
•यूनानी ग्रंथों में ‘सैंड्रोकोट्टस’ का उल्लेख मिलता है, जिसे भारतीय इतिहास में चंद्रगुप्त मौर्य माना जाता है।
•विलियम जोन्स ने 1786 ई. में इस समानता की पहचान की, जिससे भारतीय इतिहास के काल निर्धारण में सहायता मिली।
•इस खोज से भारतीय और ग्रीक इतिहास के बीच संबंध स्थापित हुआ और मौर्य साम्राज्य के कालखंड को सत्यापित किया गया।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•जेम्स विलियम (a): ऐसा कोई प्रमुख इतिहासकार नहीं था।
•अलेक्ज़ेंडर कनिंघम (c): यह एक पुरातत्वविद् था, जिसने बाद में भारतीय इतिहास पर काम किया।
•मैक्समूलर (d): यह एक जर्मन संस्कृत विद्वान था, जिसने वैदिक साहित्य पर शोध किया, लेकिन सैंड्रोकोट्टस से नहीं जुड़ा।

14. अश्वघोष के ग्रंथ किस भाषा में लिखे हुए हैं?

(a) पालि

(b) प्राकृत

(c) संस्कृत

(d) हिन्दी

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
अश्वघोष प्राचीन भारत के एक महान बौद्ध दार्शनिक, कवि और नाटककार थे, जिन्होंने संस्कृत भाषा में कई ग्रंथ लिखे।
•वे कनिष्क (कुषाण वंश) के राजकवि थे।
•उनके प्रमुख ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए, जिनमें शामिल हैं:
•बुद्धचरित – गौतम बुद्ध की जीवनी पर आधारित महाकाव्य।
•सौंदरानंद – बौद्ध धर्म और मोक्ष की प्राप्ति का वर्णन करता है।
•वज्रसूची – जाति प्रथा की आलोचना करने वाला ग्रंथ।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•पालि (a): यह बौद्ध ग्रंथों (त्रिपिटक) की भाषा थी, लेकिन अश्वघोष ने संस्कृत में लिखा।
•प्राकृत (b): यह लोकभाषा थी, जिसे जैन और बौद्ध साहित्य में प्रयोग किया गया, पर अश्वघोष संस्कृत कवि थे।
•हिन्दी (d): उस समय हिंदी भाषा अस्तित्व में नहीं थी।

15. अशोक के शिलालेखों की लिपि क्या है?

(b) पालि

(b) ब्राह्मी

(c) संस्कृत

(d) प्राकृत

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
अशोक के अधिकांश शिलालेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं, जो प्राचीन भारत की प्रमुख लिपि थी।
•ब्राह्मी लिपि दक्षिणी और मध्य भारत के शिलालेखों में प्रयोग हुई।
•उत्तर-पश्चिम भारत (अफगानिस्तान, पाकिस्तान) में खरोष्ठी लिपि का प्रयोग हुआ।
•अशोक के शिलालेखों की भाषा मुख्य रूप से प्राकृत थी, जबकि कुछ शिलालेखों में ग्रीक और अरामाईक भाषा का भी प्रयोग किया गया।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•पालि (b): अशोक के अभिलेख प्राकृत भाषा में हैं, न कि पालि में।
•संस्कृत (b): अशोक के शिलालेख संस्कृत में नहीं लिखे गए थे, बल्कि बाद में गुप्त काल में संस्कृत का उपयोग हुआ।
•प्राकृत (d): भाषा प्राकृत थी, लेकिन लिपि ब्राह्मी थी।

16. रज्जुको को क्यों नियुक्त किया जाता था?

(a) कर वसूली के लिए तथा कानून एवं शान्ति कायम करने के लिए

(b) लोगों के नैतिक उन्नयन के लिए

(c) राजाज्ञा लिखने के लिए

(d) शिलालेखों की रक्षा के लिए

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
रज्जुक मौर्यकालीन प्रशासनिक अधिकारी थे, जिन्हें कर वसूली, भूमि मापन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियुक्त किया जाता था।
•ये स्थानीय प्रशासन का कार्य संभालते थे और ग्रामीण क्षेत्रों में कर संग्रह का दायित्व निभाते थे।
•इन्हें न्यायिक अधिकार भी प्राप्त थे और वे छोटे-मोटे अपराधों पर दंड देने के अधिकारी थे।
•अर्थशास्त्र में उल्लेख है कि ये भूमि मापकर कर निर्धारण भी करते थे।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•(b) लोगों के नैतिक उन्नयन के लिए: यह धम्ममहामात्र का कार्य था, न कि रज्जुक का।
•(c) राजाज्ञा लिखने के लिए: यह कार्य शाही लिपिकों (लेखकों) द्वारा किया जाता था।
•(d) शिलालेखों की रक्षा के लिए: यह कार्य स्थानीय प्रशासन और संरक्षक अधिकारी देखते थे।

17. अशोक के सारनाथ स्तंभ के निचले भाग कौन-कौन से जानवर निरूपित हैं?

(1) हाथी

(2) बाघ

(3) सांड

(4) गैंडा

(5) सिंह

(6) घोड़ा

कूटः

(a) 1,2 और 3

(b) 1,2,3,5

(c) 1 और 2

(d) 1,3,5,6

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
अशोक के सारनाथ स्तंभ के निचले भाग (अभिलंब) में चार प्रमुख जानवरों की आकृतियाँ बनी हुई हैं:
1.हाथी – बुद्ध के जन्म का प्रतीक।
2.सांड – शक्ति और उत्साह का प्रतीक।
3.सिंह – धर्म का प्रचार और बौद्ध धर्म की महिमा का प्रतीक।
4.घोड़ा – गति और ऊर्जा का प्रतीक।
•ये सभी जानवर धम्मचक्र (धर्म चक्र) के साथ जुड़े हैं, जो बौद्ध धर्म के प्रचार को दर्शाते हैं।
•सारनाथ स्तंभ का ऊपरी भाग चार सिंहों की मूर्ति है, जिसे भारत ने राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
•बाघ (2) और गैंडा (4): सारनाथ स्तंभ में इनका चित्रण नहीं है।
•सही विकल्प (d) 1, 3, 5, 6 ✅

18.अशोक के अभिलेख में यह घोषणा की गई है कि ‘सभी मनुष्य मेरी संतान की भांति हैं।’

(a) द्वितीय पृथक शिलालेख

(b) छठा स्तम्भ लेख

(c) प्रथम पृथक शिलालेख

(d) पांचवा पृथक शिलालेख

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
अशोक के प्रथम पृथक शिलालेख (Separate Edict I) में यह घोषणा की गई है कि: “सभी मनुष्य मेरी संतान की भांति हैं।”
• इस अभिलेख में अशोक ने अपने प्रजा के प्रति पिता समान प्रेम और दायित्व की भावना व्यक्त की है।
• उन्होंने जनता के कल्याण, नैतिक उत्थान और अहिंसा को अपनाने पर बल दिया।
• यह शिलालेख धम्म (नीति) के प्रचार का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• द्वितीय पृथक शिलालेख (a): इसमें विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता पर बल दिया गया है।
• छठा स्तंभ लेख (b): इसमें धम्म महामात्रों की नियुक्ति का उल्लेख है।
• पांचवा पृथक शिलालेख (c): इसमें शिकार और हिंसा के निषेध का उल्लेख है।

19. मौर्यकालीन मृद्भाण्डों को क्या कहा जाता है?

(a) चित्रित धूसर मृद्भाण्ड

(b) लाल पर काले रंग के मृद्भाण्ड

(c) उत्तरी काली पॉलिश वाले मृद्भाण्ड

(d) चित्रित मृद्भाण्ड

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
मौर्यकालीन सभ्यता में उत्तरी काली पॉलिश वाले मृद्भाण्ड (NBPW) सबसे प्रमुख थे।
• ये चमकदार, काले या धूसर रंग के होते थे।
• इन बर्तनों की सतह अत्यधिक चिकनी और चमकदार होती थी, जिससे इनकी विशेष पहचान बनती है।
• ये मृद्भाण्ड मुख्यतः राजधानी पाटलिपुत्र और अन्य प्रमुख स्थलों (अहिच्छत्र, कौशांबी, वैशाली) में पाए गए हैं।
• ये मौर्यकालीन उन्नत कुम्हार कला और व्यापारिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
अन्य विकल्पों पर चर्चा: • चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (a): यह महाजनपद काल (1000-600 ई.पू.) से संबंधित है।
• लाल पर काले रंग के मृद्भाण्ड (b): यह हड़प्पा संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
• चित्रित मृद्भाण्ड (d): यह वैदिक काल में प्रयुक्त होता था।

20. मेगस्थनीज के अनुसार पाटलिपुत्र का नगर एक समिति द्वारा शासित था। इस समिति में कितने सदस्य थे?

(a) बीस

(b) पन्द्रह

(c) पचास

(d) तीस

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
मेगस्थनीज के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन एक समिति द्वारा संचालित किया जाता था, जिसमें 30 सदस्य होते थे।
• ये 30 सदस्य छह उपसमितियों में विभाजित थे, और प्रत्येक उपसमिति में 5-5 सदस्य होते थे।
• इन उपसमितियों के कार्य इस प्रकार थे:
1. उद्योग और कारीगरों का प्रबंधन
2. विदेशी यात्रियों और व्यापारियों की देखभाल
3. जनगणना और जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड रखना
4. व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करना
5. निर्माण कार्य और सड़कों की देखरेख
6. सेना और रक्षा व्यवस्था का प्रबंधन
• यह व्यवस्था नगर प्रशासन के सुचारू संचालन और विभिन्न विभागों के कुशल प्रबंधन के लिए बनाई गई थी।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• बीस (a) और पंद्रह (b): ये संख्या गलत है, क्योंकि समिति में 30 सदस्य थे।
• पचास (c): मेगस्थनीज ने ऐसा कोई उल्लेख नहीं किया है।

21. मेगस्थनीज के अनुसार मौर्यकालीन समाज में कौन-कौन सी जातियां थी?

(1) दार्शनिक

(2) दास

(3) दंडाधिकारी

(4) पार्षद

कूटः

(a) 1,2 और 3

(b) 1,2, 3 और 4

(c) केवल 3

(d) 1,2 एवं 4

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक “इंडिका” में मौर्यकालीन समाज को 7 वर्गों में विभाजित किया था:
1. दार्शनिक (Philosophers) – ऋषि, ब्राह्मण, संत, विद्वान।
2. कृषक (Farmers) – कृषि करने वाले लोग।
3. गड़ेरिए (Herdsmen) – पशुपालक।
4. शिल्पकार (Artisans) – कारीगर, हथियार व निर्माण कार्य करने वाले।
5. युद्ध सैनिक (Soldiers) – सेना व सैन्य कार्य से जुड़े लोग।
6. न्यायाधीश व प्रशासक (Overseers) – प्रशासन, दंड व्यवस्था व कानून देखने वाले।
7. पार्षद (Councilors) – राजा के सलाहकार व मंत्री।
👉 दास (Slaves) का जिक्र इंडिका में नहीं मिलता, लेकिन भारतीय संदर्भ में इनका अस्तित्व माना जाता है।
👉 दंडाधिकारी (Magistrates) अलग वर्ग में नहीं थे, बल्कि प्रशासकों के अंतर्गत आते थे।
सही उत्तर: (1) दार्शनिक, (2) दास, (4) पार्षद ✅

22. ‘इंडिका’ का मूल लेखक था-

(a) निआर्कस

(b) मेगस्थनीज

(c) प्लूटार्क

(d) डायोडोरस

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
“इंडिका” पुस्तक के मूल लेखक मेगस्थनीज थे, जो सेल्युकस निकेटर के राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए थे।
• उन्होंने इस ग्रंथ में मौर्यकालीन समाज, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, सैन्य व्यवस्था और पाटलिपुत्र का वर्णन किया।
• हालांकि, “इंडिका” का मूल ग्रंथ अब उपलब्ध नहीं है, लेकिन बाद के ग्रीक लेखकों (आरियन, स्ट्रैबो, डायोडोरस, प्लूटार्क) ने इसका उल्लेख किया है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• निआर्कस (a): वह सिकंदर का सेनापति था और भारत के समुद्री मार्गों का वर्णन करता था।
• प्लूटार्क (c): एक ग्रीक इतिहासकार था, जिसने “पैरेलल लाइव्स” में भारत का उल्लेख किया।
• डायोडोरस (d): एक यूनानी इतिहासकार था, जिसने मेगस्थनीज के लेखन से प्रेरणा ली थी।

23.निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें चन्द्रगुप्त मौर्य एवं अशोक दोनों के नामों का उल्लेख है?

(a) रूद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख

(b) अशोक का मास्की लघु शिलालेख

(c) स्कन्दगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख

(d) अशोक का शाहबाजगढ़ी शिलालेख

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
• रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख (150 ई.) में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है।
• इसमें सुदर्शन झील के निर्माण का वर्णन है, जिसे चंद्रगुप्त मौर्य के समय में उनके सूबेदार पुष्पगुप्त ने बनवाया था और बाद में अशोक ने इसका विस्तार किया।
• इस अभिलेख को शक शासक रुद्रदामन-I (पश्चिमी क्षत्रप) ने लिखवाया था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• अशोक का मास्की लघु शिलालेख (b): इसमें अशोक को “देवनामप्रिय” कहा गया है, लेकिन चंद्रगुप्त मौर्य का उल्लेख नहीं है।
• स्कन्दगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख (c): यह गुप्तकालीन अभिलेख है, जिसमें स्कंदगुप्त के कार्यों का उल्लेख है।
• अशोक का शाहबाजगढ़ी शिलालेख (d): यह अशोक के धर्म संबंधी आदेशों को दर्शाता है, चंद्रगुप्त मौर्य का उल्लेख नहीं है।

24. वर्तमान नगरपालिका प्रशासन का कौन-सा कार्य मौर्य काल से जारी है?

(a) नाप-तौल के बांटों का निरीक्षण

(b) वस्तुओं की कीमतें निर्धारित करना

(c) जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण

(d) शिल्पकारों का संरक्षण

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
• मौर्यकाल में नगरपालिका प्रशासन (नगर समितियाँ) बहुत संगठित था।
• मेगस्थनीज के अनुसार, नगर प्रशासन की एक समिति जन्म और मृत्यु का पंजीकरण रखती थी।
• यह प्रशासनिक नियंत्रण, कर संग्रह और जनसंख्या गणना के लिए किया जाता था।
• वर्तमान समय में भी नगरपालिका प्रशासन के तहत जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य होता है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) नाप-तौल के बांटों का निरीक्षण: मौर्यकाल में यह कार्य किया जाता था, लेकिन आज यह नगरपालिका के बजाय भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) जैसे संस्थानों के अधीन है।
• (b) वस्तुओं की कीमतें निर्धारित करना: यह कार्य मौर्यकाल में होता था, लेकिन आज यह बाजार और सरकार की आर्थिक नीतियों पर निर्भर करता है।
• (d) शिल्पकारों का संरक्षण: यह मौर्यकाल में था, लेकिन वर्तमान में इसे सरकार की सांस्कृतिक और आर्थिक नीतियों के तहत प्रोत्साहित किया जाता है।

25. मौर्य काल में भूमि कर, जो कि राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, किस अधिकारी द्वारा एकत्रित किया जाता था?

(a) अग्रोनोमाई

(b) शुल्काध्यक्ष

(c) सीताध्यक्ष

(d) अक्राध्यक्ष

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
• मौर्य काल में भूमि कर (भाग) राज्य की आय का मुख्य स्रोत था।
• इसे सीताध्यक्ष नामक अधिकारी एकत्रित करता था।
• “अर्थशास्त्र” के अनुसार, यह कर कृषि उत्पादन का लगभग 1/4 से 1/6 भाग होता था।
• सीताध्यक्ष राजा की प्रत्यक्ष कृषि भूमि (सीतभूमि) की देखरेख भी करता था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• अग्रोनोमाई (a): यह एक ग्रीक शब्द है, जिसका मौर्य प्रशासन से कोई संबंध नहीं है।
• शुल्काध्यक्ष (b): यह सीमा शुल्क और व्यापार कर एकत्रित करता था।
• अक्राध्यक्ष (d): यह पशु और चरागाह कर से संबंधित अधिकारी था।

26. सुदामा गुफा समर्पित थी-

(a) शैव संतों को

(b) बौद्ध भिक्षुओं को

(c) आजीवक संतों कों

(d) कापालिक अनुयायियों को

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
• सुदामा गुफा बिहार के बाराबर पहाड़ियों में स्थित है।
• इसे सम्राट अशोक (257 ई.पू.) ने आजीवक संप्रदाय के संतों को समर्पित किया था।
• गुफा की दीवारें अत्यंत चिकनी और पॉलिश की हुई हैं, जो मौर्यकालीन शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
• इसमें ब्राह्मी लिपि में एक अभिलेख भी उत्कीर्ण है, जिसमें अशोक द्वारा इसे आजीवकों को दिए जाने का उल्लेख है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) शैव संतों को: मौर्यकाल में शैव संप्रदाय का इतना प्रभाव नहीं था।
• (c) बौद्ध भिक्षुओं को: बौद्ध धर्म को अशोक ने बढ़ावा दिया, लेकिन यह गुफा बौद्धों के लिए नहीं थी।
• (d) कापालिक अनुयायियों को: कापालिक संप्रदाय का उदय बाद के काल में हुआ था।

27. मौर्य काल में भूमि कर, जो कि राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, किस अधिकारी द्वारा एकत्रित किया जाता था ?

(a) अग्रोनोमाई

(b) शुल्काध्यक्ष

(c) सीताध्यक्ष

(d) अक्राध्यक्ष

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में भूमि कर (भाग) राज्य की आय का मुख्य स्रोत था। इस कर को सीताध्यक्ष नामक अधिकारी एकत्र करता था। “अर्थशास्त्र” के अनुसार, यह कर कृषि उत्पादन का 1/4 से 1/6 भाग था। सीताध्यक्ष न केवल कर वसूली करता था, बल्कि राजा की सीतभूमि (राजकीय कृषि भूमि) की देखरेख भी करता था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• अग्रोनोमाई (a): ग्रीक प्रशासनिक पद था, जिसका मौर्यकाल से कोई संबंध नहीं था।
• शुल्काध्यक्ष (b): यह सीमा शुल्क और व्यापार कर एकत्रित करता था, न कि भूमि कर।
• अक्राध्यक्ष (d): यह पशु और चरागाह कर से संबंधित अधिकारी था।

28.अशोक के अभिलेखों से किस एकमात्र (अभिलेख) लेखक का परिचय मिलता है?

(a) हरिषेण

(c) चापड़

(b) रवि किर्ति

(d) श्याम चापड़

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
अशोक के अभिलेखों से केवल “चापड़” नामक लेखक का उल्लेख मिलता है। यह नाम गुजरात के गिरनार शिलालेख में मिलता है, जिसे अशोक के आदेश पर उत्कीर्ण किया गया था। यह दर्शाता है कि चापड़ नामक व्यक्ति ने इस अभिलेख को लिखा था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) हरिषेण: गुप्तकाल के राजा समुद्रगुप्त के प्रयाग प्रशस्ति का लेखक था।
• (b) रवि किर्ति: चालुक्य राजा पुलकेशिन-II के ऐहोल अभिलेख का लेखक था।
• (d) श्याम चापड़: ऐसा कोई ऐतिहासिक संदर्भ नहीं मिलता है।

29. ‘पंकोदकसन्निरोधे’ मौर्य प्रशासन द्वारा लिया जाने वाला जुर्माना था-

(a) पीने के पानी को गंदा करने पर

(b) सड़क पर कीचड़ फैलाने पर

(c) कूड़ा फेंकने पर

(d) मंदिर को गंदा करने पर

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में प्रशासन बहुत ही संगठित और कठोर था। “अर्थशास्त्र” में उल्लेखित ‘पंकोदकसन्निरोधे’ एक प्रकार का जुर्माना था, जो सार्वजनिक पीने के पानी को गंदा करने पर लगाया जाता था। इसका उद्देश्य साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखना था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (b) सड़क पर कीचड़ फैलाने पर: इससे संबंधित कोई विशेष कर या दंड का उल्लेख नहीं मिलता।
• (c) कूड़ा फेंकने पर: नगर प्रशासन सफाई के लिए उत्तरदायी था, लेकिन “पंकोदकसन्निरोधे” से संबंधित नहीं था।
• (d) मंदिर को गंदा करने पर: मौर्यकाल में धार्मिक स्थलों की देखरेख की जाती थी, लेकिन यह कर विशेष रूप से जल स्रोतों के लिए था।

30. निम्नलिखित में से कौन मौर्ययुगीन अधिकारी तौल-मान का प्रभारी था?

(a) पौतवाध्यक्ष

(b) पण्याध्यक्ष

(c) सीताध्यक्ष

(d) सूनाध्यक्ष

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में पौतवाध्यक्ष को तौल-मान (Weights & Measures) का प्रभारी अधिकारी माना जाता था। यह वस्तुओं के सही माप-तौल को सुनिश्चित करता था ताकि व्यापार में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (b) पण्याध्यक्ष: यह बाजार प्रशासन का अधिकारी था, जो वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करता था।
• (c) सीताध्यक्ष: यह भूमि कर संग्रह और राजकीय कृषि भूमि की देखरेख करता था।
• (d) सूनाध्यक्ष: यह पशु वधगृह (कसाईखानों) का निरीक्षण और प्रबंधन करता था।

31. मौर्य मंत्रिपरिषद में निम्न में से कौन राजस्व इकट्ठा करने से संबंधित था?

(a) समाहर्ता

(b) व्यभारिका

(c) अंतपाल

(d) प्रदेष्टा

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में समाहर्ता राज्य का मुख्य वित्त अधिकारी था, जो राजस्व एकत्र करने और उसके प्रबंधन का कार्य करता था। यह विभिन्न करों, विशेष रूप से भूमि कर (भाग), व्यापार कर, और उत्पादन कर को संग्रहित करता था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (b) व्यभारिका: यह न्यायिक अधिकारी था, जो कानूनी मामलों को देखता था।
• (c) अंतपाल: यह सीमावर्ती क्षेत्रों (Frontier Provinces) का प्रशासनिक अधिकारी था।
• (d) प्रदेष्टा: यह नगर प्रशासन और कानून-व्यवस्था को संभालने वाला अधिकारी था।

32. मौर्यकाल में ‘सीता’ से तात्पर्य है-

(a) एक देवी

(b) एक धार्मिक संप्रदाय

(c) राजकीय भूमि से प्राप्त आय

(d) ऊसर भूमि

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में ‘सीता’ का तात्पर्य राजकीय कृषि भूमि (Crown Land) से था। इस भूमि से प्राप्त अनाज और कर राजकीय आय (Revenue) का महत्वपूर्ण स्रोत था। “सीताध्यक्ष” नामक अधिकारी इस भूमि की देखरेख करता था और वहां की कृषि व्यवस्था को संचालित करता था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) एक देवी: ‘सीता’ का संबंध मौर्यकालीन कृषि भूमि से था, न कि किसी देवी से।
• (b) एक धार्मिक संप्रदाय: इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
• (d) ऊसर भूमि: ‘सीता’ उपजाऊ भूमि थी, न कि ऊसर (बंजर) भूमि।

33. मौर्य काल में शिक्षा का सर्वाधिक प्रसिद्ध केंद्र था-

(a) वैशाली

(b) नालंदा

(c) तक्षशिला

(d) उज्जैन

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में तक्षशिला विश्वविद्यालय शिक्षा का सबसे प्रसिद्ध केंद्र था। यह उस समय का एक प्रमुख शैक्षिक और बौद्धिक संस्थान था, जहाँ विभिन्न विषयों की शिक्षा दी जाती थी, जैसे कि वेद, चिकित्सा, राजनीति, सैन्य विज्ञान, ज्योतिष और शिल्पकला।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) वैशाली: यह बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र था, लेकिन शिक्षा के लिए प्रमुख नहीं था।
• (b) नालंदा: यह गुप्तकाल (5वीं शताब्दी ईस्वी) में प्रसिद्ध हुआ था, न कि मौर्यकाल में।
• (d) उज्जैन: यह खगोलशास्त्र और गणित का एक महत्वपूर्ण केंद्र था, लेकिन मौर्यकाल में तक्षशिला अधिक प्रसिद्ध था।

34. प्रचीन भारतीय राज प्रसादों के किस मण्डप की तुलना मुगलकालीन ‘दरबार-ए-खास’ से कर सकतें हैं जहां राजा अपने मंत्रियों से सलाह व मंत्रणा करता था?

(a) शिवास्थान-मण्डप

(b) सभा-मण्डप

(c) मंत्रिपाषान-मण्डप

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
प्राचीन भारतीय राजप्रसादों में “सभा-मण्डप” वह स्थान था, जहाँ राजा अपने मंत्रियों, दरबारियों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और निर्णय लिया करता था। इसे मुगलकालीन “दरबार-ए-खास” के समान माना जा सकता है, जहाँ बादशाह अपने खास मंत्रियों से गोपनीय मामलों पर विचार-विमर्श करता था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) शिवास्थान-मण्डप: इससे संबंधित कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता।
• (c) मंत्रिपाषान-मण्डप: ऐसा कोई विशेष मण्डप प्राचीन राजप्रसादों में नहीं मिलता।
• (d) इनमें से कोई नहीं: सभा-मण्डप का स्पष्ट उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और शिलालेखों में मिलता है।

35. चन्द्रगुप्त मौर्य के समय सौराष्ट्र का राज्यपाल कौन था?

(a) बिन्दुसार

(b) अशोक

(c) वैश्य पुष्य गुप्त

(d) यवनराज तुषास्फ

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में वैश्य पुष्यगुप्त को सौराष्ट्र (गुजरात) का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उसने गिरनार क्षेत्र में एक बड़ी सिंचाई परियोजना (सुदर्शन झील) का निर्माण करवाया था, जो बाद में रुद्रदामन-I और स्कंदगुप्त के शासनकाल में पुनर्निर्मित की गई।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) बिन्दुसार: वह चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र और उत्तराधिकारी था, लेकिन सौराष्ट्र का राज्यपाल नहीं था।
• (b) अशोक: वह बाद में सम्राट बना, लेकिन चन्द्रगुप्त मौर्य के समय सौराष्ट्र का राज्यपाल नहीं था।
• (d) यवनराज तुषास्फ: यह एक यूनानी शासक था, जिसका मौर्य प्रशासन से कोई सीधा संबंध नहीं था।

37. श्रवणबेलगोला संबंधित है-

(a) बौद्ध मत से

(b) जैन मत से

(c) अशोक के धम्म से

(d) नागार्जुन से

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) जैन धर्म से संबंधित एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह स्थान विशेष रूप से गोमतेश्वर बाहुबली की विशाल प्रतिमा (57 फीट ऊँची) के लिए प्रसिद्ध है, जिसे गंगा वंश के मंत्री चामुंडराय ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था।
इसके अलावा, यह स्थान चन्द्रगुप्त मौर्य से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म अपना लिया और अपने गुरु भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला में रहकर संयम व्रत (संथारा) द्वारा जीवन त्याग दिया।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) बौद्ध मत से: यह स्थान बौद्ध धर्म से संबंधित नहीं है।
• (c) अशोक के धम्म से: अशोक के धम्म से यह स्थान सीधे संबंधित नहीं है।
• (d) नागार्जुन से: नागार्जुन बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय के प्रमुख आचार्य थे, जिनका श्रवणबेलगोला से कोई संबंध नहीं है।

38. मौर्यों के अधीन राजस्व एकत्रित करने के लिए उत्तरदायी केन्द्रीय प्रशासन का अधिकारी था-

(a) ब्रजनिपाता

(b) समाहर्ता

(c) सन्निधाता

(d) उपरिक

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में “समाहर्ता” राज्य का मुख्य राजस्व अधिकारी था। यह सभी प्रकार के करों (भूमिकर, व्यापार कर, उत्पादन कर आदि) की वसूली और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी था। इसका उल्लेख कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” में मिलता है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) ब्रजनिपाता: यह मौर्य प्रशासन में कोई राजस्व अधिकारी नहीं था।
• (c) सन्निधाता: यह कोष एवं भंडार का प्रमुख अधिकारी था, जो एकत्रित राजस्व को संग्रहीत करता था।
• (d) उपरिक: यह प्रांतीय प्रशासक था, जो कर संग्रह की निगरानी करता था, लेकिन सीधा संग्रह नहीं करता था।

39. निम्न में से किसे मिस्र के टॉलेमी फिलाडेल्फस ने मौर्यकाल में भारत में राजदूत के रूप में भेजा था?

(a) मेगस्थनीज

(b) प्लिनी

(c) डायोनिसस

(d) प्लूटार्क

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
मौर्यकाल में मिस्र के शासक टॉलेमी फिलाडेल्फस (Ptolemy II Philadelphus) ने डायोनिसस को भारत में राजदूत के रूप में भेजा था। इससे यह पता चलता है कि मौर्यकाल में विदेशी शासकों से कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध थे। टॉलेमी II ने संभवतः यह दूतव्य बिन्दुसार या अशोक के शासनकाल में भेजा था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) मेगस्थनीज: इसे सेल्यूकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था।
• (b) प्लिनी: यह एक रोमन लेखक और भूगोलवेत्ता था, न कि राजदूत।
• (d) प्लूटार्क: यह एक ग्रीक इतिहासकार था, जो मौर्यकाल के बहुत बाद में हुआ।

40. मौर्य काल में लक्षणाध्यक्ष कौन था?

(a) पशुओं के लक्षणों का ज्ञान रखने वाला अधिकारी

(b) राज्य ज्योतिषी

(c) भवनों के निरीक्षणकर्ता

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
मौर्य प्रशासन में “लक्षणाध्यक्ष” वह अधिकारी था, जो पशुओं (विशेष रूप से घोड़ों और हाथियों) के लक्षणों और उनकी गुणवत्ता का निरीक्षण करता था। यह अधिकारी राज्य के अस्तबलों और युद्ध में उपयोग किए जाने वाले पशुओं की देखरेख करता था। कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” में इसका उल्लेख मिलता है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (b) राज्य ज्योतिषी: यह कार्य “नक्षत्रदर्शक” या ज्योतिषियों का था, न कि लक्षणाध्यक्ष का।
• (c) भवनों के निरीक्षणकर्ता: यह कार्य नगर प्रशासन के अन्य अधिकारियों द्वारा किया जाता था।
• (d) इनमें से कोई नहीं: सही उत्तर (a) है, क्योंकि लक्षणाध्यक्ष का मुख्य कार्य पशुओं का निरीक्षण करना था।

41. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ के अनुसार, मौर्यकालीन न्याय व्यवस्था में निम्नलिखित न्यायालय अस्तित्व में थे-

(1) धर्ममहामात्र

(2) धर्मस्थीय

(3) रज्जुक

(4) कंटकशोधन

सही उत्तर चुनिए-

(a) 1 एवं 2.

(b) 2 एवं 3

(c) 1 एवं 3

(d) 2 एवं 4

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” के अनुसार, मौर्यकाल में दो प्रमुख प्रकार के न्यायालय अस्तित्व में थे:
1. धर्मस्थीय न्यायालय → यह सिविल मामलों (जैसे संपत्ति विवाद, अनुबंध, उत्तराधिकार आदि) को सुनता था।
2. कंटकशोधन न्यायालय → यह आपराधिक मामलों और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए था। यह अपराधियों और राज्य विरोधी गतिविधियों पर नजर रखता था।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (1) धर्ममहामात्र: यह न्यायालय नहीं था, बल्कि धार्मिक और सामाजिक मामलों की देखरेख करने वाले अधिकारी थे।
• (3) रज्जुक: यह एक राजस्व अधिकारी था, जिसका न्यायालय से सीधा संबंध नहीं था। इसलिए, धर्मस्थीय और कंटकशोधन ही सही उत्तर हैं।

42. प्राचीन भारत के निम्नलिखित ग्रंथों में से किसमें पति द्वारा परित्यक्त पत्नी के लिए विवाह विच्छेद की अनुमति दी गई है?

(a) कामसूत्र

(b) मानवधर्मशास्त्र

(c) शुक्र नीतिसार

(d) अर्थशास्त्र

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” में समाज और प्रशासन से जुड़े कई नियमों का वर्णन मिलता है, जिसमें विवाह और तलाक से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।
• इसमें उल्लेख किया गया है कि यदि पति अपनी पत्नी को लंबे समय तक छोड़ देता है या उसका भरण-पोषण नहीं करता है, तो पत्नी को विवाह विच्छेद (तलाक) की अनुमति दी जा सकती है।
• साथ ही, यह भी कहा गया है कि यदि पति अक्षम, पागल, या अपराधी हो, तो पत्नी को पुनर्विवाह की छूट दी जा सकती है।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) कामसूत्र: यह मुख्य रूप से प्रेम, विवाह, और दांपत्य जीवन से जुड़ा ग्रंथ है, इसमें तलाक का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
• (b) मानवधर्मशास्त्र: यह विवाह को अटूट बंधन मानता है और इसमें तलाक की अनुमति नहीं दी गई है।
• (c) शुक्र नीतिसार: यह मुख्य रूप से राजनीति और शासन से संबंधित ग्रंथ है, जिसमें विवाह विच्छेद पर विशेष प्रावधान नहीं हैं।
इसलिए, “अर्थशास्त्र” ही वह ग्रंथ है जिसमें पत्नी को विवाह विच्छेद की अनुमति का उल्लेख मिलता है।

43. निम्नलिखित में से किसमें पुनर्विवाह वर्जित (Prohibits) है?

(a) जातक

(b) मनुस्मृति

(c) याज्ञवल्क्य

(d) अर्थशास्त्र

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
“मनुस्मृति” प्राचीन भारतीय धर्मशास्त्रों में से एक है, जो समाज, नैतिकता और कानून से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है। इसमें पुनर्विवाह को वर्जित (Prohibited) माना गया है, विशेषकर उच्च वर्णों की महिलाओं के लिए।
• विधवा स्त्रियों को पति के मृत्यु के बाद ब्रह्मचर्य का पालन करने और अपना जीवन धार्मिक कार्यों में समर्पित करने की सलाह दी गई है।
• कुछ परिस्थितियों में, निम्न वर्ण की महिलाओं को पुनर्विवाह की अनुमति थी, लेकिन इसे प्रोत्साहित नहीं किया गया।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• (a) जातक: यह बौद्ध ग्रंथ है, जिसमें पुनर्विवाह पर कोई कठोर नियम नहीं है।
• (c) याज्ञवल्क्य: इसमें कुछ विशेष परिस्थितियों में पुनर्विवाह की अनुमति दी गई है।
• (d) अर्थशास्त्र: इसमें स्त्रियों को कुछ परिस्थितियों में पुनर्विवाह की छूट दी गई है, जैसे यदि पति अनुपस्थित हो या उसकी मृत्यु हो जाए।
इसलिए, मनुस्मृति वह ग्रंथ है जो पुनर्विवाह को सख्ती से प्रतिबंधित करता है।

44. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे गयें कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1                                  सूची-I।

(A) महेन्द्र तथा संघमित्रा    1. श्रीलंका

(B) मज्झन्तिक                    2. महाराष्ट्र

(C) महाधर्मरक्षित                 3. कश्मीर तथा गंधार

(D) धर्मरक्षित                       4. अपरांतक

कूट :

ABCD

(a)1234

(b)4321

(c)3214

(d)1324

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
सूची-I (बौद्ध प्रचारक) सूची-II (गंतव्य स्थान)
(A) महेन्द्र तथा संघमित्रा – (1) श्रीलंका → अशोक के पुत्र और पुत्री बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका गए।
(B) मज्झन्तिक – (3) कश्मीर तथा गंधार → इन्होंने उत्तर-पश्चिम भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार किया।
(C) महाधर्मरक्षित – (2) महाराष्ट्र → महाराष्ट्र में बौद्ध धर्म के प्रसार में योगदान दिया।
(D) धर्मरक्षित – (4) अपरांतक (पश्चिमी भारत) → पश्चिमी भारत (गुजरात, महाराष्ट्र) में बौद्ध धर्म फैलाया।
इस प्रकार, सही क्रम (A-1, B-3, C-2, D-4) है, जो विकल्प (d) 1324 के अनुरूप है।

45. उपर्युक्त में से कौन-कौन से सुदर्शन झील से संबंद्ध हैं?

(1) बिम्बिसार

(3) अशोक

(2) चन्द्रगुप्त मौर्य

(4) रूद्रदामन

(a) 1 और 3

(c) 1,2,3 और 4

(b) 3 और 4

(d) 2, 3 और 4

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
सुदर्शन झील गुजरात के गिरनार क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन जलाशय थी, जिसका निर्माण और संरक्षण विभिन्न राजाओं द्वारा किया गया था।
1. चन्द्रगुप्त मौर्य (2) → उसके शासनकाल में सुदर्शन झील का निर्माण पुष्यगुप्त (गवर्नर) द्वारा किया गया था।
2. अशोक (3) → अशोक के काल में उसके अधिकारी तुषास्फ ने इस झील का विस्तार और मरम्मत करवाई।
3. रुद्रदामन (4) → शातवाहन युग में शक शासक रुद्रदामन ने इस झील की बिना किसी कर या शुल्क के पुनः मरम्मत करवाई।
अन्य विकल्पों पर चर्चा:
• बिम्बिसार (1) → सुदर्शन झील से संबंधित नहीं था, वह मौर्यकाल से पहले मगध का शासक था।
इसलिए, सही उत्तर (d) 2, 3 और 4 (चन्द्रगुप्त मौर्य, अशोक और रुद्रदामन) है।

46. निम्नलिखित व्यक्ति भारत में किसी न किसी समय आए-

1. फाह्यान

2. इत्सिंग

3. मेगस्थनीज

4. ह्वेनसांग

उनके आगमन का सही कालानुक्रम है-

(a) 3, 1, 2, 4

(b) 3, 1, 4, 2

(c) 1,3,2,4

(d) 1, 3, 4, 2

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
भारत में विभिन्न समय पर कई विदेशी यात्रियों ने भ्रमण किया और अपने यात्रा वृतांत लिखे। उनके आगमन का सही कालानुक्रम निम्नलिखित है:
1. मेगस्थनीज (3) → 302-298 ईसा पूर्व
o यह यूनानी राजदूत था, जिसे सेल्यूकस निकेटर ने चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था।
o इसने “इंडिका” नामक ग्रंथ लिखा, जिसमें मौर्यकालीन समाज और शासन का वर्णन है।
2. फाह्यान (1) → 405-411 ईस्वी
o यह एक चीनी बौद्ध भिक्षु था, जो गुप्त शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था।
o इसने “फो गुओ जी” (बौद्ध देशों की यात्रा) नामक ग्रंथ लिखा।
3. ह्वेनसांग (4) → 630-645 ईस्वी
o यह चीनी बौद्ध यात्री था, जो हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था।
o इसने “सी-यू-की” (भारत का यात्रा वृत्तांत) लिखा।
4. इत्सिंग (2) → 671-695 ईस्वी
o यह भी एक चीनी बौद्ध भिक्षु था, जो भारत में नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने आया था।
o इसने “नमस्तंभ सूत्र” और अन्य ग्रंथ लिखे।
कालानुक्रमिक क्रम: मेगस्थनीज → फाह्यान → ह्वेनसांग → इत्सिंग इसलिए, सही उत्तर (b) 3, 1, 4, 2 है।

47. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-

सूची-I                    सूची-II

A. चंद्रगुप्त            1. पियदसि

B. बिंदुसार             2. सैंड्रोकोट्टस

C. अशोक               3. अमित्रघात        

D. चाणक्य            4. विष्णुगुप्त

कूट :

ABCD

(a)2341

(b)1324

(b)2314

(b)4312

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
प्राचीन भारतीय इतिहास में निम्नलिखित शासकों और विद्वानों को उनके अन्य नामों से जाना जाता था:
1. चंद्रगुप्त (A) → “सैंड्रोकोट्टस” (2)
o यूनानी लेखकों (विशेष रूप से मेगस्थनीज) ने चन्द्रगुप्त मौर्य को “सैंड्रोकोट्टस” कहा है।
2. बिंदुसार (B) → “अमित्रघात” (3)
o बिन्दुसार को “अमित्रघात” (शत्रुओं का संहार करने वाला) के नाम से जाना जाता था।
3. अशोक (C) → “पियदसि” (1)
o अशोक को उसके अभिलेखों में “देवानांप्रिय पियदसि” (देवताओं का प्रिय) कहा गया है।
4. चाणक्य (D) → “विष्णुगुप्त” (4)
o चाणक्य को अन्य नामों से भी जाना जाता था, जैसे “कौटिल्य” और “विष्णुगुप्त”।
कूट:
A → 2, B → 3, C → 1, D → 4 इसलिए, सही उत्तर (a) 2341 है।

48. अंतिम मौर्य सम्राट था ?

(a) जालौक

(b) अवंति वर्मा

(c) नंदी वर्धन

(d) बृहद्रथ

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
• बृहद्रथ मौर्य वंश का अंतिम शासक था।
• इसकी हत्या इसके ही सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी थी, जिसने शुंग वंश की स्थापना की।
• इस प्रकार, मौर्य साम्राज्य का अंत 185 ईसा पूर्व में हुआ।

49. ईस्वी सन के पूर्व की कुछ शताब्दियों में निम्नलिखित में से किन शासकों ने गिरनार क्षेत्र में जल संसाधन व्यवस्था की ओर ध्यान दिया ?

1. महापद्मनंद

2. चंद्रगुप्त मौर्य

3. अशोक

4. रुद्रदामन

नीचे के कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए –

(a) 1, 2

(b) 2, 3

(c) 3, 4

(d) 2, 3, 4

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
• गिरनार (गुजरात) में जल संसाधन प्रणाली का विकास विभिन्न शासकों ने किया था।
1. चंद्रगुप्त मौर्य (2) – उसके शासनकाल में गिरनार क्षेत्र में जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित हुई।
2. अशोक (3) – उसने गिरनार में सुदर्शन झील के निर्माण को आगे बढ़ाया।
3. रुद्रदामन (4) – उसने अशोक द्वारा निर्मित सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण करवाया, जिसका उल्लेख उसके जूनागढ़ अभिलेख में मिलता है।
इसलिए, सही उत्तर (d) 2, 3, 4 है।

50. निम्नलिखित में से किस अभिलेख में चंद्रगुप्त और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है?

(a) गौतमीपुत्र सातकर्णि की नासिक प्रशस्ति

(b) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख

(c) अशोक का गिरनार अभिलेख

(d) स्कंदगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
• रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख (150 ईस्वी) में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है।
• इस अभिलेख में बताया गया है कि चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में सुदर्शन झील का निर्माण हुआ था।
• बाद में, अशोक ने इस झील की मरम्मत करवाई।
• फिर शक शासक रुद्रदामन ने इसे दोबारा ठीक करवाया और अपने अभिलेख में इसका वर्णन किया।
इसलिए, सही उत्तर (b) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है।

51. निम्नलिखित में से किस अभिलेख में चंद्रगुप्त और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है?

(a) गौतमीपुत्र सातकर्णि की नासिक प्रशस्ति

(b) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख

(c) अशोक का गिरनार अभिलेख

(d) स्कंदगुप्त का जूनागढ़ अभिलेख

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
• रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख (150 ईस्वी) में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक दोनों का उल्लेख किया गया है।
• इसमें बताया गया है कि चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में सुदर्शन झील का निर्माण हुआ था।
• बाद में, अशोक ने इस झील की मरम्मत करवाई।
• फिर शक शासक रुद्रदामन ने इसे दोबारा ठीक करवाया और अपने अभिलेख में इसका वर्णन किया।
इसलिए, सही उत्तर (b) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है।

52. निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें अशोक का अभिलेख भी पाया गया है?

(a) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख

(b) गौतमीपुत्र सातकर्णी से संबंधित नासिक प्रशस्ति

(c) खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख

(d) उपरोक्त में से किसी में नहीं

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
• जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेख में अशोक, चंद्रगुप्त मौर्य और रुद्रदामन तीनों का उल्लेख है।
• अशोक ने अपने शिलालेखों को गिरनार पहाड़ी (जूनागढ़) पर अंकित कराया था।
• रुद्रदामन (150 ईस्वी) के अभिलेख में भी अशोक के कार्यों का उल्लेख मिलता है, विशेष रूप से सुदर्शन झील की मरम्मत से संबंधित।
• इस स्थान पर स्कंदगुप्त का अभिलेख भी मिला है।
इसलिए, सही उत्तर (a) महाक्षत्रप रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है।

53. निम्नलिखित किन मौर्य स्तंभों के ऊपर सिंह शीर्ष थे-

(1) कोलुहा स्तंभ

(2) लौरिया नंदगढ़ स्तंभ

(3) सांची स्तंभ

(4) सारनाथ स्तंभ

कूटः

(a) 1,2 और 4

(b) 1,2 और 3

(c) 3 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
• मौर्यकालीन स्तंभों के शीर्ष भाग में आमतौर पर सिंह, हाथी, बैल, और घोड़े जैसी आकृतियाँ बनी होती थीं।
• अशोक द्वारा स्थापित प्रमुख सिंह-शीर्ष स्तंभ:
1. कोलुहा स्तंभ (वैशाली, बिहार) – इस पर सिंह शीर्ष बना था।
2. लौरिया नंदगढ़ स्तंभ (बिहार) – यह भी सिंह शीर्ष वाला स्तंभ था।
3. सांची स्तंभ (मध्य प्रदेश) – इस पर भी सिंह शीर्ष अंकित था।
4. सारनाथ स्तंभ (उत्तर प्रदेश) – यह सबसे प्रसिद्ध सिंह शीर्ष स्तंभ है, जो भारत का राष्ट्रीय प्रतीक भी बना।
इसलिए, सभी स्तंभों पर सिंह शीर्ष था, और सही उत्तर (d) 1, 2, 3 और 4 है।

54. बराबर पहाड़ी की गुफाओं के विषय में निम्न में से कौन एक सही नहीं है?

(a) बराबर पहाड़ी पर कुल चार गुफाएं हैं।

(b) तीन गुफाओं की दीवार पर अशोक के अभिलेख उत्कीर्ण हैं।

(c) ये अभिलेख इन गुफाओं को आजीविकाओं को समर्पित होने का उल्लेख करते हैं।

(d) ये अभिलेख ईसा पूर्व छठीं शताब्दी के हैं।

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
• बराबर पहाड़ियों की गुफाएं (बिहार के गया जिले में स्थित) मौर्यकाल की सबसे पुरानी रॉक-कट गुफाएं मानी जाती हैं।
• बराबर पहाड़ी पर चार प्रमुख गुफाएं हैं—सुदामा गुफा, विश्व झोपड़ी गुफा, कर्ण चौपर गुफा, और लोमश ऋषि गुफा।
• तीन गुफाओं (सुदामा, विश्व झोपड़ी और कर्ण चौपर) की दीवारों पर अशोक के अभिलेख खुदे हुए हैं।
• ये अभिलेख अजीविक संप्रदाय को इन गुफाओं को समर्पित करने की जानकारी देते हैं।
• लेकिन अभिलेख ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी के नहीं, बल्कि मौर्यकालीन (ईसा पूर्व 3री शताब्दी, अशोक के समय) हैं।
इसलिए, कथन (d) गलत है।

55. प्रथम भारतीय साम्राज्य स्थापित किया गया था-

(a) कनिष्क द्वारा

(b) हर्ष द्वारा

(c) चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा

(d) समुद्रगुप्त द्वारा

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
• चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य वंश की स्थापना की और यह भारत का प्रथम सम्राट-शासित साम्राज्य था।
• उन्होंने नंद वंश को पराजित कर मगध (पटना) में 321 ईसा पूर्व मौर्य साम्राज्य की नींव रखी।
• उनके शासनकाल में साम्राज्य का विस्तार उत्तर-पश्चिमी भारत से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तक हुआ।
• उनके प्रमुख सलाहकार कौटिल्य (चाणक्य) थे, जिन्होंने “अर्थशास्त्र” नामक ग्रंथ की रचना की।
• मेगस्थनीज, जो सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था, ने अपनी पुस्तक “इंडिका” में मौर्यकालीन प्रशासन का वर्णन किया।
इसलिए, चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित मौर्य साम्राज्य ही भारत का प्रथम साम्राज्य माना जाता है।

57.निम्नलिखित में कौन-सा सबसे पुराना राजवंश है?

(a) गुप्त

(b) मौर्य

(c) वर्धन

(d) कुषाण

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
• मौर्य वंश (321-185 ईसा पूर्व) सबसे पुराना राजवंश है, जिसका संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य था।
• यह वंश नंद वंश को पराजित कर स्थापित हुआ और भारत का प्रथम विशाल साम्राज्य बना।
• प्रमुख शासक चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार और अशोक थे।
• अशोक का शासन (268-232 ईसा पूर्व) इस वंश का स्वर्ण काल था, जिसमें उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार किया।
अन्य विकल्पों की तुलना:
• गुप्त वंश (लगभग 319-550 ईस्वी) – चंद्रगुप्त प्रथम द्वारा स्थापित, इसे “स्वर्ण युग” कहा जाता है।
• वर्धन वंश (7वीं शताब्दी) – हर्षवर्धन ने इसकी स्थापना की।
• कुषाण वंश (1-3 शताब्दी ईस्वी) – प्रमुख शासक कनिष्क था।
👉 इसलिए, मौर्य वंश सबसे पुराना राजवंश है।

58. जिसके ग्रंथ में चंद्रगुप्त मौर्य का विशिष्ट रूप से वर्णन हुआ है, वह है-

(a) भास

(b) शूद्रक

(c) विशाखदत्त

(d) अश्वघोष

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
• विशाखदत्त द्वारा रचित “मुद्राराक्षस” नाटक में चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य का विस्तृत वर्णन मिलता है।
• इस ग्रंथ में चंद्रगुप्त मौर्य के सत्ता में आने, नंद वंश के विनाश और चाणक्य की कूटनीति को दर्शाया गया है।
• यह नाटक संस्कृत भाषा में लिखा गया था।
अन्य विकल्पों की तुलना:
• भास – प्राचीन संस्कृत नाटककार, लेकिन चंद्रगुप्त मौर्य का वर्णन नहीं किया।
• शूद्रक – “मृच्छकटिकम्” के रचयिता, परंतु चंद्रगुप्त मौर्य से संबंधित नहीं।
• अश्वघोष – प्रसिद्ध बौद्ध कवि, “बुद्धचरित” के रचयिता, जिन्होंने गौतम बुद्ध के जीवन का वर्णन किया।
👉 अतः, चंद्रगुप्त मौर्य का विशेष वर्णन विशाखदत्त के “मुद्राराक्षस” में मिलता है।

59.यूनानी लेखक जस्टिन द्वारा किसे ‘सैंड्रोकोटस’ कहा गया था?

(a) चंद्रगुप्त मौर्य

(b) चंद्रगुप्त प्रथम

(c) चंद्रगुप्त द्वितीय

(d) समुद्रगुप्त

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
• यूनानी लेखक जस्टिन ने चंद्रगुप्त मौर्य को “सैंड्रोकोटस” कहा है।
• यह नाम यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज द्वारा प्रयुक्त “संद्रोकोट्टस” (Sandrokottos) का एक रूपांतर है।
• जस्टिन ने अपने लेखन में चंद्रगुप्त मौर्य के उदय, नंद वंश के पतन, सिकंदर के भारत अभियान के प्रभाव और मौर्य साम्राज्य की स्थापना का उल्लेख किया है।
अन्य विकल्पों की तुलना:
• चंद्रगुप्त प्रथम – गुप्त वंश का शासक, मौर्य साम्राज्य से कोई संबंध नहीं।
• चंद्रगुप्त द्वितीय – गुप्त वंश का शासक, जिन्हें विक्रमादित्य कहा जाता था।
• समुद्रगुप्त – गुप्त वंश के महान योद्धा और प्रशासक, लेकिन “सैंड्रोकोटस” नाम से कोई संबंध नहीं।
👉 अतः, ‘सैंड्रोकोटस’ यूनानी स्रोतों में चंद्रगुप्त मौर्य के लिए प्रयुक्त नाम था।

60.सैंड्रोकोट्स से चंद्रगुप्त मौर्य की पहचान किसने की?

(a) विलियम जोंस

(b) वी. स्मिथ

(c) आर. के. मुखर्जी

(d) डी. आर. भंडारकर

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
• विलियम जोंस (William Jones) ने सर्वप्रथम यूनानी लेखक जस्टिन और मेगस्थनीज द्वारा उल्लेखित “सैंड्रोकोटस” को चंद्रगुप्त मौर्य से जोड़ा।
• यह खोज 18वीं शताब्दी में हुई थी और इसने प्राचीन भारतीय और यूनानी इतिहास को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
• इससे भारत के प्राचीन इतिहास के कालक्रम (Chronology) को निश्चित करने में सहायता मिली।
अन्य विकल्पों की तुलना:
• वी. स्मिथ – ब्रिटिश इतिहासकार, जिन्होंने “Early History of India” लिखी, लेकिन यह पहचान उन्होंने नहीं की।
• आर. के. मुखर्जी – भारतीय इतिहासकार, जिन्होंने मौर्य और गुप्त काल पर कार्य किया, लेकिन यह खोज उनकी नहीं थी।
• डी. आर. भंडारकर – भारतीय पुरातत्त्वविद् और इतिहासकार, लेकिन “सैंड्रोकोटस = चंद्रगुप्त मौर्य” की पहचान उनसे पहले ही हो चुकी थी।
👉 अतः, “सैंड्रोकोटस” को “चंद्रगुप्त मौर्य” से जोड़ने का श्रेय विलियम जोंस को जाता है।

61. निम्न में से किसने ‘सैंड्रोकोट्स’ (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है?

(a) प्लिनी

(b) जस्टिन

(c) स्ट्रैबो

(d) मेगास्थनीज

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
• यूनानी इतिहासकार जस्टिन ने अपने ग्रंथ “Epitome of the Philippic History of Pompeius Trogus” में सैंड्रोकोटस (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख किया है।
• जस्टिन ने लिखा कि सिकंदर के भारत छोड़ने के बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने सत्ता प्राप्त करने की योजना बनाई और नंद वंश का अंत किया।
• यह भी उल्लेख मिलता है कि चंद्रगुप्त ने यूनानियों के खिलाफ विद्रोह किया था।
अन्य विकल्पों की तुलना:
• प्लिनी – प्राकृतिक इतिहास (Natural History) पर कार्य किया, लेकिन इस भेंट का उल्लेख नहीं किया।
• स्ट्रैबो – यूनानी भूगोलवेत्ता थे, जिन्होंने भारत के बारे में लिखा, लेकिन सिकंदर और चंद्रगुप्त की भेंट पर विशेष चर्चा नहीं की।
• मेगस्थनीज – वह चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में राजदूत थे, लेकिन सिकंदर और चंद्रगुप्त की भेंट का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया।
👉 अतः, “सैंड्रोकोटस” (चंद्रगुप्त मौर्य) और सिकंदर महान की भेंट का उल्लेख “जस्टिन” ने किया है।

62.कौटिल्य प्रधानमंत्री थे-

(a) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के

(b) अशोक के

(c) चंद्रगुप्त मौर्य के

(d) राजा जनक के

उत्‍तर : (c) :    कौटिल्य (चाणक्य) चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने नंद वंश के पतन और मौर्य वंश की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका प्रसिद्ध ग्रंथ “अर्थशास्त्र” राज्य प्रशासन और राजनीति का महत्वपूर्ण स्रोत है।

63. चाणक्य का अन्य नाम था-

(a) भट्टस्वामी

(b) विष्णुगुप्त

(c) राजशेखर

(d) विशाखदत्त

उत्‍तर : (b) :    चाणक्य को “कौटिल्य” और “विष्णुगुप्त” नाम से भी जाना जाता है। वे चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे और उनके ग्रंथ “अर्थशास्त्र” में राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन का उल्लेख मिलता है।

64. निम्नलिखित में से राज्य के सप्तांग सिद्धांत के अनुसार, राज्य का सातवां अंग कौन-सा था?

(a) जनपद

(b) दुर्ग

(c) मित्र

(d) कोश

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत के अनुसार, राज्य के सात अंग होते हैं:
1. स्वामी (राजा)
2. अमात्य (मंत्री)
3. जनपद (प्रजा एवं क्षेत्र)
4. दुर्ग (किला एवं रक्षा प्रणाली)
5. कोश (राजकोष/धन)
6. दंड (सेना/कानून व्यवस्था)
7. मित्र (मित्र राष्ट्र/सहयोगी शासक)
मित्र राज्य का सातवां अंग था, जो मित्र राष्ट्रों और राजनयिक संबंधों को दर्शाता था।

65. कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में किस पहलू पर प्रकाश डाला गया है?

(a) आर्थिक जीवन

(b) राजनीतिक नीतियां

(c) धार्मिक जीवन

(d) सामाजिक जीवन

उत्‍तर : (b) :    कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” में मुख्य रूप से राजनीतिक नीतियों, प्रशासन, युद्धनीति, कर प्रणाली और राजस्व संग्रह पर प्रकाश डाला गया है। इसमें राज्य संचालन, कूटनीति, जासूसी प्रणाली और शासक के कर्तव्यों का विस्तृत वर्णन किया गया है।

66. निम्नांकित में से किसकी तुलना मैक्यावेली के ‘प्रिंस’ से की जा सकती है?

(a) कालिदास का ‘मालविकाग्निमित्रम’

(b) कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’

(c) वात्स्यायन का ‘कामसूत्र’

(d) तिरुवल्लुवर का ‘तिरुक्कुरल’

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
कौटिल्य का “अर्थशास्त्र” और मैक्यावेली का “प्रिंस” दोनों ही राजनीति, कूटनीति और शासन कला पर केंद्रित ग्रंथ हैं। दोनों में ही व्यावहारिक राजनीति, शक्ति संतुलन, प्रशासनिक नीतियां और शासक के कर्तव्य पर चर्चा की गई है। इसलिए, इन्हें एक-दूसरे के समकक्ष माना जाता है।

67. किसके शासनकाल में डीमेकस भारत आया था?

(a) चंद्रगुप्त मौर्य

(b) बिंदुसार

(c) अशोक

(d) कनिष्क

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
डीमेकस एक ग्रीक राजदूत था, जिसे सीरिया के शासक एंटीऑकस प्रथम (Antiochus I) ने बिंदुसार के दरबार में भेजा था। वह मेगस्थनीज के बाद भारत आने वाला दूसरा यूनानी राजदूत था।

68. पाटलिपुत्र में स्थित चंद्रगुप्त का महल मुख्यतः बना था –

(a) ईंटों का

(b) पत्थर का

(c) लकड़ी का

(d) मिट्टीं का

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) में स्थित चंद्रगुप्त मौर्य का महल मुख्यतः लकड़ी से बना था। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपने विवरण में इस महल की भव्यता और लकड़ी के उपयोग का उल्लेख किया है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– मौर्यकालीन स्थापत्य में लकड़ी प्रमुख निर्माण सामग्री थी
– मेगास्थनीज ने इस महल को “काष्ठ निर्मित भव्य प्रासाद” बताया था
– मौर्य काल में ईंटों का भी प्रयोग होता था, किंतु राजप्रासाद के लिए लकड़ी को प्राथमिकता दी जाती थी
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. मेगास्थनीज किस शासक के दरबार में आया था? → चंद्रगुप्त मौर्य
2. अशोक के स्तंभ किस पत्थर से निर्मित हैं? → चुनार के बलुआ पत्थर (प्रसिद्ध मौर्यकालीन पॉलिश युक्त)
3. मौर्यकालीन स्थापत्य में किस धातु का प्रयोग हुआ? → लोहा (दिल्ली का लौह स्तंभ इसका उदाहरण है)
4. पाटलिपुत्र नगर की योजना किसने बनाई थी? → चाणक्य (कौटिल्य) द्वारा
5. मौर्य साम्राज्य की राजधानी कहाँ थी? → पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना)

69.किस प्राचीन नगर के अवशेष कुम्रहार स्थल से प्राप्त हुए हैं?

(a) वैशाली

(b) पाटलिपुत्र

(c) कपिलवस्तु

(d) श्रावस्ती

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
कुम्रहार (पटना, बिहार) से प्राप्त पुरातात्विक अवशेष प्राचीन नगर पाटलिपुत्र के हैं। यहाँ मौर्यकालीन स्तंभ, लकड़ी के भवनों के अवशेष और अन्य महत्वपूर्ण निर्माण सामग्री मिली है, जो इस नगर की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
• कुम्रहार से 80-स्तंभों वाला सभागार प्राप्त हुआ है
• यह स्थल मौर्यकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है
• यहाँ से प्राप्त अवशेषों से पाटलिपुत्र की भव्यता का पता चलता है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. मेगास्थनीज किस शासक के दरबार में आया था? → चंद्रगुप्त मौर्य
2. अशोक के स्तंभ किस पत्थर से निर्मित हैं? → चुनार के बलुआ पत्थर
3. पाटलिपुत्र की स्थापना किसने की थी? → अजातशत्रु

70. बुलंदीबाग प्राचीन स्थान था-

(a) कपिलवस्तु का

(b) पाटलिपुत्र का

(c) श्रावस्ती का

(d) वाराणसी

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
बुलंदीबाग (पटना, बिहार) पाटलिपुत्र के प्राचीन अवशेषों वाला एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यहाँ से मौर्यकालीन लकड़ी की दीवारों, नालियों और अन्य संरचनाओं के अवशेष मिले हैं, जो पाटलिपुत्र की उन्नत नगर योजना को दर्शाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– बुलंदीबाग से लकड़ी की प्राचीर (दीवार) के अवशेष प्राप्त हुए हैं
– यहाँ नालियों की व्यवस्था मिली है, जो नगर की जल निकासी प्रणाली को दर्शाती है
– इस स्थल से मौर्यकाल से लेकर गुप्तकाल तक के अवशेष मिले हैं
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. बुलंदीबाग किस नदी के किनारे स्थित है? → गंगा नदी
2. पाटलिपुत्र की खुदाई किन-किन स्थानों पर हुई? → कुम्रहार, बुलंदीबाग, अगमकुआं
3. मौर्यकालीन लकड़ी की दीवार कहाँ मिली? → बुलंदीबाग

71. मालवा, गुजरात एवं महाराष्ट्र किस शासक ने पहली बार जीता?

(a) हर्ष

(b) स्कंदगुप्त

(c) विक्रमादित्य

(d) चंद्रगुप्त मौर्य

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
चंद्रगुप्त मौर्य (322-298 ईसा पूर्व) ने पहली बार मालवा, गुजरात एवं महाराष्ट्र क्षेत्रों को अपने साम्राज्य में शामिल किया। उनके साम्राज्य विस्तार में उनके गुरु चाणक्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस को हराकर गुजरात क्षेत्र प्राप्त किया
– जूनागढ़ अभिलेख में चंद्रगुप्त के राज्यपाल पुष्यगुप्त का उल्लेख मिलता है
– मौर्य साम्राज्य दक्षिण में कर्नाटक तक फैला था
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. चंद्रगुप्त मौर्य का गुरु कौन था? → चाणक्य (कौटिल्य)
2. सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त को क्या दिया? → 500 हाथी (मैगास्थनीज के अनुसार)
3. मौर्य साम्राज्य की दक्षिणी सीमा कहाँ तक थी? → कर्नाटक (सोपारा तक)

72. गुजरात चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य में सम्मिलित था, यह प्रमाणित होता है –

(a) ग्रीक विवरणों से

(b) रुद्रदामन के जूनागढ़ शिला अभिलेख से

(c) जैन परंपरा से

(d) अशोक के स्तंभलेख II से

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
रुद्रदामन के जूनागढ़ शिला अभिलेख से पता चलता है कि गुजरात चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य का हिस्सा था। इस अभिलेख में चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त द्वारा सुदर्शन झील के निर्माण का उल्लेख मिलता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा में लिखा गया है
– यह अभिलेख मौर्य काल से लेकर गुप्त काल तक का इतिहास बताता है
– पुष्यगुप्त चंद्रगुप्त मौर्य के समय में गुजरात के शासक थे
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. जूनागढ़ अभिलेख किस शासक से संबंधित है? – रुद्रदामन
2. सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण किसने करवाया था? – रुद्रदामन और स्कंदगुप्त
3. चंद्रगुप्त मौर्य के गुजरात अभियान का ग्रीक साक्ष्य क्या है? – सेल्यूकस निकेटर के साथ संधि

73. चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को किस वर्ष में पराजित किया था?

(a) 317 ई.पू.

(b) 315 ई.पू.

(c) 305 ई.पू.

(d) 300 ई.पू.

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
चंद्रगुप्त मौर्य ने 305 ईसा पूर्व में सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया था। इस युद्ध के बाद दोनों के बीच एक संधि हुई, जिसके तहत:
– सेल्यूकस ने अपनी पुत्री हेलन का विवाह चंद्रगुप्त से किया
– चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी दिए
– सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त को पारस, अराकोसिया, जेड्रोसिया और गेड्रोसिया के प्रदेश दिए
महत्वपूर्ण तथ्य:
– यह संधि मैगास्थनीज के विवरणों से पुष्ट होती है
– इस युद्ध के बाद मौर्य साम्राज्य पश्चिम में ईरान तक फैल गया
– सेल्यूकस ने अपने दूत मैगास्थनीज को चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. मैगास्थनीज किसका दूत था? – सेल्यूकस निकेटर का
2. चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस को क्या दिया? – 500 हाथी
3. इस संधि के बाद कौन-सा यूनानी दूत भारत आया? – डायमेकस (बिंदुसार के समय में)

74. निम्नलिखित मौर्य शासक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे-

1. चंद्रगुप्त

2. अशोक

3. बिंदुसार

4. दशरथ

सही उत्तर चुनिए-

(a) 1 एवं 2

(b) 2 एवं 3

(c) 3 एवं 4

(d) 2 एवं 4

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
मौर्य शासकों में से अशोक और दशरथ बौद्ध धर्म के अनुयायी थे, जबकि चंद्रगुप्त और बिंदुसार जैन धर्म/अन्य परंपराओं से जुड़े थे।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया
– दशरथ (अशोक के पौत्र) ने बौद्ध गुफाओं का निर्माण करवाया
– चंद्रगुप्त ने अंत में जैन मुनि भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला में सल्लेखना ली
– बिंदुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक ने किस युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया? → कलिंग युद्ध (261 ई.पू.)
2. दशरथ ने कहाँ गुफाएँ बनवाईं? → नागार्जुनि पहाड़ियाँ
3. चंद्रगुप्त ने अंतिम समय कहाँ बिताया? → श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)
4. बिंदुसार किस विचारधारा का था? → आजीवक सम्प्रदाय

75. अशोक के शासनकाल में बौद्ध सभा किस नगर में आयोजित की गई थी?

(a) मगध

(b) पाटलिपुत्र

(c) समस्तीपुर

(d) राजगृह

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
अशोक के शासनकाल में तीसरी बौद्ध संगीति (251 ईसा पूर्व) का आयोजन पाटलिपुत्र नगर में किया गया था। इस संगीति की अध्यक्षता बौद्ध भिक्षु मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की थी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– इस संगीति में बौद्ध धर्म के अभिधम्म पिटक को अंतिम रूप दिया गया
– अशोक ने इसी संगीति के बाद विदेशों में बौद्ध धर्म प्रचार हेतु प्रचारक भेजे
– यह संगीति बौद्ध धर्म के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. तीसरी बौद्ध संगीति किस शासक के काल में हुई? – अशोक
2. इस संगीति की अध्यक्षता किसने की? – मोग्गलिपुत्त तिस्स
3. अशोक ने श्रीलंका में किन्हें बौद्ध धर्म प्रचार हेतु भेजा? – महेंद्र और संघमित्रा

76.निम्नलिखित में से किस स्रोत में अशोक के राज्यकाल में तृतीय बौद्ध समिति होने का उल्लेख मिलता है?

(1) अशोक के अभिलेख

(2) दीपवंश

(3) महावंश

(4) दिव्यावदान

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए-

(a) 1,2

(b) 2,3

(c) 3,4

(d) 1,4

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
अशोक के काल में हुई तीसरी बौद्ध संगीति का उल्लेख मुख्य रूप से दो बौद्ध ग्रंथों में मिलता है:
1. दीपवंश – श्रीलंका का प्राचीन बौद्ध इतिहास ग्रंथ
2. महावंश – श्रीलंका का एक अन्य महत्वपूर्ण बौद्ध इतिहास ग्रंथ
महत्वपूर्ण जानकारी:
– ये दोनों ग्रंथ पालि भाषा में लिखे गए हैं
– इनमें अशोक के बौद्ध धर्म संबंधी कार्यों का विवरण है
– अशोक के अपने शिलालेखों में इस संगीति का सीधा उल्लेख नहीं है
संबंधित प्रश्न:
1. तीसरी बौद्ध संगीति कहाँ आयोजित हुई थी? – पाटलिपुत्र
2. इस संगीति का संचालन किसने किया? – मोग्गलिपुत्त तिस्स
3. ये ग्रंथ किस भाषा में हैं? – पालि

77. “अशोक ने बौद्ध होते हुए भी हिंदू धर्म में आस्था नहीं छोड़ी” इसका प्रमाण है-

(a) तीर्थयात्रा

(b) मोक्ष में विश्वास

(c) ‘देवनामप्रिय’ की उपाधि

(d) पशु चिकित्सालय खोले

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
अशोक ने अपने शिलालेखों में ‘देवानांप्रिय’ (देवताओं का प्रिय) तथा ‘प्रियदर्शी’ जैसी उपाधियाँ धारण की थीं, जो उसकी हिंदू धर्म के प्रति आस्था को दर्शाती हैं। यह स्पष्ट करता है कि वह बौद्ध धर्म अपनाने के बाद भी हिंदू परंपराओं से जुड़ा रहा।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक के अभिलेखों में इंद्र, अग्नि आदि देवताओं का उल्लेख मिलता है
– उसने ब्राह्मणों और श्रमणों दोनों को दान दिया
– रुम्मिनदेई स्तंभलेख में वह स्वयं को ‘बुद्धशाक्य’ कहलवाता है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक की मुख्य उपाधि क्या थी? → देवानांप्रिय
2. अशोक ने किन दो धार्मिक समुदायों को दान दिया? → ब्राह्मणों और श्रमणों को
3. रुम्मिनदेई अभिलेख किससे संबंधित है? → बुद्ध के जन्मस्थान लुम्बिनी से

78. अशोक के निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें दक्षिण भारतीय राज्यो का उल्लेख हुआ है?

(a) तृतीय मुख्य शिलालेख

(b) द्वितीय मुख्य शिलालेख

(c) नवां मुख्य शिलालेख

(d) प्रथम स्तंभ अभिलेख

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
अशोक के तृतीय मुख्य शिलालेख में दक्षिण भारत के राज्यों चोल, पांड्य, सतियपुत्र और केरलपुत्र का उल्लेख मिलता है। यह अभिलेख उसके साम्राज्य के विस्तार और पड़ोसी राज्यों के साथ संबंधों को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– यह अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है
– इसमें अशोक ने धम्म विजय की बात कही है
– यह अभिलेख भारत के 8 अलग-अलग स्थानों पर पाया गया है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक के किस अभिलेख में श्रीलंका का उल्लेख है? → किसी भी अभिलेख में नहीं
2. तृतीय शिलालेख किन भाषाओं में मिलता है? → ब्राह्मी और अरामाईक
3. चोल और पांड्य राज्य किस क्षेत्र में थे? → तमिलनाडु

79. निम्न में से कौन-सा क्षेत्र अशोक के साम्राज्य में सम्मिलित नहीं था

(a) अफगानिस्तान

(b) बिहार

(c) श्रीलंका

(d) कलिंग

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
अशोक के विशाल साम्राज्य में अफगानिस्तान, बिहार और कलिंग (261 ई.पू. में विजित) शामिल थे, परंतु श्रीलंका कभी भी उसके साम्राज्य का हिस्सा नहीं रहा। अशोक ने श्रीलंका में केवल बौद्ध धर्म का प्रचार किया था।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक ने महेंद्र और संघमित्रा को श्रीलंका भेजा था
– देवानाम्पिय तिस्स (श्रीलंका के राजा) ने बौद्ध धर्म अपनाया
– श्रीलंका के महावंश ग्रंथ में इसका विवरण मिलता है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक ने श्रीलंका में किसे धर्मप्रचार हेतु भेजा? → महेंद्र और संघमित्रा
2. कलिंग युद्ध कब हुआ था? → 261 ई.पू.
3. अशोक के साम्राज्य की पश्चिमी सीमा कहाँ तक थी? → अफगानिस्तान (कंधार तक)

80. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए –

सूची-I (स्थान)       सूची-II (स्मारक/भग्नावशेष)

A. कौशाम्बी           1. धमेख स्तूप

B. कुशीनगर          2. घोषिताराम मठ

C. सारनाथ            3. रानाभर स्तूप

D. श्रावस्ती            4. सहेत-महेत

कूट :

ABCD

(a)2134

(b)4321

(c)2311

(d)4342

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
| स्थान | स्मारक/भग्नावशेष |
|————-|—————————|
| A. कौशाम्बी | 2. घोषिताराम मठ |
| B. कुशीनगर | 3. रानाभर स्तूप |
C. सारनाथ | 1. धमेख स्तूप |
D. श्रावस्ती | 4. सहेत-महेत |
महत्वपूर्ण तथ्य:
– धमेख स्तूप (सारनाथ) वह स्थान है जहाँ बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया
– रानाभर स्तूप (कुशीनगर) बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल के निकट स्थित है
– सहेत-महेत (श्रावस्ती) में बुद्ध ने 24 वर्षावास बिताए
– घोषिताराम मठ (कौशाम्बी) बौद्ध भिक्षुणियों का प्रमुख केंद्र था
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. बुद्ध ने प्रथम उपदेश कहाँ दिया? → सारनाथ (धमेख स्तूप)
2. बुद्ध का महापरिनिर्वाण कहाँ हुआ? → कुशीनगर
3. श्रावस्ती का प्राचीन नाम क्या है? → सावत्थी (पालि भाषा में)
4. घोषिताराम मठ किससे संबंधित है? → बौद्ध भिक्षुणी संघ से

82. तीर्थयात्रा के समय सम्राट अशोक निम्नलिखित स्थानों पर गए। उन्होंने किस मार्ग का अनुगमन किया?

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-

1. गया

2. कपिलवस्तु

3. कुशीनगर

4. लुंबिनी

5. सारनाथ

6. श्रावस्ती

कूट :

(a) 1, 2, 3, 4, 5 तथा 6

(b) 1, 3, 4, 2, 5 तथा 6

(c) 4, 5, 6, 3, 2 तथा 1

(d) 4, 2, 1, 5, 6 तथा 3

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
अशोक ने अपनी तीर्थयात्रा के दौरान निम्नलिखित मार्ग का अनुसरण किया:
1. लुम्बिनी (बुद्ध का जन्मस्थान)
2. कपिलवस्तु (बुद्ध का बचपन बिताने का स्थान) 3. गया (बोधगया – ज्ञान प्राप्ति का स्थान)
4. सारनाथ (प्रथम उपदेश का स्थान)
5. श्रावस्ती (जेतवन विहार – बुद्ध का लंबे समय तक निवास)
6. कुशीनगर (महापरिनिर्वाण का स्थान)
महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक ने 249 ई.पू. में यह तीर्थयात्रा की थी
– उसने प्रत्येक स्थान पर स्तूपों और स्मारकों का निर्माण करवाया
– रुम्मिनदेई स्तंभलेख में लुम्बिनी यात्रा का उल्लेख मिलता है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक ने लुम्बिनी में क्या बनवाया? → स्तंभ
2. बुद्ध को ज्ञान कहाँ प्राप्त हुआ? → बोधगया
3. जेतवन विहार कहाँ स्थित है? → श्रावस्ती
4. अशोक की तीर्थयात्रा का उल्लेख किस अभिलेख में है? → रुम्मिनदेई स्तंभलेख

83. निम्नांकित में से कौन-सा अशोक कालीन अभिलेख ‘खरोष्ठी’ लिपि में है?

(a) कालसी

(b) गिरनार

(c) शाहबाजगढ़ी

(d) मेरठ

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
अशोक के शाहबाजगढ़ी (वर्तमान पाकिस्तान) और मानसेहरा अभिलेख खरोष्ठी लिपि में लिखे गए हैं। यह लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी और मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी भारत (गांधार क्षेत्र) में प्रयुक्त होती थी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– खरोष्ठी लिपि अरामाईक लिपि से विकसित हुई
– यह अशोक के 14 शिलालेखों में प्रयुक्त हुई
– अन्य अभिलेख (जैसे कालसी, गिरनार, मेरठ) ब्राह्मी लिपि में हैं
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. खरोष्ठी लिपि किस दिशा में लिखी जाती थी? → दाएँ से बाएँ
2. अशोक के किस अभिलेख में यूनानी भाषा का प्रयोग हुआ? → कंधार अभिलेख

84. पत्थर पर प्राचीनतम शिलालेख किस भाषा में थे?

(a) पाली

(b) संस्कृत

(c) प्राकृत

(d) ब्राह्मी

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
भारत के प्राचीनतम शिलालेख (विशेषकर अशोक के शिलालेख, 3री शताब्दी ई.पू.) प्राकृत भाषा में लिखे गए थे। यह भाषा उस समय की जनसाधारण की भाषा थी और ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपियों में उत्कीर्ण की गई थी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक के सभी शिलालेख प्राकृत (मागधी प्राकृत) में हैं
– इन्हें ब्राह्मी (अधिकांश भारत में) और खरोष्ठी (उत्तर-पश्चिम में) लिपियों में लिखा गया
– संस्कृत में प्राचीनतम शिलालेख रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख (150 ई.) में मिलते हैं
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक के शिलालेख किस लिपि में हैं? → ब्राह्मी और खरोष्ठी
2. प्राकृत भाषा किसकी आधिकारिक भाषा थी? → मौर्य साम्राज्य की
3. संस्कृत में सबसे पुराना शिलालेख किसका है? → रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख

85. ब्राह्मी लिपि का प्रथम उद्ववाचन किस पर उत्कीर्ण अक्षरों से किया गया?

(a) पत्थर की पट्टियों पर

(b) मुहरों पर

(c) स्तंभों पर

(d) सिक्कों पर

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
ब्राह्मी लिपि के सबसे प्राचीन उदाहरण सिक्कों पर उत्कीर्ण मिलते हैं, विशेष रूप से पाणिनि कालीन (लगभग 4थी शताब्दी ई.पू.) और मौर्यकालीन सिक्कों पर। यह अभिलेखों से पहले के हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– सिक्कों पर ब्राह्मी लेखन शिलालेखों (जैसे अशोक के) से पुराना है
– मुद्राशास्त्र के अनुसार, प्रारंभिक सिक्कों पर राजाओं/जनपदोंके नाम ब्राह्मी में थे
– अशोक के शिलालेख (3री शताब्दी ई.पू.) ब्राह्मी के विकसित रूप में हैं
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. ब्राह्मी लिपि को सर्वप्रथम किसने पढ़ा? → जेम्स प्रिंसेप (1837 ई.) 2. ब्राह्मी का सबसे प्रसिद्ध शिलालेख कौन-सा है? → अशोक का शिलालेख
3. प्राचीन भारत में सिक्कों को क्या कहते थे? → पण, कार्षापण

86. अशोक के शिलालेखों को पढ़ने वाला प्रथम अंग्रेज कौन था?

(a) जॉन टॉवर

(b) हैरी स्मिथ

(c) चार्ल्स मेटकॉफ

(d) जेम्स प्रिंसेप

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep) ने 1837 ई. में ब्राह्मी लिपि को पढ़कर अशोक के शिलालेखों का उद्वाचन किया। उन्होंने शाहबाजगढ़ी और गिरनार के अभिलेखों का अध्ययन कर अशोक के नाम “देवानाम्पिय पियदस्सी” की पहचान की।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– प्रिंसेप एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के सचिव थे
– उन्होंने खरोष्ठी लिपि को भी पढ़ा
– अशोक के 7वें शिलालेख से उन्हें सफलता मिली
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. ब्राह्मी लिपि को पढ़ने में किसने सहायता की? → लक्ष्मी स्वरूप (भारतीय विद्वान)
2. प्रिंसेप ने किस पत्रिका में अपना शोध प्रकाशित किया? → जर्नल ऑफ द एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल
3. अशोक के अभिलेखों की खोज किसने शुरू की? → पुरातत्ववेत्ता टॉमस फैन्स (1810 ई.)

87. प्राचीन भारत में निम्नलिखित में से कौन-सी एक लिपि दाईं ओर से बाईं ओर लिखी जाती थी ?

(a) ब्राह्मी

(b) नंदनागरी

(c) शारदा

(d) खरोष्ठी

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
प्राचीन भारत में खरोष्ठी लिपि ही एकमात्र ऐसी लिपि थी जो दाएँ से बाएँ (Right to Left) लिखी जाती थी। यह लिपि मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी भारत (गांधार क्षेत्र) और मध्य एशिया में प्रयुक्त होती थी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– खरोष्ठी लिपि अरामाईक लिपि से विकसित हुई
– यह अशोक के शिलालेखों (शाहबाजगढ़ी, मानसेहरा) में प्रयुक्त हुई
– अन्य भारतीय लिपियाँ (ब्राह्मी, नंदनागरी, शारदा) बाएँ से दाएँ लिखी जाती हैं
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. खरोष्ठी लिपि किस क्षेत्र में प्रचलित थी? → गांधार (आधुनिक पाकिस्तान-अफगानिस्तान)
2. अशोक के किस अभिलेख में खरोष्ठी लिपि मिलती है? → शाहबाजगढ़ी अभिलेख
3. बाएँ से दाएँ लिखी जाने वाली प्राचीन लिपि कौन-सी है? → ब्राह्मी

88. अभिलेखों में किस शासक का उल्लेख ‘पियदस्सी’ एवं ‘देवानामप्रिय’ के रूप में किया गया है?

(a) चंद्रगुप्त मौर्य

(b) अशोक

(c) समुद्रगुप्त

(d) हर्षवर्धन

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
अशोक के अभिलेखों में उसे ‘देवानाम्पिय’ (देवताओं का प्रिय) और ‘पियदस्सी’ (प्रियदर्शी) की उपाधियों से संबोधित किया गया है। ये उपाधियाँ उसके शिलालेखों और स्तंभलेखों में बार-बार आती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– ये उपाधियाँ ब्राह्मी और खरोष्ठी दोनों लिपियों वाले अभिलेखों में मिलती हैं
– मास्की तथा गुर्जरा अभिलेख में सीधे ‘अशोक’ नाम का उल्लेख है
– ‘देवानाम्पिय’ उपाधि से उसकी धार्मिक सहिष्णुता झलकती है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक के अभिलेख किस भाषा में हैं? → प्राकृत
2. किस अभिलेख में अशोक का वास्तविक नाम मिलता है? → मास्की अभिलेख
3. ‘प्रियदर्शी’ का अर्थ क्या है? → जिसका दर्शन सुखद हो

89. गुजर्रा लघु शिलालेख, जिसमें अशोक का नामोल्लेख किया गया है, कहां स्थित है?

(a) उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में

(b) मध्य प्रदेश के दतिया जिले में

(c) राजस्थान के जयपुर जिले में

(d) बिहार के चंपारन जिले में

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
गुर्जरा लघु शिलालेख (मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित) वह अभिलेख है जिसमें अशोक का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– यह अभिलेख ब्राह्मी लिपि में है
– इसमें अशोक को “देवानांप्रिय अशोक” कहा गया है
– यह लघु शिलालेखों की श्रेणी में आता है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक का नाम किस अन्य अभिलेख में मिलता है? → मास्की अभिलेख
2. गुर्जरा अभिलेख किस भाषा में है? → प्राकृत
3. यह अभिलेख किस लिपि में है? → ब्राह्मी

90. निम्नलिखित अभिलेखों में से किसमें अशोक का नामोल्लेख हुआ है?

(a) गुजर्रा में

(b) अहरौरा में

(c) ब्रह्मगिरि में

(d) सारनाथ में

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
गुर्जरा लघु शिलालेख (मध्य प्रदेश के दतिया जिले में) वह प्रमुख अभिलेख है जिसमें अशोक का नाम स्पष्ट रूप से “देवानांप्रिय अशोक” के रूप में उल्लेखित है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– मास्की अभिलेख (कर्नाटक) में भी अशोक का नाम मिलता है
– ये दोनों लघु शिलालेख श्रेणी में आते हैं
– अधिकांश अभिलेखों में केवल “देवानांप्रिय” उपाधि का प्रयोग हुआ है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक का नाम कहाँ और मिलता है? → मास्की (कर्नाटक)
2. गुर्जरा अभिलेख किस लिपि में है? → ब्राह्मी
3. अशोक की किस उपाधि का सबसे अधिक उल्लेख मिलता है? → देवानांप्रिय

91. निम्नलिखित में से किस एक अभिलेख में अशोक के व्यक्तिगत नाम का उल्लेख मिलता है?

(a) कालसी

(b) रुम्मिनदेई

(c) विशिष्ट कलिंग राजादेश

(d) मास्की

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
मास्की अभिलेख (कर्नाटक) वह प्रमुख अभिलेख है जिसमें अशोक का व्यक्तिगत नाम “देवानांप्रिय अशोक” स्पष्ट रूप से उल्लेखित है। यह अभिलेख 1915 में खोजा गया था।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– गुर्जरा (मध्य प्रदेश) और निट्टूर (कर्नाटक) अभिलेखों में भी अशोक का नाम मिलता है
– अधिकांश अभिलेखों में केवल “देवानांप्रिय” उपाधि का प्रयोग हुआ है
– मास्की अभिलेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. मास्की अभिलेख कहाँ स्थित है? → रायचूर जिला, कर्नाटक
2. अशोक का नाम किस अन्य अभिलेख में मिलता है? → गुर्जरा (मध्य प्रदेश)
3. मास्की अभिलेख कब खोजा गया? → 1915 ई.

92. निम्नलिखित वक्तव्यों में कौन-सा एक वक्तव्य अशोक के प्रस्तर स्तंभों के बारे में गलत है?

(a) इन पर बढ़िया पॉलिश है

(b) ये अखंड हैं

(c) स्तंभों का शैफ्ट शुंडाकार है

(d) ये स्थापत्य संरचना के भाग हैं

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
अशोक के प्रस्तर स्तंभ स्वतंत्र स्मारक हैं और किसी भवन या संरचना का हिस्सा नहीं थे। यह विकल्प गलत है, जबकि अन्य सभी वक्तव्य सही हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– स्तंभों पर उत्कृष्ट मौर्य पॉलिश (चमकदार) है – ये एक ही पत्थर से निर्मित (अखंड) हैं – शैफ्ट (स्तंभ का मुख्य भाग) शुंडाकार (ऊपर से पतला) है
– शीर्ष पर पशु मूर्तियाँ (जैसे सारनाथ का सिंहशीर्ष)
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. सारनाथ स्तंभ का शीर्ष क्या दर्शाता है? → धर्मचक्र प्रवर्तन
2. अशोक ने कितने स्तंभ बनवाए? → लगभग 20 (7 पूर्ण स्तंभ अभी तक मिले हैं)
3. मौर्य पॉलिश किसकी विशेषता है? → मौर्यकालीन पत्थर की कला

93. उत्तराखंड में, सम्राट अशोक के शिलालेखों की एक प्रति कहां मिली थी?

(a) नैनीताल

(b) पौड़ी

(c) टिहरी

(d) कालसी

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
उत्तराखंड में कालसी (देहरादून जिले में स्थित) वह स्थान है जहाँ सम्राट अशोक का शिलालेख मिला था। यह शिलालेख गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र का एकमात्र प्रमुख अशोकन अभिलेख है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– कालसी अभिलेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में है
– इसमें अशोक के धम्म के सिद्धांतों का वर्णन है
– यह मौर्य काल की कला एवं लेखन कला का उत्कृष्ट उदाहरण है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. कालसी अभिलेख किस नदी के किनारे स्थित है? → यमुना नदी
2. अशोक के शिलालेखों की भाषा क्या थी? → प्राकृत
3. कालसी अभिलेख किस राज्य में है? → उत्तराखंड

94. कलिंग युद्ध का विवरण हमें ज्ञात होता है-

(a) 13वें शिलालेख द्वारा

(b) रुम्मिनदेई स्तंभ लेख द्वारा

(c) ह्वेनसांग के विवरण द्वारा

(d) प्रथम लघु शिलालेख द्वारा

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) का विस्तृत विवरण अशोक के 13वें शिलालेख में मिलता है। इस युद्ध के भीषण परिणामों से व्यथित होकर अशोक ने युद्ध नीति त्यागकर धम्म विजय को अपनाया।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– 13वाँ शिलालेख 8 स्थानों पर उत्कीर्ण मिलता है
– इसमें 1 लाख लोग मारे गए, 1.5 लाख बंदी बनाए गए का उल्लेख है
– यह अभिलेख अशोक के पश्चाताप और अहिंसा के संकल्प को दर्शाता है
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. कलिंग युद्ध कब हुआ था? → 261 ईसा पूर्व
2. अशोक ने कलिंग विजय के बाद क्या अपनाया? → बौद्ध धर्म
3. 13वाँ शिलालेख किस लिपि में है? → ब्राह्मी

95. निम्न में से अशोक के किस अभिलेख में पारंपरिक अवसरों पर पशु बलि पर रोक लगाई गई है, ऐसा लगता है कि यह पाबंदी पशुओं के वध पर थी?

(a) शिला अभिलेख I

(b) स्तंभ अभिलेख V

(c) शिला अभिलेख IX

(d) शिला अभिलेख XI

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
अशोक के प्रथम शिलालेख में पशु बलि पर प्रतिबंध का उल्लेख मिलता है। इसमें राजा द्वारा राजकीय रसोई में पशु वध पर रोक लगाने और केवल दो मृग व एक मुर्गा ही मारने की अनुमति देने का वर्णन है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– यह निर्णय बौद्ध धर्म अपनाने के बाद लिया गया – शिलालेख I में 56 पंक्तियाँ हैं (सबसे लंबा) – अशोक ने समाज में अहिंसा को बढ़ावा दिया
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक ने किस अभिलेख में पशु हत्या पर प्रतिबंध बताया? → शिलालेख I
2. अशोक की रानी किस अभिलेख में नाम से मिलती है? → कंधार अभिलेख (करुवाकी)
3. पशु बलि पर रोक किस धर्म से प्रभावित थी? → बौद्ध धर्म

96. टालेमी फिलाडेल्फस, जिसके साथ अशोक के राजनय संबंध थे, कहां का शासक था?

(a) साइरोन

(b) मिस्र

(c) मकदूनिया

(d) सीरिया

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
टॉलेमी II फिलाडेल्फस (Ptolemy II Philadelphus) मिस्र का यूनानी शासक था, जिसके साथ अशोक ने राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। अशोक ने अपने द्वितीय शिलालेख में पाँच यूनानी शासकों का उल्लेख किया है, जिनमें टॉलेमी II भी शामिल है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक के संबंधित यूनानी शासक:
1. एंटियोकस II (सीरिया)
2. टॉलेमी II (मिस्र) 3. एंटिगोनस गोनाटस (मकदूनिया)
4. मगास (साइरेनीका)
5. अलेक्जेंडर (एपिरस/कॉरिन्थ)
– अभिलेख स्रोत: अशोक का द्वितीय शिलालेख (कालसी, गिरनार, मानसेहरा आदि में मिलता है)।
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक ने किस अभिलेख में यूनानी शासकों का उल्लेख किया? → द्वितीय शिलालेख
2. टॉलेमी II का शासनकाल कब था? → 285–246 ईसा पूर्व
3. अशोक ने किस यूनानी शासक को चिकित्सा एवं जड़ी-बूटियाँ भेजीं? → एंटियोकस II (सीरिया)
4. मिस्र की राजधानी क्या थी? → अलेक्जेंड्रिया
5. अशोक के दूत किस देश नहीं गए? → रोम (केवल यूनानी राज्यों तक संबंध थे)
नोट: अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु इन राज्यों में दूत भेजे, लेकिन मिस्र में बौद्ध धर्म नहीं फैला।

97. निम्नलिखित में से किस राजवंश के शासकों के सुदूर देशों जैसे सीरिया एवं मिस्र के साथ राजकीय संबंध थे?

(a) चोल

(b) गुप्त

(c) मौर्य

(d) पल्लव

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
मौर्य वंश (विशेषकर अशोक) के शासकों का सीरिया, मिस्र, मकदूनिया आदि यूनानी राज्यों के साथ राजनयिक संबंध थे। अशोक के द्वितीय शिलालेख में पाँच यूनानी शासकों का उल्लेख मिलता है, जिनके साथ उसने मैत्रीपूर्ण सम्पर्क बनाए रखा।
# महत्वपूर्ण तथ्य:
1. संबंधित यूनानी शासक:
– एंटियोकस II थियोस (सीरिया)
– टॉलेमी II फिलाडेल्फस (मिस्र)
– एंटिगोनस गोनाटस (मकदूनिया)
– मगास (साइरेनीका)
– अलेक्जेंडर II (एपिरस)
2. अभिलेख साक्ष्य:
– अशोक का द्वितीय शिलालेख (कालसी, गिरनार, मानसेहरा में मिला)।
– इसमें धम्म प्रचार हेतु दूत भेजने का उल्लेख है।
3. विशेष तथ्य:
– अशोक ने चिकित्सक एवं औषधियाँ भी भेजीं।
– ये संबंध व्यापारिक नहीं, बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक थे।
# संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक ने किस अभिलेख में यूनानी शासकों का नाम लिया? → द्वितीय शिलालेख
2. मिस्र का तत्कालीन शासक कौन था? → टॉलेमी II फिलाडेल्फस
3. किस भारतीय राजवंश का विदेशों से सीधा सम्पर्क था? → मौर्य वंश
4. अशोक ने सीरिया में किसे दूत भेजा? → महाराक्षित (बौद्ध भिक्षु)
5. ये संबंध किस उद्देश्य से थे? → बौद्ध धर्म का प्रचार

98. कथन (A) : अशोक ने कलिंग को मौर्य साम्राज्य में जोड़ लिया था।

कारण (R) : कलिंग दक्षिण भारत को जाने वाले स्थलीय एवं समुद्री मार्गों को नियंत्रित करता था।

सही उत्तर का चुनाव, नीचे दिए गए कूट के प्रयोग से करें –

कूट :

(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।

(b) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।

(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
1. कथन (A) सही है:
– अशोक ने 261 ई.पू. में कलिंग (आधुनिक ओडिशा) पर विजय प्राप्त कर उसे मौर्य साम्राज्य में मिला लिया।
– इस युद्ध का विवरण 13वें शिलालेख में मिलता है।
2. कारण (R) सही है और (A) का सही स्पष्टीकरण देता है:
– कलिंग एक रणनीतिक क्षेत्र था जो दक्षिण भारत के स्थलीय एवं समुद्री मार्गों को नियंत्रित करता था।
– इसके व्यापारिक और सैन्य महत्व के कारण अशोक ने इसे जीतना आवश्यक समझा।
#महत्वपूर्ण तथ्य:
– कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने युद्ध नीति त्यागी और धम्म विजय को अपनाया।
– कलिंग का समुद्री बंदरगाह (ताम्रलिप्ति) भारत-दक्षिण पूर्व एशिया व्यापार का केंद्र था।
#संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. कलिंग युद्ध कब हुआ? → 261 ई.पू.
2. कलिंग की राजधानी क्या थी? → तोसली (आधुनिक धौली)
3. अशोक ने कलिंग विजय के बाद क्या किया? → बौद्ध धर्म अपनाया और अहिंसा का मार्ग चुना
4. कलिंग के प्रमुख बंदरगाह का नाम क्या था? → ताम्रलिप्ति (आधुनिक तमलुक)
नोट: कारण (R) कथन (A) के पीछे के रणनीतिक कारण को स्पष्ट करता है, इसलिए यह सही स्पष्टीकरण है।

99. कथन (A): मौर्यकालीन शासकों ने धार्मिक आधार पर भू-अनुदान नहीं दिया था।

कारण (R) : भू-अनुदान के विरुद्ध कृषकों ने विद्रोह किया।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।

(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
1. कथन (A) सत्य है – मौर्यकालीन अभिलेखों एवं साक्ष्यों में धार्मिक संस्थाओं को भू-अनुदान देने का कोई प्रमाण नहीं मिलता।
2. कारण (R) असत्य है – मौर्यकाल में कृषक विद्रोहों का कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
तथ्य:
– मौर्य प्रशासन में भूमि राज्य के नियंत्रण में थी
– अशोक के शिलालेखों में धार्मिक संस्थाओं को भूदान का उल्लेख नहीं
– भूदान के विरोध की घटनाएँ गुप्तकाल एवं मध्यकाल में देखने को मिलती हैं
संबंधित जानकारी:
1. मौर्यकालीन भूमि कर व्यवस्था का वर्णन किस ग्रंथ में है? – अर्थशास्त्र
2. भूमि कर किस नाम से जाना जाता था? – भाग
3. धार्मिक संस्थाओं को भूदान का प्रचलन कब शुरू हुआ? – गुप्तकाल

100. चंद्रगुप्त के संबंध में सूची-1 को सूची-11 से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट के द्वारा सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1 (स्त्रोत)       सूची-II (तथ्य)

(A) बौद्ध स्त्रोत      1. वह साधारण कुल में पैदा हुआ था

(B) ब्राह्मण स्त्रोत 2. वह एक क्षत्रिय था

(C) यूनानी             3. वह शूद्र था

(D) जैन स्त्रोत       4. यह ग्राम के मुखिया की दुहिता का पुत्र था

कूट :

ABCD

(a)1234

(b)4321

(c)2314

(d)2134

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
सुमेलन:
– बौद्ध स्त्रोत → साधारण कुल में जन्म (1)
– ब्राह्मण स्त्रोत → क्षत्रिय था (2)
– यूनानी स्त्रोत → शूद्र बताया (3)
– जैन स्त्रोत → ग्राम मुखिया की पोता (4)
मुख्य बिंदु:
– विभिन्न स्रोतों में चंद्रगुप्त की जाति/वंश के बारे में अलग-अलग विवरण
– अधिकांश स्रोतों में उसे क्षत्रिय या सामान्य वंश का माना गया

101. कथन (A): अशोक के अभिलेख उसके साम्राज्य में हर जगह अवस्थित मिले हैं परन्तु इस सम्राट का कोई भी अभिलेख देश के उत्तर-पूर्वी भाग में नहीं मिला।

कारण (R): ऐसा इसलिए है क्योंकि देश का यह भाग उसके साम्राज्य का अंग नहीं था।

कूटः

(a) A एवं R दोनों सही हैं R, A का सही व्याख्या करता है।

(b) A तथा R दोनों सही हैं किन्तु R, A का सही व्याख्या नहीं कर रहा है।

(c) A सही लेकिन R गलत है।

(d) A गलत है परन्तु R सही है।

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
1. कथन (A) सही है: – अशोक के अभिलेख भारत, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मिले हैं, लेकिन उत्तर-पूर्वी भारत (असम, मणिपुर आदि) में कोई अभिलेख नहीं मिला।
2. कारण (R) सही है और (A) की सही व्याख्या करता है:
– उत्तर-पूर्वी भाग मौर्य साम्राज्य का हिस्सा नहीं था, इसलिए वहाँ अशोक के अभिलेख नहीं मिलते।
### महत्वपूर्ण तथ्य:
– अशोक का साम्राज्य कश्मीर से कर्नाटक और अफगानिस्तान से बंगाल तक फैला था।
– कलिंग (ओडिशा) को छोड़कर दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्से भी उसके साम्राज्य में नहीं थे।
### संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. अशोक के अभिलेख किस लिपि में हैं? → ब्राह्मी (अधिकांश), खरोष्ठी (उत्तर-पश्चिम में)।
2. मौर्य साम्राज्य की पूर्वी सीमा क्या थी? → बंगाल (ताम्रलिप्ति बंदरगाह तक)।
3. किस क्षेत्र में अशोक के स्तंभ मिले हैं? → दिल्ली, सारनाथ, वैशाली, लौरिया नंदनगढ़ आदि।
नोट: चूँकि उत्तर-पूर्वी भाग मौर्य साम्राज्य में नहीं था, इसलिए वहाँ अभिलेखों का अभाव है। इस प्रकार, कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

102. निम्न कथनों पर विचार कीजिए-

(1) अशोक के 12वें शिलालेख में सातवाहनों का उल्लेख मिलता है।

(2) जैन परम्परा के अनुसार सिमुक ने बौद्ध एवं जैन दोनों प्रकार के मंदिरों का निर्माण करवाया।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) 1 और 2

(b) केवल 1

(c) केवल 2

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्‍तर : (c) :    व्याख्या :
– कथन 1 गलत: अशोक के 12वें शिलालेख में सातवाहनों का कोई उल्लेख नहीं।
– कथन 2 सही: जैन ग्रंथों के अनुसार सिमुक ने बौद्ध व जैन मंदिर बनवाए।
मुख्य बिंदु:
– 12वाँ शिलालेख धार्मिक सहिष्णुता के बारे में है – सातवाहन काल में धार्मिक उदारता थी
संबंधित तथ्य:
1. सातवाहनों का प्रसिद्ध शासक → गौतमीपुत्र शातकर्णी
2. अशोक का 12वाँ शिलालेख → सभी धर्मों का सम्मान

103. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-II                                  सूची-1

(A) प्रथम शिलालेख             1. पशु बलि की भर्त्सना     

(B) तृतीय शिलालेख            2. धर्म के सिद्धांत

(C) पंचम शिलालेख              3. धर्म महामात्रों की नियुक्ति

(D) सप्तम शिलाले              4. अशोक की तीर्थयात्राएं

कूट :

ABCD

(a)1243

(b)3412

(c)3214

(d)1234

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
सुमेलन:
– प्रथम शिलालेख → पशु बलि की भर्त्सना (1)
– तृतीय शिलालेख → धर्म के सिद्धांत (2)
– पंचम शिलालेख → धर्म महामात्रों की नियुक्ति (3)
– सप्तम शिलालेख → अशोक की तीर्थयात्राएँ (4)
मुख्य बिंदु:
– प्रथम: पशु हत्या पर प्रतिबंध
– तृतीय: नैतिक जीवन के नियम
– पंचम: धर्म प्रचारकों की नियुक्ति
– सप्तम: बौद्ध तीर्थों की यात्रा
संबंधित तथ्य:
1. कलिंग युद्ध का वर्णन → 13वाँ शिलालेख
2. धम्म नीति का सार → 14वाँ शिलालेख

104.निम्नलिखित में से अशोक का कौन-सा एक अभिलेख इशिला नामक प्राचीन नगर का उल्लेख करता है?

(a) मास्की शिलालेख

(b) ब्रह्मगिरी

(c) गुर्जरा

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
अशोक के ब्रह्मगिरी शिलालेख (कर्नाटक) में इशिला नामक प्राचीन नगर का उल्लेख मिलता है। यह नगर मौर्यकालीन प्रशासनिक केंद्र था।
महत्वपूर्ण तथ्य:
– ब्रह्मगिरी से दो शिलालेख मिले हैं:
1. शिलालेख I: इशिला नगर का उल्लेख
2. शिलालेख II: धम्म के नियम
– इशिला को मौर्य साम्राज्य का दक्षिणी प्रशासनिक केंद्र माना जाता है।
संबंधित प्रश्नोत्तर:
1. ब्रह्मगिरी किस राज्य में स्थित है? → कर्नाटक
2. अशोक के किस अभिलेख में उसका नाम मिलता है? → मास्की
3. इशिला किस नदी के किनारे स्थित था? → तुंगभद्रा
नोट: मास्की और गुर्जरा अभिलेखों में इशिला का उल्लेख नहीं है।

105. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे गयें कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1 (मौर्य कालीन प्रशासनिक अधिकारी)     सूची-II (कार्य)       

(A) समाहर्ता                          1. कोषाधिकारी

(B) सन्निघाता                      2. महासंग्राहक

(C) कर्मान्तिक                      3. मुख्य न्यायाधीश

(D) व्यवहारिक                     4. खानों का प्रमुख

कूट :

ABCD

(a)1234

(b)1243

(c)4321

(d)2143

उत्‍तर : (d) :    व्याख्या :
सुमेलन:
– समाहर्ता → महासंग्राहक (2)
– सन्निघाता → कोषाधिकारी (1)
– कर्मान्तिक → खानों का प्रमुख (4)
– व्यवहारिक → मुख्य न्यायाधीश (3)
संक्षिप्त व्याख्या:
1. समाहर्ता: कर संग्रह का प्रमुख
2. सन्निघाता: राजकोष का अधिकारी
3. कर्मान्तिक: खनन एवं उद्योग प्रभारी
4. व्यवहारिक: न्यायिक मामलों का प्रमुख
संबंधित तथ्य:
– ये पद अर्थशास्त्र में वर्णित हैं
– समाहर्ता प्रांतीय प्रशासन में सर्वोच्च था
– व्यवहारिक दंड विधान संभालता था

106. कथन (A): मेगस्थनीज के अनुसार उसके भ्रमण के समय भारत में दास प्रथा नहीं थी।

कारण (R): मेगस्थनीज दासों एवं उनके स्वामियों में विभेद कर पाने में असमर्थ था क्योंकि दासों के प्रति उनके स्वामियों का दयालुतापूर्ण व्यवहार था।

कूटः

(a) कथन A और कारण R दोनों सही हैं कारण R कथन A का सही व्याख्या करता है।

(b) कथन A तथा कारण R दोनों सही हैं किन्तु R, A सही व्याख्या नहीं कर रहा है।

(c) Aसही लेकिन R गलत है।

(d) Aगलत है परन्तु R सही है।

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
– कथन (A) सही है: मेगस्थनीज ने अपने ग्रंथ ‘इंडिका’ में लिखा कि भारत में दास प्रथा नहीं थी।
– कारण (R) सही है और (A) की व्याख्या करता है: मेगस्थनीज ने देखा कि भारत में सेवकों और स्वामियों के बीच संबंध इतने सौहार्दपूर्ण थे कि वह अंतर नहीं कर पाया।
मुख्य बिंदु:
– मेगस्थनीज का निरीक्षण: भारतीय समाज में दास जैसी स्पष्ट सामाजिक विभाजन नहीं
– कारण: सेवकों के साथ उदार व्यवहार के कारण पश्चिमी दास प्रथा जैसी स्थिति नहीं दिखी
संबंधित तथ्य:
1. मेगस्थनीज किसका दूत था? → सेल्यूकस निकेटर
2. उसने कौन-सा ग्रंथ लिखा? → इंडिका
3. भारत में वर्ण व्यवस्था को कैसे देखा? → सात जातियों के रूप में वर्णित किया

107 सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे गयें कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1                   सूची-II

(A) गूढ़ पुरुष         1. गणिकाएं

(B) संस्था              2. भ्रमण शील गुप्तचर

(C) संचरा               3. गुप्तचर

(D) रूपाजीवा         4. स्थिर गुप्तचर

कूट :

ABCD

(a)1234

(b)3421

(c)3412

(d)4231

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
सुमेलन:
– गूढ़ पुरुष → गुप्तचर (3)
– संस्था → स्थिर गुप्तचर (4)
– संचरा → भ्रमणशील गुप्तचर (2)
– रूपाजीवा → गणिकाएं (1)
संक्षिप्त व्याख्या:
1. गूढ़ पुरुष: सामान्य गुप्तचर
2. संस्था: निश्चित स्थान पर तैनात जासूस
3. संचरा: घूम-घूम कर जानकारी जुटाने वाले
4. रूपाजीवा: सुंदरता का उपयोग करने वाली गणिकाएं/जासूस
संबंधित तथ्य:
– ये पद अर्थशास्त्र में वर्णित हैं
– गुप्तचर व्यवस्था मौर्य प्रशासन की विशेषता थी
– रूपाजीवा स्त्रियाँ विशेष रूप से राजदरबार में कार्य करती थीं

108. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1                                  सूची-II

(A) चन्द्रगुप्त मौर्य               1. प्रियदर्शी

(B) बिन्दुसार                        2. सैण्ड्रोकोट्टस

(C) अशोक                            3. अमित्रघात

(D) चाणक्य                         4. विष्णु गुप्त

कूट :

ABCD

(a)1234

(b)2314

(c)1324

(d)4321

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
सुमेलन:
– चन्द्रगुप्त मौर्य → सैण्ड्रोकोट्टस (2)
– बिन्दुसार → अमित्रघात (3)
– अशोक → प्रियदर्शी (1)
– चाणक्य → विष्णु गुप्त (4)
संक्षिप्त व्याख्या:
1. सैण्ड्रोकोट्टस: यूनानी स्रोतों में चन्द्रगुप्त का नाम
2. अमित्रघात: बिन्दुसार की उपाधि (शत्रुओं का संहारक)
3. प्रियदर्शी: अशोक की उपाधि (अभिलेखों में प्रयुक्त)
4. विष्णु गुप्त: चाणक्य का दूसरा नाम
संबंधित तथ्य:
– यूनानी लेखकों ने चन्द्रगुप्त को सैण्ड्रोकोट्टस कहा
– अशोक के अभिलेखों में स्वयं को प्रियदर्शी बताया
– मुद्राराक्षस नाटक में चाणक्य को विष्णु गुप्त कहा गया

110. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें-

सूची-1                                  सूची-II

(A) सांची स्पूत                     1. कनिष्क

(B) हाथी गुम्फा अभिलेख    2. अन्तियालकीडस

(C) शिनकोट अभिलेख         3. मिनाण्डर

(D) पुरुषपुर का पैगोडा        4. अशोक

5. खारवेल

कूट :

ABCD

(a)4531

(b)1234

(c)3124

(d)4351

उत्‍तर : (a) :    व्याख्या :
सुमेलन:
– सांची स्तूप → अशोक (4)
– हाथी गुम्फा अभिलेख → खारवेल (5)
– शिनकोट अभिलेख → मिनाण्डर (3)
– पुरुषपुर का पैगोडा → कनिष्क (1)
संक्षिप्त व्याख्या:
1. सांची: अशोक ने प्रारंभिक स्तूप बनवाया
2. हाथी गुम्फा: खारवेल (कलिंग राजा) का प्रसिद्ध अभिलेख
3. शिनकोट: इंडो-ग्रीक शासक मिनाण्डर से संबंधित
4. पुरुषपुर: कनिष्क ने बौद्ध पैगोडा बनवाया
संबंधित तथ्य:
– सांची मूलतः अशोक कालीन, बाद में विस्तारित
– हाथी गुम्फा में खारवेल की विजयें वर्णित
– मिनाण्डर बौद्ध धर्म अपनाने के लिए प्रसिद्ध
– पुरुषपुर (पेशावर) कुषाण कालीन प्रमुख केंद्र

111.कथन (A): कौटिल्य के अर्थशास्त्र में पण्याध्यक्ष के पद का उल्लेख मिला है।

कारण (R): मौर्य साम्राज्य वृहत स्तर पर व्यापार में लगा था।

कूटः

(a) कथन A और कारण R दोनों सही है कारण R कथन A का सही व्याख्या करता है।

(b) कथन A तथा कारण R दोनों सही हैं किन्तु R, A सही व्याख्या नहीं कर रहा है।

(c) A सही लेकिन R गलत है।

(d) A गलत है परन्तु R सही है।

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
– कथन (A) सही है: अर्थशास्त्र में पण्याध्यक्ष (व्यापार अधिकारी) का उल्लेख मिलता है।
– कारण (R) सही है पर व्याख्या नहीं: मौर्यकाल में व्यापार वृहत स्तर पर था, किन्तु यह तथ्य पण्याध्यक्ष के पद के अस्तित्व का प्रत्यक्ष कारण नहीं है।
मुख्य बिंदु:
– पण्याध्यक्ष का कार्य: राजकीय व्यापार, मूल्य नियंत्रण एवं बाजार देखरेख
– मौर्यकालीन व्यापार: आंतरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विकसित

112.कथन (A): पतंजलि यह साक्ष्य प्रदान करता हैं कि मौर्यकाल में धन के लिए नए पंथ और अंधविश्वास प्रवर्तित थे।

कारण (R): राज्य में किसी भी अप्रत्याशित आर्थिक संकट का सामना करने के लिए कोषागार का पर्याप्त भरा रहना आवश्यक था।

कूटः

(a) कथन A और कारण R दोनों सही हैं कारण Rकथन A का सही व्याख्या करता है

(b) कथन A तथा कारण R दोनों सही हैं किन्तु R, A सही व्याख्या नहीं कर रहा है

(c) A सही लेकिन R गलत है।

(d) Aगलत है परन्तु R सही है।

उत्‍तर : (b) :    व्याख्या :
– कथन (A) सही है: पतंजलि ने महाभाष्य में उल्लेख किया कि मौर्यकाल में धन के लिए नए पंथ फैलाए जाते थे।
– कारण (R) सही है पर असंबंधित: कोषागार भरने की आवश्यकता का पंथ प्रचार से कोई सीधा संबंध नहीं है।
मुख्य बिंदु:
– पतंजलि का संदर्भ: धार्मिक छल-प्रपंच की ओर इशारा
– मौर्य कोषागार: अर्थशास्त्र में राजकोष प्रबंधन का विवरण
संबंधित तथ्य :
1. पतंजलि किस युग के थे? → शुंग काल
2. मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था का स्रोत? → अर्थशास्त्र
3. कोषाध्यक्ष किसे कहते थे? → सन्निधाता

FAQs :Mauryan Empire

मौर्य साम्राज्य की स्थापना कब और किसने की?

322 ई.पू. में चंद्रगुप्त मौर्य ने।

चंद्रगुप्त मौर्य का प्रमुख मंत्री और मार्गदर्शक कौन था?

चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) – अर्थशास्त्र के रचयिता।

अशोक किस युद्ध के बाद बौद्ध धर्म की ओर प्रवृत्त हुआ?

कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के बाद।

अशोक ने बौद्ध धर्म प्रचार के लिए क्या कदम उठाए?

धर्म यात्राएँ, स्तंभ/शिला लेख, बौद्ध मिशनों को विदेश भेजना।

मौर्य काल में सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक ग्रंथ कौन-सा था?

अर्थशास्त्र – चाणक्य द्वारा रचित

मौर्यकालीन प्रशासन की विशेषता क्या थी?

केंद्रीकृत प्रशासन, जासूसी व्यवस्था, विस्तृत कर प्रणाली।

अशोक के अभिलेख किन-किन लिपियों में मिलते हैं?

ब्राह्मी (उत्तर भारत), खरोष्ठी (उत्तर-पश्चिम), अरामाईक और ग्रीक (अफगानिस्तान क्षेत्र)।

मौर्य साम्राज्य का विस्तार कहाँ तक था?

कश्मीर से कर्नाटक और अफगानिस्तान से बंगाल तक।

मौर्य वंश का अंतिम शासक कौन था?

बृहद्रथ – जिसकी हत्या पुष्यमित्र शुंग ने की।

मौर्य काल की अर्थव्यवस्था कैसी थी?

कृषि प्रधान, परंतु राज्य नियंत्रण में वाणिज्य, खनिज, वन और जल संसाधन भी।

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